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डार्क जोन में शामिल 60 गांवों में 100 करोड़ खर्च कर नहरी पानी से दी जाएगी पेयजल आपूर्ति
Updated Fri, 26 Oct 2018 01:04 AM IST
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डार्क जोन में शामिल 60 गांवों में 100 करोड़ खर्च कर नहरी पानी से होगी पेयजल आपूर्ति
चरखी दादरी। बाढड़ा क्षेत्र के करीब 60 से अधिक गांवों के लोगों को त्योहारी सीजन में प्रदेश सरकार पेयजल संकट से निजात दिलाने जा रही है। डार्क जोन क्षेत्र में शामिल इन गांवों में पेयजल आपूर्ति के लिए नाबार्ड के माध्यम से लगभग 100 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी और इस पर जल्द काम शुरू होगा। इन गांवों में पेयजल लाइनें बिछाकर नहरी पानी से पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। यह जानकारी वीरवार को मीडिया सेंटर में बाढड़ा के विधायक सुखविंद्र सिंह मांढी ने पत्रकारवार्ता के दौरान दी। विधायक ने प्रदेश सरकार के चार साल पूरे होने पर अपना रिपोर्ट कार्ड भी जारी किया और कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर जन प्रतिनिधि की क्षेत्र की जनता के प्रति जवाबदेही बनती है। उसी जवाबदेही का निर्वहन कर चार साल के दौरान बाढड़ा विधानसभा में करवाए कार्यों का लेखाजोखा आज जनता के समक्ष पेश किया गया है।
उन्होंने कहा कि पिछले चार साल के दौरान क्षेत्र में हुए विकास कार्यों को शब्दों में बयान करना संभव नहीं है। वर्तमान सरकार ने ही दादरी को जिला और बाढड़ा को उपमंडल बनाने की क्षेत्र के लोगों की वर्षों पुरानी मांग को पूरा किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के चार साल के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों ने तुलनात्मक रूप से पिछले 15 सालों का रिकार्ड तोड़ा है।
उन्होंने बताया कि एक सर्वे में पता चला था कि बाढड़ा क्षेत्र के 60 से भी अधिक गांवों में 500 से एक हजार फुट गहरे बोर से पेयजल आपूर्ति होती है और वह पानी खारा है। क्षेत्र के इन गांवों सहित साथ लगते अन्य गांवों की पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए एक बड़ी योजना तैयार की गई है। इस योजना के तहत नाबार्ड के माध्यम से इस क्षेत्र में नहरी पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था की जायेगी, जिस पर लगभग 100 करोड़ रुपये की राशि खर्च होगी। उन्होंने बताया कि योजना अंतिम चरण में है और इस पर जल्द कार्य शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले तक यह क्षेत्र डार्क जोन घोषित कर दिया गया था। इस समस्या को देखते हुए सरकार के प्रयास से 20 सालों बाद क्षेत्र की नहरों में सभी टेलों तक पानी पहुंचाया गया है। पिछले 30 सालों से गांवों के जोहड़ों में पानी नहीं आया था। यहां के लोगों ने पानी की आस छोड़ दी थी। इस मौके पर भाजपा जिला सचिव पवन आडवानी, किसाना मोर्चा जिला अध्यक्ष ओमबीर महराणा, विस्तारक बारूराम, भल्लेराम चेयरमैन, विजय अग्रवाल, राजीव सरपंच, धर्मचंद सहजलाण, सतीश महराणा, प्रवीण, चांदराम, संजय, रवि फौगाट, जयवीर, कर्मवीर नांधा, सोमबीर नांधा, कल्लू व धोलिया मांढी सहित अन्य उपस्थित रहे।
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100 करोड़ से सुदृढ़ किया नहरी तंत्र, पेड़ों के नीचे कक्षाएं लगनी कराई बंद
विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल के आदेशों पर प्रदेश के नहरी तंत्र को सुदृढ़ करने पर 100 करोड़ रुपये खर्च किए गए और पुराने पंपों सहित माटरों को भी बदला गया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों का शिक्षा को लेकर क्षेत्र से उदासीन रवैया रहा। पिछली सरकार ने भी राजनैतिक लाभ की मंशा से चुनाव से ठीक पहले बाढड़ा में कन्या महाविद्यालय खोलने की केवल घोषणा मात्र ही की। इसके लिए न तो जमीन का प्रावधान किया और न ही दूसरी कोई व्यवस्था की, जिस कारण बेटियों ने पेड़ो के नीचे कक्षाएं लगाई। आज बाढड़ा में लगभग 13 करोड़ रुपये की लागत से भव्य कालेज भवन तैयार है, जिसमें क्षेत्र की 1200 से भी अधिक कन्याएं शिक्षा ले रही हैं। उन्होंने बताया कि मांढ़ी हरिया के कालेज को कोएड का दर्जा हाल ही में दिया गया है और यहां प्रथम वर्ष में 200 विद्यार्थी प्रवेश ले चुके हैं। जल्द ही इस कालेज के निर्माण के लिए टेंडर कर दिए जाएंगे और करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से भवन का निर्माण होगा।
