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एक बार फिर बंदरोें को पकड़ने की तैयारी में नप
Updated Sun, 22 Oct 2017 12:43 AM IST
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एक बार फिर बंदरोें को पकड़ने की तैयारी में नप
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
शहरवासियों को बंदरों के आतंक से निजात दिलाने में नगर परिषद अब तक कामयाब नहीं हो पाई है। दस माह से नप अधिकारी योजना को तैयार करके बैठे हैं लेेकिन चाहकर भी इसे धरातल पर नहीं उतार पाए हैं। इसको सिरे चढ़ाने के लिए नगर परिषद के अधिकारियों ने एक बार फिर नए सिरे से ठेकेदार की तलाश शुरू कर दी है। परिषद की बैठक में मामला गर्माने पर तीखी बहस भी हुई और पार्षदों ने एक-दूसरे पर जमकर छींटाकशी भी की थी। पिछले सप्ताह ही नप ने बंदर पकड़ो अभियान शुरू करने के लिए टेंडर लगाया। नगर परिषद की पहली पसंद उत्तर प्रदेश के ही किसी ठेकेदार को हायर करना है। नप सूत्रों की मानें तो अभियान के लिए ठेकेदार अधिकारियों को मिल चुका है। अक्तूबर माह के अंत में अभियान शुरू किया जा सकता है। अधिकारियों की मानें तो शहर में बंदरों की तादाद करीब एक हजार है। पहले चरण में 500 बंदरों को पकड़वाने की योजना अधिकारियों ने तैयार कर रखी है। अक्तूबर माह के अंतिम सप्ताह में इसके टेंडर ओपन हो सकते हैं।
नगर परिषद शहरवासियों को बंदरों से निजात दिलाने की तैयारी में है। इसे सिरे चढ़ाने के लिए नगर परिषद के अधिकारियों ने टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इससे पहले नगर परिषद ने कई बार टेंडर लगाए थे लेकिन किसी भी ठेकेदार के आवेदन न करने से इस पर काम शुरू ही नहीं हो पाया। बीते डेढ़ साल की बात करें तो डीसी से लेकर एसडीएम, चेयरमैन, विधायकों तक यह मामला पहुंचा था। पिछले कुछ माह से ही बंदरों के काटने से डेढ़ दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। गांधी नगर निवासी एक बच्चे को तो बंदरों के काटने से 27 टांके आए थे। बंदर पकड़ने के लिए नगर परिषद करीब डेढ़ साल में आठ बार टेंडर लगा चुकी है लेकिन किसी भी एजेंसी द्वारा टेंडर न लेने के कारण यह मसला अधर में ही लटका है। अमर उजाला इस मुद्दे को समय -समय पर उठाता आ रहा है। शहर में इस समय शहरी और बाहरी क्षेत्र में बंदरों ने आतंक मचा रखा है। इस समय शहर के सभी वार्डों में बंदरों की भरमार है। इनकी संख्या लगातार बड़ती जा रही है। लंबे समय से बंदर पकड़ने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे।
खंडहरों को बनाया ठिकाना, घरों में मचाते हैं उत्पात
बंदरों ने शहर में मौजूद खंडहरों को अपना ठिकाना बना रखा है। इतना ही नहीं बंदरों का झुंड घर में घुसकर उत्पात भी मचाता है। बंदरों के काटने की बढ़ती घटनाओं से इस समय महिलाओं और बच्चों में भय बना हुआ है। बंदरों की वजह से लोगों ने छतों पर जाना छोड़ दिया है। बंदर परिजनों की मौजूदगी में मकानों में घुसकर अंदर रखा सामान तक ले जाते हैं। इस टीम को प्रति बंदर के हिसाब से भुगतान किया जाएगा। अधिकारियों से 500 बंदर पकड़ने की अनुमति ही मिली है।
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तीन सदस्यीय टीम करनी पड़ी थी गठित
बंदर पकड़ो अभियान का मामला परिषद की बैठक में भी उठा था। अलग -अलग पार्षदों ने अपने वार्डों में बंदरों के आतंक से नप कार्यकारिणी को रूबरू करवाया था। पार्षदों की समस्या के मद्देनजर बैठक में सर्व सहमति से एक तीन सदस्यीय टीम का गठन किया था। इस टीम की जिम्मेवारी अभियान शुरू कराने के लिए ठेकेदार की तलाश करने की थी। इसके अलावा नगर परिषद के अधिकारी एसडीएम ओमप्रकाश के संपर्क में भी थे। एसडीएम ने भी ठेकेदार की तलाश में नगर परिषद की मदद करने का आश्वासन बैठक में दिया था।
इन कॉलोनियाें और वार्डों में बंदरों का ज्यादा खौफ
वैसे तो शहर के साथ-साथ समीपवर्ती गांवों में बंदरों को आतंक है। शहर के करीब एक दर्जन वार्ड ऐसे हैं जहां हर समय बंदरों का झुंड घूमता नजर आता है। शहर के रेलवे रोड, गांधी नगर, प्रेम नगर, रविदास बस्ती, कबीर नगर, वार्ड नंबर-एक, वार्ड नंबर-सात, वार्ड नंबर-तीन, पुराना शहर, हीरा चौक, छोटी बाजारी, काठमंडी, सैनीपुरा, चरखी दरवाजा, एमसी कालोनी, वार्ड-19 और वार्ड-21 में बंदरों के आतंक से लोग काफी परेशान हैं।
10 से 15 शिकायतें पहुंच रही प्रतिदिन
बंदरों के आतंक से हर कोई परेशान है। आए दिन किसी न किसी घर में घुसकर बंदरों का झुंड घरेलू सामान तोड़ जाता है। इतना ही नहीं बच्चों और महिलाओं को कई दफा बंदरों द्वारा काटने के मामले भी सामने आ चुके हैं। बंदरों से निजात दिलाने की मांग काफी पुरानी है। प्रतिदिन 10 से 15 लोग यह शिकायत लेकर नप अधिकारियों के पास पहुंच चुके हैं लेकिन नप अब तक बंदरों से निजात दिलाने में सफल नहीं हो पाई है।
प्रति बंदर ज्यादा रेट मांगने पर बदलना पड़ा ठेकेदार
नप अधिकारियों ने अभियान शुरू करने में आ रही अड़चनों को लेकर स्पष्ट किया है कि करीब डेढ़ माह पहले एक यूपी का ठेकेदार हायर किया था। उसने प्रति बंदर रेट बहुत ज्यादा मांगें। नप सूत्रों ने बताया कि ठेकेदार प्रति बंदर करीब 750 रुपये मांग रहा था जबकि नप अधिकारी करीब 400 रुपये देने को ही तैयार थे। अब नप अधिकारी डीसी से अनुमति लेकर प्रति बंदर फिक्स रेट को बढ़वाने की तैयारी में भी हैं ताकि कई माह पुरानी मांग को सिरे चढ़ाया जा सके।
वर्जन
जल्द से जल्द शहरवासियों को बंदरों के आतंक से निजात दिला देंगे। हमने ठेकेदार बदलने के बाद दोबारा टेंडर लगा दिए हैं। इस बार उम्मीद है कि एजेंसी आवेदन कर दे अन्यथा डीसी साहब से अनुमति लेकर इस दिशा में कोई अन्य प्रभावी कदम उठाया जाएगा। दस दिन के अंदर हम अभियान शुरू करने की तैयारी में हैं। - संजय यादव, सचिव नगर परिषद
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
शहरवासियों को बंदरों के आतंक से निजात दिलाने में नगर परिषद अब तक कामयाब नहीं हो पाई है। दस माह से नप अधिकारी योजना को तैयार करके बैठे हैं लेेकिन चाहकर भी इसे धरातल पर नहीं उतार पाए हैं। इसको सिरे चढ़ाने के लिए नगर परिषद के अधिकारियों ने एक बार फिर नए सिरे से ठेकेदार की तलाश शुरू कर दी है। परिषद की बैठक में मामला गर्माने पर तीखी बहस भी हुई और पार्षदों ने एक-दूसरे पर जमकर छींटाकशी भी की थी। पिछले सप्ताह ही नप ने बंदर पकड़ो अभियान शुरू करने के लिए टेंडर लगाया। नगर परिषद की पहली पसंद उत्तर प्रदेश के ही किसी ठेकेदार को हायर करना है। नप सूत्रों की मानें तो अभियान के लिए ठेकेदार अधिकारियों को मिल चुका है। अक्तूबर माह के अंत में अभियान शुरू किया जा सकता है। अधिकारियों की मानें तो शहर में बंदरों की तादाद करीब एक हजार है। पहले चरण में 500 बंदरों को पकड़वाने की योजना अधिकारियों ने तैयार कर रखी है। अक्तूबर माह के अंतिम सप्ताह में इसके टेंडर ओपन हो सकते हैं।
नगर परिषद शहरवासियों को बंदरों से निजात दिलाने की तैयारी में है। इसे सिरे चढ़ाने के लिए नगर परिषद के अधिकारियों ने टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इससे पहले नगर परिषद ने कई बार टेंडर लगाए थे लेकिन किसी भी ठेकेदार के आवेदन न करने से इस पर काम शुरू ही नहीं हो पाया। बीते डेढ़ साल की बात करें तो डीसी से लेकर एसडीएम, चेयरमैन, विधायकों तक यह मामला पहुंचा था। पिछले कुछ माह से ही बंदरों के काटने से डेढ़ दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। गांधी नगर निवासी एक बच्चे को तो बंदरों के काटने से 27 टांके आए थे। बंदर पकड़ने के लिए नगर परिषद करीब डेढ़ साल में आठ बार टेंडर लगा चुकी है लेकिन किसी भी एजेंसी द्वारा टेंडर न लेने के कारण यह मसला अधर में ही लटका है। अमर उजाला इस मुद्दे को समय -समय पर उठाता आ रहा है। शहर में इस समय शहरी और बाहरी क्षेत्र में बंदरों ने आतंक मचा रखा है। इस समय शहर के सभी वार्डों में बंदरों की भरमार है। इनकी संख्या लगातार बड़ती जा रही है। लंबे समय से बंदर पकड़ने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे।
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खंडहरों को बनाया ठिकाना, घरों में मचाते हैं उत्पात
बंदरों ने शहर में मौजूद खंडहरों को अपना ठिकाना बना रखा है। इतना ही नहीं बंदरों का झुंड घर में घुसकर उत्पात भी मचाता है। बंदरों के काटने की बढ़ती घटनाओं से इस समय महिलाओं और बच्चों में भय बना हुआ है। बंदरों की वजह से लोगों ने छतों पर जाना छोड़ दिया है। बंदर परिजनों की मौजूदगी में मकानों में घुसकर अंदर रखा सामान तक ले जाते हैं। इस टीम को प्रति बंदर के हिसाब से भुगतान किया जाएगा। अधिकारियों से 500 बंदर पकड़ने की अनुमति ही मिली है।
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बंदर पकड़ो अभियान का मामला परिषद की बैठक में भी उठा था। अलग -अलग पार्षदों ने अपने वार्डों में बंदरों के आतंक से नप कार्यकारिणी को रूबरू करवाया था। पार्षदों की समस्या के मद्देनजर बैठक में सर्व सहमति से एक तीन सदस्यीय टीम का गठन किया था। इस टीम की जिम्मेवारी अभियान शुरू कराने के लिए ठेकेदार की तलाश करने की थी। इसके अलावा नगर परिषद के अधिकारी एसडीएम ओमप्रकाश के संपर्क में भी थे। एसडीएम ने भी ठेकेदार की तलाश में नगर परिषद की मदद करने का आश्वासन बैठक में दिया था।
इन कॉलोनियाें और वार्डों में बंदरों का ज्यादा खौफ
वैसे तो शहर के साथ-साथ समीपवर्ती गांवों में बंदरों को आतंक है। शहर के करीब एक दर्जन वार्ड ऐसे हैं जहां हर समय बंदरों का झुंड घूमता नजर आता है। शहर के रेलवे रोड, गांधी नगर, प्रेम नगर, रविदास बस्ती, कबीर नगर, वार्ड नंबर-एक, वार्ड नंबर-सात, वार्ड नंबर-तीन, पुराना शहर, हीरा चौक, छोटी बाजारी, काठमंडी, सैनीपुरा, चरखी दरवाजा, एमसी कालोनी, वार्ड-19 और वार्ड-21 में बंदरों के आतंक से लोग काफी परेशान हैं।
10 से 15 शिकायतें पहुंच रही प्रतिदिन
बंदरों के आतंक से हर कोई परेशान है। आए दिन किसी न किसी घर में घुसकर बंदरों का झुंड घरेलू सामान तोड़ जाता है। इतना ही नहीं बच्चों और महिलाओं को कई दफा बंदरों द्वारा काटने के मामले भी सामने आ चुके हैं। बंदरों से निजात दिलाने की मांग काफी पुरानी है। प्रतिदिन 10 से 15 लोग यह शिकायत लेकर नप अधिकारियों के पास पहुंच चुके हैं लेकिन नप अब तक बंदरों से निजात दिलाने में सफल नहीं हो पाई है।
प्रति बंदर ज्यादा रेट मांगने पर बदलना पड़ा ठेकेदार
नप अधिकारियों ने अभियान शुरू करने में आ रही अड़चनों को लेकर स्पष्ट किया है कि करीब डेढ़ माह पहले एक यूपी का ठेकेदार हायर किया था। उसने प्रति बंदर रेट बहुत ज्यादा मांगें। नप सूत्रों ने बताया कि ठेकेदार प्रति बंदर करीब 750 रुपये मांग रहा था जबकि नप अधिकारी करीब 400 रुपये देने को ही तैयार थे। अब नप अधिकारी डीसी से अनुमति लेकर प्रति बंदर फिक्स रेट को बढ़वाने की तैयारी में भी हैं ताकि कई माह पुरानी मांग को सिरे चढ़ाया जा सके।
वर्जन
जल्द से जल्द शहरवासियों को बंदरों के आतंक से निजात दिला देंगे। हमने ठेकेदार बदलने के बाद दोबारा टेंडर लगा दिए हैं। इस बार उम्मीद है कि एजेंसी आवेदन कर दे अन्यथा डीसी साहब से अनुमति लेकर इस दिशा में कोई अन्य प्रभावी कदम उठाया जाएगा। दस दिन के अंदर हम अभियान शुरू करने की तैयारी में हैं। - संजय यादव, सचिव नगर परिषद