{"_id":"5a736aee4f1c1b8b268b7c83","slug":"101517513454-jhajjar-bahadurgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"परमात्मा में ध्यान लगाने से मन का मैलापन होगा दूर: उर्मिला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
परमात्मा में ध्यान लगाने से मन का मैलापन होगा दूर: उर्मिला
Updated Fri, 02 Feb 2018 01:00 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
परमात्मा में ध्यान लगाने से मन का मैलापन होगा दूर: उर्मिला
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
मन परमात्मा में लगाने से मैलापन दूर होगा तो वहीं आंतरिक शक्तियों का भी विकास होगा। इतना ही नहीं इनसे मन खुशियों से भरपूर हो जाएगा। यह उद्गार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की कादमा शाखा के तत्वावधान में झोझू कलां के बनियों वाले मंदिर में आयोजित ‘खुशी या तनाव, स्वयं करो चुनाव’ कार्यक्रम के दूसरे दिन राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी उर्मिला ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि पर चिंतन पतन की जड़ है जबकि आत्मचिंतन उन्नति की सीढ़ी। हमें स्वयं को परम शक्ति परमात्मा से जोड़ना होगा और उसके लिए हमें उनके समान गुण धारण करने होंगे तभी हमारा मानसिक विकास होगा।
ब्रह्माकुमारी उर्मिला ने कहा कि धन कमाने के साथ-साथ खुशी और आनंद कमाने का लक्ष्य रखें और उम्मीदें लगाने की बजाय ध्यान लगाएं तो परेशानियां अपने आप खत्म हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि मनुष्य को आत्मा के सुख, शांति, आनंद, प्रेम, ज्ञान, पवित्रता, शक्ति सात गुण प्रयोग करने चाहिए। उन्होंने अपने विचारों व भावनाओं को श्रेष्ठ बनाने के लिए प्रेरित किया। इस मौके पर सरपंच दलवीर गांधी ने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्था एक खुली किताब है यह जो पाठ पढ़ाते हैं उससे अवश्य ही जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आएंगे जिसका समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इस अवसर पर उमराव सिंह, बृजलाल, रामजीवन, श्यामलाल गर्ग, अशोक भारद्वाज, चंद्रभान आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
मन परमात्मा में लगाने से मैलापन दूर होगा तो वहीं आंतरिक शक्तियों का भी विकास होगा। इतना ही नहीं इनसे मन खुशियों से भरपूर हो जाएगा। यह उद्गार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की कादमा शाखा के तत्वावधान में झोझू कलां के बनियों वाले मंदिर में आयोजित ‘खुशी या तनाव, स्वयं करो चुनाव’ कार्यक्रम के दूसरे दिन राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी उर्मिला ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि पर चिंतन पतन की जड़ है जबकि आत्मचिंतन उन्नति की सीढ़ी। हमें स्वयं को परम शक्ति परमात्मा से जोड़ना होगा और उसके लिए हमें उनके समान गुण धारण करने होंगे तभी हमारा मानसिक विकास होगा।
ब्रह्माकुमारी उर्मिला ने कहा कि धन कमाने के साथ-साथ खुशी और आनंद कमाने का लक्ष्य रखें और उम्मीदें लगाने की बजाय ध्यान लगाएं तो परेशानियां अपने आप खत्म हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि मनुष्य को आत्मा के सुख, शांति, आनंद, प्रेम, ज्ञान, पवित्रता, शक्ति सात गुण प्रयोग करने चाहिए। उन्होंने अपने विचारों व भावनाओं को श्रेष्ठ बनाने के लिए प्रेरित किया। इस मौके पर सरपंच दलवीर गांधी ने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्था एक खुली किताब है यह जो पाठ पढ़ाते हैं उससे अवश्य ही जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आएंगे जिसका समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इस अवसर पर उमराव सिंह, बृजलाल, रामजीवन, श्यामलाल गर्ग, अशोक भारद्वाज, चंद्रभान आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन