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शहर में बढ़ी लो-प्रेशर की समस्या, गहराया पेयजल संकट
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चरखी दादरी। शहर में 1200 मीटर नई पेयजल लाइन बिछाने का काम तो जन स्वास्थ्य विभाग ने शुरू कर दिया, लेकिन लो प्रेशर सप्लाई की समस्या के समाधान की कोई कवायद नहीं की। जिससे वार्डों में सप्लाई के समय लो-प्रेशर की समस्या बन गई है। पर्याप्त पेयजल सप्लाई न होने से शहर में पेयजल संकट गहराने लगा है और इससे लोग बेहद परेशान हैं।
शहर की आबादी बढ़ने पर हर साल कनेक्शनों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन पानी की आपूर्ति में विस्तार और सुधार नहीं हो पा रहा है। जैसे ही नई पेयजल लाइनें मेन लाइनों से कनेक्ट होंगी, शहर में पानी का प्रेशर और लो होने पर पेयजल संकट गहराना स्वाभाविक है। पार्षदों के धरने के बाद जन स्वास्थ्य विभाग ने पेयजल के 153 लाख के प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है, लेकिन इससे पेयजल की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकेगा।
शहर में वैसे ही पेयजल लाइनों में पानी का प्रेशर काफी कम है। एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई की जा रही है। गर्मी में तो पानी की खपत डेढ़ गुणा तक बढ़ गई, लेकिन पानी की आपूर्ति एवं क्षमता बढ़ाने पर ध्यान नहीं दिया गया। शहर में इस समय पेयजल का लो प्रेशर है। बाहरी एवं नई कालोनियों में पानी का प्रेशर काफी लो होने की वजह से लोगों को ज्यादा परेशानी बनी रहती है। कई बार तो बिजली मोटर से भी पानी का उठान नहीं हो पाता। शहर की आबादी एवं दायरा लगातार बढ़ रहा है। मकानों की संख्या भी हर साल करीब 400 तक बढ़ जाती है। इन नए मकानों में भी हर साल पेयजल कनेक्शन बढ़ रहे हैं।
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शहर की आबादी बढ़ने पर हर साल कनेक्शनों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन पानी की आपूर्ति में विस्तार और सुधार नहीं हो पा रहा है। जैसे ही नई पेयजल लाइनें मेन लाइनों से कनेक्ट होंगी, शहर में पानी का प्रेशर और लो होने पर पेयजल संकट गहराना स्वाभाविक है। पार्षदों के धरने के बाद जन स्वास्थ्य विभाग ने पेयजल के 153 लाख के प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है, लेकिन इससे पेयजल की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकेगा।
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शहर में वैसे ही पेयजल लाइनों में पानी का प्रेशर काफी कम है। एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई की जा रही है। गर्मी में तो पानी की खपत डेढ़ गुणा तक बढ़ गई, लेकिन पानी की आपूर्ति एवं क्षमता बढ़ाने पर ध्यान नहीं दिया गया। शहर में इस समय पेयजल का लो प्रेशर है। बाहरी एवं नई कालोनियों में पानी का प्रेशर काफी लो होने की वजह से लोगों को ज्यादा परेशानी बनी रहती है। कई बार तो बिजली मोटर से भी पानी का उठान नहीं हो पाता। शहर की आबादी एवं दायरा लगातार बढ़ रहा है। मकानों की संख्या भी हर साल करीब 400 तक बढ़ जाती है। इन नए मकानों में भी हर साल पेयजल कनेक्शन बढ़ रहे हैं।
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