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क्लेम रिपोर्ट के अनुरूप नहीं मिल रही किसानों को फसल बीमा राशि, पनप रहा रोष
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बौंदकलां। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमित फसल का प्रीमियम जमा करने के बाद भी बीमा कंपनी किसानों को नुकसान का पूरा पैसा नहीं दे रही है। इससे किसानों को घाटा उठाना पड़ रहा है। किसानों में नुकसान की क्लेम रिपोर्ट के अनुरूप बीमा राशि नहीं मिलने से रोष है। कंपनी की कार्यशैली से नाराज किसानों ने जिला प्रशासन और सरकार से मामले पर संज्ञान लेने की मांग की है।
बौंदकलां क्षेत्र में गत सितंबर माह में तेज बारिश से धान, कपास व बाजरे की फसलों में जलभराव होने से फसलें बर्बाद हो गई थी। बीमा कंपनी व कृषि विभाग द्वारा अक्टूबर माह में बर्बाद फसलों के नुकसान व लागत का आंकलन कर क्लेम के लिए बीमा कंपनी को रिपोर्ट भेजी गई थी। अब किसानों के बैंक खातों में जो राशि पहुंच रही है। वह आंकलन रिपोर्ट के अनुरूप काफी कम है जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
फसल बीमा प्रीमियम राशि का नियम
धान - 73500 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर
कपास - 72000 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर
बाजरा - 36000 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर
(इस प्रकार इतना फसल प्रीमियम कंपनी में जमा होता है।)
केस नंबर एक - 52200 में से 24148 रुपये मिला मुआवजा
बौंदकलां निवासी किसान मूल सिंह ने बताया कि उसकी जलभराव से धान व कपास की फसलें खराब हो गई थी। उसकी धान की 0.8 हेक्टेयर बीमित फसल की आंकलन रिपोर्ट के अनुसार कुल क्लेम राशि 52200 रुपये बनती है लेकिन बैंक खाते में 24148 रुपये भेजे गए हैं। कपास की एक हेक्टेयर बीमित फसल की आंकलन रिपोर्ट में क्लेम राशि 48600 रुपये बनती है लेकिन बैंक खाते में 18929 रुपये की राशि पहुंची है।
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केस नंबर दो - 44800 में से खाते में पहुंचे महज 2117 रुपये
गांव मिर्च निवासी किसान उमेद सिंह ने बताया कि उसने खरीफ की फसल का बीमा करवाया था। जिसके तहत बाजरे की एक एकड़ फसल का 19800 रुपये क्लेम तैयार हुआ था। इसी प्रकार कपास की एक एकड़ फसल का 25 हजार रुपये क्लेम बना था। दोनों फसलों का क्लेम 44800 रुपये बनता है। लेकिन बैंक खाते में केवल 2117 रुपये की राशि ही पहुंची है।
इस बारे में बीमा कंपनी ही बता सकती है कि किसको आधार मानकर कम राशि भेजी गई है। एसडीओ ने कहा कि कृषि विभाग इस बारे में सीधी कोई कार्रवाई नहीं कर सकता है। यदि कोई किसान शिकायत करेगा तो उसकी शिकायत ई- मेल के माध्यम से कंपनी के पास भेज दी जाएगी। - डॉ. ईश्वर सिंह, एसडीओ कृषि विभाग
किसानों को नॉर्म्स के अनुसार ही भेजी गई राशि: को-आर्डिनेटर
इस बारे में यूनिवर्सल सेंपो जरनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के चरखी दादरी जिले के को-ऑर्डिनेटर प्रमोद कुमार का कहना है कि जिस तिथि को आंकलन हुआ था उस दिन तक फसल लागत और बीमित राशि के आधार पर ही मुआवजा दिया गया है।
बौंदकलां क्षेत्र में गत सितंबर माह में तेज बारिश से धान, कपास व बाजरे की फसलों में जलभराव होने से फसलें बर्बाद हो गई थी। बीमा कंपनी व कृषि विभाग द्वारा अक्टूबर माह में बर्बाद फसलों के नुकसान व लागत का आंकलन कर क्लेम के लिए बीमा कंपनी को रिपोर्ट भेजी गई थी। अब किसानों के बैंक खातों में जो राशि पहुंच रही है। वह आंकलन रिपोर्ट के अनुरूप काफी कम है जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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फसल बीमा प्रीमियम राशि का नियम
धान - 73500 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर
कपास - 72000 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर
बाजरा - 36000 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर
(इस प्रकार इतना फसल प्रीमियम कंपनी में जमा होता है।)
केस नंबर एक - 52200 में से 24148 रुपये मिला मुआवजा
बौंदकलां निवासी किसान मूल सिंह ने बताया कि उसकी जलभराव से धान व कपास की फसलें खराब हो गई थी। उसकी धान की 0.8 हेक्टेयर बीमित फसल की आंकलन रिपोर्ट के अनुसार कुल क्लेम राशि 52200 रुपये बनती है लेकिन बैंक खाते में 24148 रुपये भेजे गए हैं। कपास की एक हेक्टेयर बीमित फसल की आंकलन रिपोर्ट में क्लेम राशि 48600 रुपये बनती है लेकिन बैंक खाते में 18929 रुपये की राशि पहुंची है।
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केस नंबर दो - 44800 में से खाते में पहुंचे महज 2117 रुपये
गांव मिर्च निवासी किसान उमेद सिंह ने बताया कि उसने खरीफ की फसल का बीमा करवाया था। जिसके तहत बाजरे की एक एकड़ फसल का 19800 रुपये क्लेम तैयार हुआ था। इसी प्रकार कपास की एक एकड़ फसल का 25 हजार रुपये क्लेम बना था। दोनों फसलों का क्लेम 44800 रुपये बनता है। लेकिन बैंक खाते में केवल 2117 रुपये की राशि ही पहुंची है।
इस बारे में बीमा कंपनी ही बता सकती है कि किसको आधार मानकर कम राशि भेजी गई है। एसडीओ ने कहा कि कृषि विभाग इस बारे में सीधी कोई कार्रवाई नहीं कर सकता है। यदि कोई किसान शिकायत करेगा तो उसकी शिकायत ई- मेल के माध्यम से कंपनी के पास भेज दी जाएगी। - डॉ. ईश्वर सिंह, एसडीओ कृषि विभाग
किसानों को नॉर्म्स के अनुसार ही भेजी गई राशि: को-आर्डिनेटर
इस बारे में यूनिवर्सल सेंपो जरनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के चरखी दादरी जिले के को-ऑर्डिनेटर प्रमोद कुमार का कहना है कि जिस तिथि को आंकलन हुआ था उस दिन तक फसल लागत और बीमित राशि के आधार पर ही मुआवजा दिया गया है।