फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Hisar News ›   Youth became self-reliant by taking training in milk products, cattle herders also got benefit

Hisar News: दूध उत्पाद का प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर हुए नौजवान, पशुपालकों को भी मिला फायदा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 27 Nov 2022 05:30 AM IST
विज्ञापन
Youth became self-reliant by taking training in milk products, cattle herders also got benefit
हिसार। करीब चार साल पहले दिल्ली में नौकरी कर रहे एक नौजवान ने हिसार वापस आकर रोजगार की संभावना तलाशी। इस युवक ने छह अन्य साहसी साथियों को लेकर लुवास में दूध से पनीर, दही, घी आदि बनाने का प्रशिक्षण लिया और फिर खुद की कंपनी खड़ी कर दी। करीब 200 पशुपालक भी इनसे जुड़ गए और कोरोना संकट के बाद इनकी छोटी सी कोशिश अब करीब दो करोड़ रुपये सालाना के टर्न ओवर तक पहुंच चुकी है। इनकी दही शहर में कई ब्रांडेड कंपनियों के उत्पाद को टक्कर दे रही है।
विज्ञापन

लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के जन संपर्क अधिकारी व पशु उत्पाद प्रौद्योगिकी विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अशोक मलिक बताते हैं कि विश्व विद्यालय में शिक्षा व चिकित्सा के अलावा रोजगार परक प्रशिक्षण का भी कार्यक्रम चलता है। इसी के तहत प्रशांत और उनकी टीम ने हमारे पशु उत्पाद प्रौद्योगिकी विभाग में दूध से पनीर, दही, घी आदि बनाने का प्रशिक्षण लिया। विभागाध्यक्ष डॉ. संजय यादव के निर्देशन में टीम को अपना उत्पाद स्वयं तैयार कर बिक्री योग्य बनाने तक का अनुभव मिला। इसके बाद प्रशांत की टीम ने शहर में अपना कारोबार शुरू कर दिया। बीते वित्तीय वर्ष में इस कंपनी ने एक करोड़, 82 लाख 56 हजार रुपये का कारोबार किया है।
विज्ञापन

अब 200 पशुपालकों से जुड़ा है नेटवर्क
इस टीम की अगुवाई करने वाले प्रशांत ने बताया कि प्रशिक्षण के बाद हमने पशुपालकों से सीधे दूध खरीदने के लिए संपर्क किया। पशुपालकों को दूध की गुणवत्ता के अनुसार प्रति लीटर पांच रुपये प्रीमियम दिया। अच्छी क्वालिटी का दूध मिलने पर उससे दही, पनीर व घी की गुणवत्ता भी बेहतर हुई। मिल गेट रोड पर हमने अपनी प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना की है। हमने पैकेट बंद दूध, दूध की बर्फी, घी आदि भी बनाए, लेकिन सबसे अधिक फायदा मिला दही से।
विज्ञापन
विज्ञापन

प्लास्टिक की जगह स्टील के डिब्बे में पैक कराई दही
बाजार में बिकने वाली दही आम तौर पर प्लास्टिक के डिब्बे में आती है, लेकिन इस टीम ने प्लास्टिक से होने वाले नुकसान को देखते हुए दही को स्टील के डिब्बों में पैक कराया। इसके बाद मार्केटिंग टीम ने बाजार के बड़े दुकानदारों से लेकर रेहड़ी पर दही भल्ला बेचने वालों तक से संपर्क किया और उन्हें डिब्बा बंद माल सप्लाई किया। अगले दिन स्टील के डिब्बे वापस लेकर सफाई के बाद दोबारा उसमें दही पैक करते हैं। इससे प्लास्टिक पर होने वाला खर्च भी बचा और गुणवत्ता भी अच्छी हुई। इससे इनके उत्पाद की कीमत भी बाजार से पांच रुपये कम हुई।
नाबार्ड से मिले ऋण से आसान हुई राह
प्रशांत बताते हैं कि हमें रोजगार के लिए नाबार्ड की तरफ से आर्थिक सहयोग मिल गया। काम अच्छा चला तो हमारी कंपनी के सुझाव पर नाबार्ड ने 22 पशुपालकों को भी ऋण उपलब्ध कराया। इससे उन पशुपालकों ने कई और दुधारू पशु खरीदकर अपना कारोबार बढ़ाया।

‘लुवास युवाओं को रोजगार परक प्रशिक्षण देता है। नौजवान दूध से बने उत्पाद की पैकेजिंग सीखकर खुद के अलावा दूसरों को भी रोजगार दे सकते हैं। दूध की सीधी खरीद होने से पशुपालकों को भी फायदा मिलेगा। इस प्रशिक्षण के लिए नौजवान किसी भी कार्य दिवस में विश्वविद्यालय में आकर संपर्क कर सकते हैं।’
डॉ. अशोक मलिक, वरिष्ठ वैज्ञानिक, पशु उत्पाद प्रौद्योगिकी विभाग लुवास
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed