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कड़ी मेहनत और लगन से मिलता है लक्ष्य : लेफ्टिनेंट मनजीत
Updated Tue, 13 Jun 2017 12:59 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बादली।
दिल में कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो बड़े से बड़े मुकाम को भी आसानी से हासिल किया जा सकता है। ऐसा ही कर दिखाया है गुभाना गांव के मनजीत कुमार ने। मनजीत ने पहली ही मेहनत में सीडीएस की परीक्षा पास कर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट नियुक्त होकर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। लेफ्टिनेंट बनने के बाद मनजीत को जम्मू कश्मीर में सुरक्षा की जिम्मेवारी भी मिली है जो अब लेफ्टिनेंट के तौर पर देश की सुरक्षा में सहयोग करेंगे।
सीडीएस की परीक्षा पास करने के बाद मनजीत को देहरादून मे पासिंग आउट परेड में सैन्य अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया। आईएमए देहरादून में कड़ी परेड और कई दिनों तक चले साक्षात्कार में सफल होने पर मनजीत कुमार को लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्ति मिली है। बचपन में गांव के स्कूल में पढ़े मनजीत ने 12वीं कक्षा सैनिक स्कूल से पास की। बाद में दिल्ली कॉलेज से बीएससी उत्तीर्ण करने पर सीडीएस परीक्षा मेें पहली बार में ही सफलता हासिल की। देहरादून में परेड से लौटे मनजीत को ग्रामीणों ने सिर आंखों पर बैठा लिया। स्वागत के दौरान 22 वर्षीय लेफ्टिनेंट मनजीत कुमार ने परेड के दौरान मिले अनुभव के बारे में बताया कि हरियाणवीं कैडेड शारीरिक तौर पर मजबूत होते हैं, जिनसे मिलकर उन्हें गर्व महसूस हुआ और अच्छा अनुभव भी मिला है। स्वागत समारोह में पूर्व न्यायाधीश बलवान सिंह, चौगांव प्रधान शिवकुमार, कुलदीप आर्य, बारह प्रधान उमेद देशवाल, पूर्व जिला पार्षद अमित कुमार, एडवोकेट अमित माजरी, ब्लॉक समिति सदस्य रामबीर, शमशेर मास्टर, सतीश उर्फ सत्तू ठेकेदार रतिराम साहब, पवन मास्टर सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मौजूद हुए।
जम्मू कश्मीर में मिली पहली पोस्टिंग
लेफ्टिनेंट बनकर गांव में लौटे मनजीत ने बताया कि उनकी पहली पोस्टिंग जम्मू कश्मीर में मिली है। बिना किसी भय और डर के मनजीत ने बताया कि देश सेवा के लिए हर समय तैयार है और लेफ्टिनेंट के पद रहते हुए उन्हें देश के लिए जो भी करना होगा वह उससे बढ़कर करने का प्रयास करेंगे। वह पूरी तरह से देश के समर्पित हैं। उन्हें खुशी है कि उन्हें पहली ही पोस्टिंग ऐसी जगह मिली है जहां देश को सेना की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।
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दादा और पिता भी फौजी
लेफ्टिनेंट बने मनजीत कुमार के परिवार का भारतीय फौज से पुराना नाता रहा है। मनजीत कुमार की माने तो उन्हें भी अपने परिवार से ही भारतीय सेना में जाने का सपना देखा। उनके दादा मुक्तयार सिंह भारतीय सेना का अंग रहे थे तो पिता हरिओम भी सीमा सुरक्षा बल में तैनात हैं। अपने परिवार से ही प्रेरित मनजीत पूर्व जनरल दलबीर सिंह सुहाग को अपना आदर्श मानते हैं।
गांव में जश्न
सोमवार का दिन गांव में किसी सामूहिक त्योहार मनाने से कम नहीं रहा। ऐसा होना भी स्वाभाविक ही था, क्योंकि उनके गांव का युवा मनजीत कुमार गांव में डेढ़ साल बाद लेफ्टिनेंट बनकर आ रहा है। गांव के बुजुर्ग और युवा साथी सहित महिलाओं की टोली मनजीत के इंतजार में मंगल गीत गा रही थी। जैसे ही मनजीत कुमार ने गांव की जमीन पर कदम रखा तो सबसे पहले मंदिर में माथा टेककर खुली जीप में बैठाया गया। गर्मजोशी के साथ मनजीत का स्वागत फूलमालाओं के साथ किया गया।
- दादा और पिता से प्रेरित होकर सेना में जाने का देखा सपना
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बादली।
दिल में कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो बड़े से बड़े मुकाम को भी आसानी से हासिल किया जा सकता है। ऐसा ही कर दिखाया है गुभाना गांव के मनजीत कुमार ने। मनजीत ने पहली ही मेहनत में सीडीएस की परीक्षा पास कर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट नियुक्त होकर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। लेफ्टिनेंट बनने के बाद मनजीत को जम्मू कश्मीर में सुरक्षा की जिम्मेवारी भी मिली है जो अब लेफ्टिनेंट के तौर पर देश की सुरक्षा में सहयोग करेंगे।
सीडीएस की परीक्षा पास करने के बाद मनजीत को देहरादून मे पासिंग आउट परेड में सैन्य अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया। आईएमए देहरादून में कड़ी परेड और कई दिनों तक चले साक्षात्कार में सफल होने पर मनजीत कुमार को लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्ति मिली है। बचपन में गांव के स्कूल में पढ़े मनजीत ने 12वीं कक्षा सैनिक स्कूल से पास की। बाद में दिल्ली कॉलेज से बीएससी उत्तीर्ण करने पर सीडीएस परीक्षा मेें पहली बार में ही सफलता हासिल की। देहरादून में परेड से लौटे मनजीत को ग्रामीणों ने सिर आंखों पर बैठा लिया। स्वागत के दौरान 22 वर्षीय लेफ्टिनेंट मनजीत कुमार ने परेड के दौरान मिले अनुभव के बारे में बताया कि हरियाणवीं कैडेड शारीरिक तौर पर मजबूत होते हैं, जिनसे मिलकर उन्हें गर्व महसूस हुआ और अच्छा अनुभव भी मिला है। स्वागत समारोह में पूर्व न्यायाधीश बलवान सिंह, चौगांव प्रधान शिवकुमार, कुलदीप आर्य, बारह प्रधान उमेद देशवाल, पूर्व जिला पार्षद अमित कुमार, एडवोकेट अमित माजरी, ब्लॉक समिति सदस्य रामबीर, शमशेर मास्टर, सतीश उर्फ सत्तू ठेकेदार रतिराम साहब, पवन मास्टर सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मौजूद हुए।
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जम्मू कश्मीर में मिली पहली पोस्टिंग
लेफ्टिनेंट बनकर गांव में लौटे मनजीत ने बताया कि उनकी पहली पोस्टिंग जम्मू कश्मीर में मिली है। बिना किसी भय और डर के मनजीत ने बताया कि देश सेवा के लिए हर समय तैयार है और लेफ्टिनेंट के पद रहते हुए उन्हें देश के लिए जो भी करना होगा वह उससे बढ़कर करने का प्रयास करेंगे। वह पूरी तरह से देश के समर्पित हैं। उन्हें खुशी है कि उन्हें पहली ही पोस्टिंग ऐसी जगह मिली है जहां देश को सेना की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।
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दादा और पिता भी फौजी
लेफ्टिनेंट बने मनजीत कुमार के परिवार का भारतीय फौज से पुराना नाता रहा है। मनजीत कुमार की माने तो उन्हें भी अपने परिवार से ही भारतीय सेना में जाने का सपना देखा। उनके दादा मुक्तयार सिंह भारतीय सेना का अंग रहे थे तो पिता हरिओम भी सीमा सुरक्षा बल में तैनात हैं। अपने परिवार से ही प्रेरित मनजीत पूर्व जनरल दलबीर सिंह सुहाग को अपना आदर्श मानते हैं।
गांव में जश्न
सोमवार का दिन गांव में किसी सामूहिक त्योहार मनाने से कम नहीं रहा। ऐसा होना भी स्वाभाविक ही था, क्योंकि उनके गांव का युवा मनजीत कुमार गांव में डेढ़ साल बाद लेफ्टिनेंट बनकर आ रहा है। गांव के बुजुर्ग और युवा साथी सहित महिलाओं की टोली मनजीत के इंतजार में मंगल गीत गा रही थी। जैसे ही मनजीत कुमार ने गांव की जमीन पर कदम रखा तो सबसे पहले मंदिर में माथा टेककर खुली जीप में बैठाया गया। गर्मजोशी के साथ मनजीत का स्वागत फूलमालाओं के साथ किया गया।
- दादा और पिता से प्रेरित होकर सेना में जाने का देखा सपना