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चरखी दादरी। बाढड़ा क्षेत्र के करीब 60 से अधिक गांवों के लोगों को त्योहारी सीजन में प्रदेश सरकार पेयजल संकट से निजात दिलाने जा रही है। डार्क जोन क्षेत्र में शामिल इन गांवों में पेयजल आपूर्ति के लिए नाबार्ड के माध्यम से लगभग 100 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी और इस पर जल्द काम शुरू होगा। इन गांवों में पेयजल लाइनें बिछाकर नहरी पानी से पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। यह जानकारी वीरवार को मीडिया सेंटर में बाढड़ा के विधायक सुखविंद्र सिंह मांढी ने पत्रकारवार्ता के दौरान दी। विधायक ने प्रदेश सरकार के चार साल पूरे होने पर अपना रिपोर्ट कार्ड भी जारी किया और कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर जन प्रतिनिधि की क्षेत्र की जनता के प्रति जवाबदेही बनती है। उसी जवाबदेही का निर्वहन कर चार साल के दौरान बाढड़ा विधानसभा में करवाए कार्यों का लेखाजोखा आज जनता के समक्ष पेश किया गया है।
उन्होंने कहा कि पिछले चार साल के दौरान क्षेत्र में हुए विकास कार्यों को शब्दों में बयान करना संभव नहीं है। वर्तमान सरकार ने ही दादरी को जिला और बाढड़ा को उपमंडल बनाने की क्षेत्र के लोगों की वर्षों पुरानी मांग को पूरा किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के चार साल के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों ने तुलनात्मक रूप से पिछले 15 सालों का रिकार्ड तोड़ा है।
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उन्होंने बताया कि एक सर्वे में पता चला था कि बाढड़ा क्षेत्र के 60 से भी अधिक गांवों में 500 से एक हजार फुट गहरे बोर से पेयजल आपूर्ति होती है और वह पानी खारा है। क्षेत्र के इन गांवों सहित साथ लगते अन्य गांवों की पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए एक बड़ी योजना तैयार की गई है। इस योजना के तहत नाबार्ड के माध्यम से इस क्षेत्र में नहरी पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था की जायेगी, जिस पर लगभग 100 करोड़ रुपये की राशि खर्च होगी। उन्होंने बताया कि योजना अंतिम चरण में है और इस पर जल्द कार्य शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले तक यह क्षेत्र डार्क जोन घोषित कर दिया गया था। इस समस्या को देखते हुए सरकार के प्रयास से 20 सालों बाद क्षेत्र की नहरों में सभी टेलों तक पानी पहुंचाया गया है। पिछले 30 सालों से गांवों के जोहड़ों में पानी नहीं आया था। यहां के लोगों ने पानी की आस छोड़ दी थी। इस मौके पर भाजपा जिला सचिव पवन आडवानी, किसाना मोर्चा जिला अध्यक्ष ओमबीर महराणा, विस्तारक बारूराम, भल्लेराम चेयरमैन, विजय अग्रवाल, राजीव सरपंच, धर्मचंद सहजलाण, सतीश महराणा, प्रवीण, चांदराम, संजय, रवि फौगाट, जयवीर, कर्मवीर नांधा, सोमबीर नांधा, कल्लू व धोलिया मांढी सहित अन्य उपस्थित रहे।
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100 करोड़ से सुदृढ़ किया नहरी तंत्र, पेड़ों के नीचे कक्षाएं लगनी कराई बंद
विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल के आदेशों पर प्रदेश के नहरी तंत्र को सुदृढ़ करने पर 100 करोड़ रुपये खर्च किए गए और पुराने पंपों सहित माटरों को भी बदला गया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों का शिक्षा को लेकर क्षेत्र से उदासीन रवैया रहा। पिछली सरकार ने भी राजनैतिक लाभ की मंशा से चुनाव से ठीक पहले बाढड़ा में कन्या महाविद्यालय खोलने की केवल घोषणा मात्र ही की। इसके लिए न तो जमीन का प्रावधान किया और न ही दूसरी कोई व्यवस्था की, जिस कारण बेटियों ने पेड़ो के नीचे कक्षाएं लगाई। आज बाढड़ा में लगभग 13 करोड़ रुपये की लागत से भव्य कालेज भवन तैयार है, जिसमें क्षेत्र की 1200 से भी अधिक कन्याएं शिक्षा ले रही हैं। उन्होंने बताया कि मांढ़ी हरिया के कालेज को कोएड का दर्जा हाल ही में दिया गया है और यहां प्रथम वर्ष में 200 विद्यार्थी प्रवेश ले चुके हैं। जल्द ही इस कालेज के निर्माण के लिए टेंडर कर दिए जाएंगे और करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से भवन का निर्माण होगा।