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मल्टीलेवल पार्किंग के नाम पर बर्बाद किए 49 लाख
Updated Thu, 18 Jan 2018 01:33 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
जिला प्रशासन ने झज्जर और बहादुरगढ़ के लघु सचिवालयों में मल्टीलेवल पार्किंग लगवाने के नाम पर करीब 49 साख लाख रुपये बर्बाद कर दिए। इस व्यवस्था से दोनों जगह न तो वाहन चालकों को कोई सुविधा मिली और न ही पार्किंग व्यवस्था में सुधार हो पाया। अब सामाजिक कार्यकर्ता ने इसके लिए दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
बता दें कि फिलहाल बहादुरगढ़ का लघु सचिवालय नए परिसर में स्थानांतरित हो गया है। लेकिन वर्ष 2013 में बहादुरगढ़ के तत्कालीन व झज्जर के लघु सचिवालयों में हर रोज एक हजार से अधिक वाहनों का आवागमन रहता था। वाहन चालक बेतरतीब ढंग से वाहनों को पार्क कर देते थे। इस समस्या से निदान के लिए प्रशासन ने वर्ष 2013 में दोनों लघु सचिवालयों में इलेक्ट्रिक मल्टीलेवल पार्किंग लगवाई थी। लेकिन 2013 से अब तक दोनों स्थानों पर इन पार्किंगों का एक दिन भी सदुपयोग नहीं हुआ। दोनों पार्किंगों के लिए लगाए गए लोहे के ढांचे उसी स्थान पर कबाड़ बन गए हैं, जहां वे लगाए गए थे। सरकारी खजाने के लगभग 48.77 लाख रुपये तो बर्बाद होने के साथ-साथ दोनों जगह की जमीन भी अवरुद्ध कर दी गई।
नगर परिषद और पालिका ने बनवाई थी पार्किंग
इन दोनों पार्किंग के संबंध में कोई अधिकारियों से बातचीत का प्रयास करता तो अधिकारी उन्हें टाल देते हैं। लेकिन अब जन सूचना अधिकार के तहत ये भी खुलासा हुआ है कि इन पार्किंग को सुचारु करने के लिए न किसी तरह का शुल्क लगाया गया और न ही कोई रुपया सरकार को मिला। आरटीआई और सामाजिक कार्यकर्ता राहुल मंडोरा को दिए जवाब में नगर परिषद बहादुरगढ़ के एसपीआईओ ने बताया है कि इसे शहरवासियों की सहूलियत के लिए बनाया गया था। लघु सचिवालय परिसरों में ये दोनों पार्किंग मशीन निदेशक, स्थानीय शहरी निकाय हरियाणा से स्वीकृति के बाद तत्कालीन उपायुक्त के आदेश से वर्ष 2013-14 में झज्जर में नगर पालिका ने और बहादुरगढ़ में नगर परिषद ने लगाई थी। जवाब के मुताबिक, इस बात का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है कि इन दोनों पार्किंगों में अब तक कितने वाहनों को पार्क किया गया है।
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किसी भी डीसी ने नहीं दिया ध्यान
मल्टीलेवल पार्किंग का प्रोजेक्ट लगवाने वाले तत्कालीन डीसी अजीत बालाजी जोशी के बाद जिले में कई डीसी आए। लेकिन किसी ने भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया कि आखिर ये पार्किंग शुरू क्यों नहीं हो पाई। अवरुद्ध हुई जगह को वाहनों के लिए खाली करवाना भी जरूरी नहीं समझा। दोनों शहरों में पार्किंग के ढांचे ज्यों के त्यों उसी जगह पड़े हैं। इनमें लगी बिजली सभी छह मोटर खराब हो चुकी हैं।
बहादुरगढ़ में शिफ्ट हो गई कोर्ट
इस पार्किंग पर लगाए गए लाखों रुपये स्वाहा हो गए हैं, क्योंकि अब यहां से कोर्ट और प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालय बालोर रोड पर नए परिसर में शिफ्ट कर दिए हैं। पुराने कोर्ट के बाहर लगी मल्टीलेवल पार्किंग को नए कोर्ट परिसर में नहीं लगाया गया। आरटीआई कार्यकर्ता राहुल मंडोरा का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों ने मल्टीलेवल पार्किंग को लगाने में जनता के लाखों रुपये खराब कर दिए। फिर भी ये पार्किंग लोगों के काम नहीं आ पाई।
सीएम विंडो पर भी दी शिकायत
राहुल मंडोरा का कहना है कि छह सितंबर 2016 को इसकी शिकायत मुख्यमंत्री को सीएम विंडो पर दी थी। उक्त दरखास्त का नंबर 081498 है। इसकी जांच भी बड़ी हैरानी वाली रही। शिकायत की महीनों तक सिर्फ जांच चलती रही और फिर सीएम विंडो ने सिर्फ मल्टीलेवल पार्किंग कंपनी को पत्र लिखकर ठीक कराने के लिए कह दिया। लेकिन आज तक पार्किंग शुरू नहीं हो पाई।
क्या कहना है प्रशासन का
मल्टीलेवल पार्किंग के बेकार पड़े रहने का मामला प्रशासन के संज्ञान में आया है। इस व्यवस्था को खराब नहीं होने दिया जाएगा और इसका सदुपयोग शुरू करने का इंतजाम कराया जाएगा। झज्जर की मल्टीलेवल पार्किंग को ठीक कराने के लिए कंपनी को पत्र लिखा गया है। वहीं, बहादुरगढ़ की मल्टी लेवल पार्किंग को भी जल्द किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट करवाया जाएगा।
- सोनल गोयल, डीसी झज्जर।
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बहादुरगढ़।
जिला प्रशासन ने झज्जर और बहादुरगढ़ के लघु सचिवालयों में मल्टीलेवल पार्किंग लगवाने के नाम पर करीब 49 साख लाख रुपये बर्बाद कर दिए। इस व्यवस्था से दोनों जगह न तो वाहन चालकों को कोई सुविधा मिली और न ही पार्किंग व्यवस्था में सुधार हो पाया। अब सामाजिक कार्यकर्ता ने इसके लिए दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
बता दें कि फिलहाल बहादुरगढ़ का लघु सचिवालय नए परिसर में स्थानांतरित हो गया है। लेकिन वर्ष 2013 में बहादुरगढ़ के तत्कालीन व झज्जर के लघु सचिवालयों में हर रोज एक हजार से अधिक वाहनों का आवागमन रहता था। वाहन चालक बेतरतीब ढंग से वाहनों को पार्क कर देते थे। इस समस्या से निदान के लिए प्रशासन ने वर्ष 2013 में दोनों लघु सचिवालयों में इलेक्ट्रिक मल्टीलेवल पार्किंग लगवाई थी। लेकिन 2013 से अब तक दोनों स्थानों पर इन पार्किंगों का एक दिन भी सदुपयोग नहीं हुआ। दोनों पार्किंगों के लिए लगाए गए लोहे के ढांचे उसी स्थान पर कबाड़ बन गए हैं, जहां वे लगाए गए थे। सरकारी खजाने के लगभग 48.77 लाख रुपये तो बर्बाद होने के साथ-साथ दोनों जगह की जमीन भी अवरुद्ध कर दी गई।
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नगर परिषद और पालिका ने बनवाई थी पार्किंग
इन दोनों पार्किंग के संबंध में कोई अधिकारियों से बातचीत का प्रयास करता तो अधिकारी उन्हें टाल देते हैं। लेकिन अब जन सूचना अधिकार के तहत ये भी खुलासा हुआ है कि इन पार्किंग को सुचारु करने के लिए न किसी तरह का शुल्क लगाया गया और न ही कोई रुपया सरकार को मिला। आरटीआई और सामाजिक कार्यकर्ता राहुल मंडोरा को दिए जवाब में नगर परिषद बहादुरगढ़ के एसपीआईओ ने बताया है कि इसे शहरवासियों की सहूलियत के लिए बनाया गया था। लघु सचिवालय परिसरों में ये दोनों पार्किंग मशीन निदेशक, स्थानीय शहरी निकाय हरियाणा से स्वीकृति के बाद तत्कालीन उपायुक्त के आदेश से वर्ष 2013-14 में झज्जर में नगर पालिका ने और बहादुरगढ़ में नगर परिषद ने लगाई थी। जवाब के मुताबिक, इस बात का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है कि इन दोनों पार्किंगों में अब तक कितने वाहनों को पार्क किया गया है।
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किसी भी डीसी ने नहीं दिया ध्यान
मल्टीलेवल पार्किंग का प्रोजेक्ट लगवाने वाले तत्कालीन डीसी अजीत बालाजी जोशी के बाद जिले में कई डीसी आए। लेकिन किसी ने भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया कि आखिर ये पार्किंग शुरू क्यों नहीं हो पाई। अवरुद्ध हुई जगह को वाहनों के लिए खाली करवाना भी जरूरी नहीं समझा। दोनों शहरों में पार्किंग के ढांचे ज्यों के त्यों उसी जगह पड़े हैं। इनमें लगी बिजली सभी छह मोटर खराब हो चुकी हैं।
बहादुरगढ़ में शिफ्ट हो गई कोर्ट
इस पार्किंग पर लगाए गए लाखों रुपये स्वाहा हो गए हैं, क्योंकि अब यहां से कोर्ट और प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालय बालोर रोड पर नए परिसर में शिफ्ट कर दिए हैं। पुराने कोर्ट के बाहर लगी मल्टीलेवल पार्किंग को नए कोर्ट परिसर में नहीं लगाया गया। आरटीआई कार्यकर्ता राहुल मंडोरा का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों ने मल्टीलेवल पार्किंग को लगाने में जनता के लाखों रुपये खराब कर दिए। फिर भी ये पार्किंग लोगों के काम नहीं आ पाई।
सीएम विंडो पर भी दी शिकायत
राहुल मंडोरा का कहना है कि छह सितंबर 2016 को इसकी शिकायत मुख्यमंत्री को सीएम विंडो पर दी थी। उक्त दरखास्त का नंबर 081498 है। इसकी जांच भी बड़ी हैरानी वाली रही। शिकायत की महीनों तक सिर्फ जांच चलती रही और फिर सीएम विंडो ने सिर्फ मल्टीलेवल पार्किंग कंपनी को पत्र लिखकर ठीक कराने के लिए कह दिया। लेकिन आज तक पार्किंग शुरू नहीं हो पाई।
क्या कहना है प्रशासन का
मल्टीलेवल पार्किंग के बेकार पड़े रहने का मामला प्रशासन के संज्ञान में आया है। इस व्यवस्था को खराब नहीं होने दिया जाएगा और इसका सदुपयोग शुरू करने का इंतजाम कराया जाएगा। झज्जर की मल्टीलेवल पार्किंग को ठीक कराने के लिए कंपनी को पत्र लिखा गया है। वहीं, बहादुरगढ़ की मल्टी लेवल पार्किंग को भी जल्द किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट करवाया जाएगा।
- सोनल गोयल, डीसी झज्जर।