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धड़ल्ले से हो रहा पॉलीथिन का प्रयोग, कार्रवाई के नाम पर दो माह में महज 20 ही चालान
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उमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। शहर की सीवर व्यवस्था ब्लॉक होने का पॉलिथीन ही सबसे प्रमुख कारण है। वहीं, पार्षदों की मांग के बावजूद पॉलिथीन के प्रयोग पर नगर परिषद अंकुश नहीं लगा पा रही है। नप सूत्रों की मानें तो दो माह में महज 20 चालान ही किए हैं जबकि शहर में हर दुकान और रेहड़ी पर धड़ल्ले से इनका प्रयोग हो रहा है। ऐसे दुकानदारों पर कार्रवाई करने के लिए प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड और नगर परिषद की संयुक्त टीम गठित की गई थी लेकिन इसके बावजूद नियमित रूप से अभियान नहीं चलाया जा रहा। वहीं, पॉलिथीन प्रयोग करने वालों पर कार्रवाई न होने से पार्षदों में भी रोष पनप रहा है।
प्रतिबंध लगाने के बाद भी दादरी शहर में धड़ल्ले से पॉलिथीन का प्रयोग हो रहा है। नप की टीम केवल कभी-कभार खानापूर्ति कर पॉलिथीन प्रयोग करने वाले दुकानदारों के चालान काटती है। नप सूत्रों की मानें तो शहर में तीन हजार दुकानें और 750 रेहड़िया हैं। इस पर प्रतिदिन 80 से 90 किलोग्राम पॉलिथीन की खपत होती है। वहीं, पिछले दो माह में कार्रवाई के नाम पर महज 20 चालान ही किए हैं। इन दुकानदारों पर एक हजार से दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। दुकानों और रेहड़ी पर प्रयोग होने वाले पॉलिथीन को लोग ले जाकर सड़क और नालों में डाल देते हैं। इससे सीवर ब्लॉक हो जाते हैं। सड़क पर डाले पॉलिथीन को पशु खा जाते हैं। इसके चलते पशुओं की मौत भी हो रही है। वहीं, जन स्वास्थ्य विभाग भी लोगों से घरों के बाहर नालियों और नालों में पॉलिथीन न फेंकने की अपील कर चुका है, जो कि अब तक बेअसर रही है। जन स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों का कहना है कि शहर की सीवर व्यवस्था ब्लॉक होने का प्रमुख कारण सीवर लाइनों में कचरे का जमा होना है। उन्होंने बताया कि सीवर लाइनों में अधिकतर कचरा प्लास्टिक पॉलिथीन का ही होता है। वहीं, दुकानदार भी पॉलिथीन के निस्तारण को गंभीर नहीं है। बस स्टैंड रोड पर रात के समय पॉलिथीन एकत्र कर आग के हवाले कर दिया जाता ह, जिससे वायु प्रदूषण भी बढ़ रहा है। पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगाने के लिए जिला प्रशासन ने एक साल में शहर में 500 जूट के थैले भी बांटे थे। इस दौरान दुकानदारों से भी ग्राहकों को पॉलिथीन की बजाय जूट के थैलों में सामान देने के निर्देश दिए थे। इन निर्देशों की पालना में दुकानदार रुचि नहीं ले रहे हैं और बेखौफ होकर शहर में पॉलिथीन का प्रयोग किया जा रहा है।
पॉलिथीन का प्रयोग करने वाले दुकानदारों के हम समय-समय पर चालान काटते हैं। साथ ही दुकानदारों को जूट का थैला प्रयोग करने की भी हिदायत देते हैं। दुकानदारों और रेहड़ीधारकों से अपील की है कि वे पॉलिथीन का प्रयोग न करें अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। - विजय शर्मा, सेनेटरी इंस्पेक्टर, नगर परिषद
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चरखी दादरी। शहर की सीवर व्यवस्था ब्लॉक होने का पॉलिथीन ही सबसे प्रमुख कारण है। वहीं, पार्षदों की मांग के बावजूद पॉलिथीन के प्रयोग पर नगर परिषद अंकुश नहीं लगा पा रही है। नप सूत्रों की मानें तो दो माह में महज 20 चालान ही किए हैं जबकि शहर में हर दुकान और रेहड़ी पर धड़ल्ले से इनका प्रयोग हो रहा है। ऐसे दुकानदारों पर कार्रवाई करने के लिए प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड और नगर परिषद की संयुक्त टीम गठित की गई थी लेकिन इसके बावजूद नियमित रूप से अभियान नहीं चलाया जा रहा। वहीं, पॉलिथीन प्रयोग करने वालों पर कार्रवाई न होने से पार्षदों में भी रोष पनप रहा है।
प्रतिबंध लगाने के बाद भी दादरी शहर में धड़ल्ले से पॉलिथीन का प्रयोग हो रहा है। नप की टीम केवल कभी-कभार खानापूर्ति कर पॉलिथीन प्रयोग करने वाले दुकानदारों के चालान काटती है। नप सूत्रों की मानें तो शहर में तीन हजार दुकानें और 750 रेहड़िया हैं। इस पर प्रतिदिन 80 से 90 किलोग्राम पॉलिथीन की खपत होती है। वहीं, पिछले दो माह में कार्रवाई के नाम पर महज 20 चालान ही किए हैं। इन दुकानदारों पर एक हजार से दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। दुकानों और रेहड़ी पर प्रयोग होने वाले पॉलिथीन को लोग ले जाकर सड़क और नालों में डाल देते हैं। इससे सीवर ब्लॉक हो जाते हैं। सड़क पर डाले पॉलिथीन को पशु खा जाते हैं। इसके चलते पशुओं की मौत भी हो रही है। वहीं, जन स्वास्थ्य विभाग भी लोगों से घरों के बाहर नालियों और नालों में पॉलिथीन न फेंकने की अपील कर चुका है, जो कि अब तक बेअसर रही है। जन स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों का कहना है कि शहर की सीवर व्यवस्था ब्लॉक होने का प्रमुख कारण सीवर लाइनों में कचरे का जमा होना है। उन्होंने बताया कि सीवर लाइनों में अधिकतर कचरा प्लास्टिक पॉलिथीन का ही होता है। वहीं, दुकानदार भी पॉलिथीन के निस्तारण को गंभीर नहीं है। बस स्टैंड रोड पर रात के समय पॉलिथीन एकत्र कर आग के हवाले कर दिया जाता ह, जिससे वायु प्रदूषण भी बढ़ रहा है। पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगाने के लिए जिला प्रशासन ने एक साल में शहर में 500 जूट के थैले भी बांटे थे। इस दौरान दुकानदारों से भी ग्राहकों को पॉलिथीन की बजाय जूट के थैलों में सामान देने के निर्देश दिए थे। इन निर्देशों की पालना में दुकानदार रुचि नहीं ले रहे हैं और बेखौफ होकर शहर में पॉलिथीन का प्रयोग किया जा रहा है।
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पॉलिथीन का प्रयोग करने वाले दुकानदारों के हम समय-समय पर चालान काटते हैं। साथ ही दुकानदारों को जूट का थैला प्रयोग करने की भी हिदायत देते हैं। दुकानदारों और रेहड़ीधारकों से अपील की है कि वे पॉलिथीन का प्रयोग न करें अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। - विजय शर्मा, सेनेटरी इंस्पेक्टर, नगर परिषद
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