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दादी ले गई थी जितेंद्र को डेरे में, 10 साल पूर्व बना था बाबा का भक्त
Updated Sun, 03 Sep 2017 01:39 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
हनीप्रीत को पुलिस द्वारा लुक नोटिस जारी किए जाने के कारण हर कोई जानना चाहता है कि आखिर वो कार कहां चली गई। जिसमें सवार होकर हनीप्रीत सुनारिया जेल से गई थी। इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए अमर उजाला टीम जितेंद्र के झज्जर स्थित घर पहुंची। जहां पर कीर्तन चल रहा था लेकिन मीडिया को देख गेट बंद कर लिया और महिलाओं ने कीर्तन बंद कर दिया। दरवाजा खटखटाने पर जितेंद्र की मां ने दरवाजा खोला।
जितेंद्र की मां से बात की गई तो उन्होंने बताया कि जितेंद्र अपनी ससुराल रोहतक रहता है। वो हर रविवार बच्चों को परिवार से मिलाने के लिए झज्जर आता था। लेकिन इस बार बाबा की सजा होने के चलते नहीं आ पाया। जितेंद्र की मां के अनुसार जितेंद्र बहादुरगढ़ एसडीएम कार्यालय में डीसी रेट पर डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर कार्यरत है। जितेंद्र ने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम को दस साल पूर्व में गुरु माना था। 10 साल पहले जितेंद्र अपनी दादी के साथ डेरे में गया था। जिसके बाद से जितेंद्र का डेरे के हर कार्य में हिस्सा लेने लगा।
इसके बाद बहादुरगढ़ स्थित एसडीएम कार्यालय में मौजूद जितेंद्र से बात की गई तो उसने बताया कि उसने हनीप्रीत को रोहतक निवासी संजय चावला के घर छोड़ दिया था, जिसके बाद उसे कोई जानकारी नहीं है। जितेंद्र ने खुलासा किया है कि संजय चावला ने जब उसे कार लेकर जेल के बाहर बुलाया तो पहले नहीं बताया था कि उसे वहां पर किस कार्य के लिए बुलाया गया है। हन्नीप्रीत को कार में बैठाने से पूर्व उसकी कार की बाकायदा तलाशी ली गई थी। जिसके बाद ही हनीप्रीत को कार में बैठाया था।
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हनीप्रीत को नेपाल बार्डर तक ढूंढने पहुंची पुलिस ने अभी तक जितेंद्र व संजय चावला जैसे अहम लोगों से कोई पूछताछ नहीं की है। जितेंद्र रूटीन की तरह से अभी दफ्तर में ड्यूटी कर रहा है। वहीं, जितेंद्र ने बताया कि अगर डेरे की गद्दी पर कोई और शख्स बैठता है तो उनका रुझान कम हो जाएगा।
- हनीप्रीत को जेल से कार में ले जाने वाले जितेंद्र के घर पहुंची अमर उजाला टीम
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झज्जर।
हनीप्रीत को पुलिस द्वारा लुक नोटिस जारी किए जाने के कारण हर कोई जानना चाहता है कि आखिर वो कार कहां चली गई। जिसमें सवार होकर हनीप्रीत सुनारिया जेल से गई थी। इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए अमर उजाला टीम जितेंद्र के झज्जर स्थित घर पहुंची। जहां पर कीर्तन चल रहा था लेकिन मीडिया को देख गेट बंद कर लिया और महिलाओं ने कीर्तन बंद कर दिया। दरवाजा खटखटाने पर जितेंद्र की मां ने दरवाजा खोला।
जितेंद्र की मां से बात की गई तो उन्होंने बताया कि जितेंद्र अपनी ससुराल रोहतक रहता है। वो हर रविवार बच्चों को परिवार से मिलाने के लिए झज्जर आता था। लेकिन इस बार बाबा की सजा होने के चलते नहीं आ पाया। जितेंद्र की मां के अनुसार जितेंद्र बहादुरगढ़ एसडीएम कार्यालय में डीसी रेट पर डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर कार्यरत है। जितेंद्र ने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम को दस साल पूर्व में गुरु माना था। 10 साल पहले जितेंद्र अपनी दादी के साथ डेरे में गया था। जिसके बाद से जितेंद्र का डेरे के हर कार्य में हिस्सा लेने लगा।
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इसके बाद बहादुरगढ़ स्थित एसडीएम कार्यालय में मौजूद जितेंद्र से बात की गई तो उसने बताया कि उसने हनीप्रीत को रोहतक निवासी संजय चावला के घर छोड़ दिया था, जिसके बाद उसे कोई जानकारी नहीं है। जितेंद्र ने खुलासा किया है कि संजय चावला ने जब उसे कार लेकर जेल के बाहर बुलाया तो पहले नहीं बताया था कि उसे वहां पर किस कार्य के लिए बुलाया गया है। हन्नीप्रीत को कार में बैठाने से पूर्व उसकी कार की बाकायदा तलाशी ली गई थी। जिसके बाद ही हनीप्रीत को कार में बैठाया था।
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हनीप्रीत को नेपाल बार्डर तक ढूंढने पहुंची पुलिस ने अभी तक जितेंद्र व संजय चावला जैसे अहम लोगों से कोई पूछताछ नहीं की है। जितेंद्र रूटीन की तरह से अभी दफ्तर में ड्यूटी कर रहा है। वहीं, जितेंद्र ने बताया कि अगर डेरे की गद्दी पर कोई और शख्स बैठता है तो उनका रुझान कम हो जाएगा।
- हनीप्रीत को जेल से कार में ले जाने वाले जितेंद्र के घर पहुंची अमर उजाला टीम