{"_id":"59f38a224f1c1bee688b7d31","slug":"11509132834-jhajjar-bahadurgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुर्राह नस्ल का युवा बादशाह बना पशु मेले में आकर्षण का केंद्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुर्राह नस्ल का युवा बादशाह बना पशु मेले में आकर्षण का केंद्र
Updated Sat, 28 Oct 2017 01:11 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
एलएलबी की पढ़ाई करते-करते जिला झज्जर के लोवा खुर्द गांव निवासी छात्र अजय को अच्छे पशु पालने का शौक पैदा हो गया और सपने पूरे करने के लिए मुर्राह नस्ल का कटड़ा पाल लिया। अजय ने अपने मुर्राह नस्ल के कटड़े का नाम बादशाह रखा है। बादशाह की कद-काठी, शरीर की बनावट और फुर्ती पशु मेले के पहले दिन आकर्षण का केंद्र बनी रही। छात्र अजय का कहना है कि उन्होंने कई बार अखबारों आदि में पढ़ा कि मुर्राह नस्ल का भैंसा पालकर भी लाखों रुपये कमाए जा सकते हैं। श्रेष्ठ पशुओं को ईनाम दिए जा रहे हैं, कैटवॉक हो रही है।
इसी से प्रेरणा पाकर उन्होंने भी छात्र जीवन से ही श्रेष्ठ पशु पालने का निर्णय लिया। अजय ने बताया कि उनके पिता सरकारी नौकरी करते हैं लेकिन पढ़ाई के साथ-साथ पशु पालने पर घर वाले भी उनके इस काम से खुश हैं। अजय का कहना है कि बादशाह को लेकर वह काफी उत्सुक है। बादशाह फिलहाल उसका सपना है, वह बादशाह को युवराज, हीरा जैसा भैंसा बनाना चाहता है। इसलिए बादशाह की डाइट, रखरखाव पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है।
रोजाना चार किलो दूध पीता है बादशाह
कानून के छात्र ने बताया कि बादशाह फिलहाल 17 महीने का है, इसकी खुराक चार किलो बिनौले, दो किलो दूध सुबह व दो किलो दूध के साथ पौष्टिक चारा दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अभी तक बादशाह के काफी खरीदार लाखों रुपये के ऑफर के साथ आ चुके हैं, लेकिन वह इसके सीमन बेचेगा ताकि क्षेत्र में श्रेष्ठ पशुओं की संख्या बढ़े और राज्य में दूध का उत्पादन बढ़ सके।
विज्ञापन
विज्ञापन
झज्जर।
एलएलबी की पढ़ाई करते-करते जिला झज्जर के लोवा खुर्द गांव निवासी छात्र अजय को अच्छे पशु पालने का शौक पैदा हो गया और सपने पूरे करने के लिए मुर्राह नस्ल का कटड़ा पाल लिया। अजय ने अपने मुर्राह नस्ल के कटड़े का नाम बादशाह रखा है। बादशाह की कद-काठी, शरीर की बनावट और फुर्ती पशु मेले के पहले दिन आकर्षण का केंद्र बनी रही। छात्र अजय का कहना है कि उन्होंने कई बार अखबारों आदि में पढ़ा कि मुर्राह नस्ल का भैंसा पालकर भी लाखों रुपये कमाए जा सकते हैं। श्रेष्ठ पशुओं को ईनाम दिए जा रहे हैं, कैटवॉक हो रही है।
इसी से प्रेरणा पाकर उन्होंने भी छात्र जीवन से ही श्रेष्ठ पशु पालने का निर्णय लिया। अजय ने बताया कि उनके पिता सरकारी नौकरी करते हैं लेकिन पढ़ाई के साथ-साथ पशु पालने पर घर वाले भी उनके इस काम से खुश हैं। अजय का कहना है कि बादशाह को लेकर वह काफी उत्सुक है। बादशाह फिलहाल उसका सपना है, वह बादशाह को युवराज, हीरा जैसा भैंसा बनाना चाहता है। इसलिए बादशाह की डाइट, रखरखाव पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है।
विज्ञापन
रोजाना चार किलो दूध पीता है बादशाह
कानून के छात्र ने बताया कि बादशाह फिलहाल 17 महीने का है, इसकी खुराक चार किलो बिनौले, दो किलो दूध सुबह व दो किलो दूध के साथ पौष्टिक चारा दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अभी तक बादशाह के काफी खरीदार लाखों रुपये के ऑफर के साथ आ चुके हैं, लेकिन वह इसके सीमन बेचेगा ताकि क्षेत्र में श्रेष्ठ पशुओं की संख्या बढ़े और राज्य में दूध का उत्पादन बढ़ सके।
विज्ञापन