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कुश्ती खिलाड़ी को बंदरों ने काटा, 12 खिलाड़ियों को पहले काट चुके
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जिला खेल स्टेडियम में बंदर के काटने से घायल खिलाड़ी।
- फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद। जिला खेल स्टेडियम से लेकर शहर की रिहायशी कॉलोनियों में बंदरों का आतंक जारी है। खेल विभाग और वन्य जीव विभाग के अधिकारियों की खींचतान में बंदर नहीं पकड़े जा रहे हैं। मंगलवार सुबह जिला खेल स्टेडियम में कुश्ती की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए अभ्यास कर रही खिलाड़ी जयदीक्षा को बंदरों ने बुरी तरह से काट लिया। बंदरों ने पैर के अंदर काफी हिस्से तक घायल कर दिया। मौके पर मौजूद खिलाड़ियों ने बंदरों के चंगुल से खिलाड़ी को बचाया और अस्पताल पहुंचाया। स्टेडियम में अब तक करीब 12 खिलाड़ियों को बंदर काट चुके हैं।
जिला खेल स्टेडियम के अधिकारियों व खिलाड़ियों का कहना है कि वन्य जीव विभाग से लेकर प्रशासन के उच्च अधिकारियों तक को शिकायत दे चुके हैं, लेकिन समाधान नहीं हुआ है। वन्य जीव विभाग बंदरों को पकड़वाने के लिए व्यवस्था करने को तैयार नहीं है। वहीं, मंगलवार को जिला कुश्ती संघ के सदस्य रामनिवास नैन, प्रदीप पोटलिया, कृष्ण कुमार लघु सचिवालय में उपायुक्त महावीर कौशिक से मिले और शिकायत रखी। उपायुक्त ने अब नगर परिषद अधिकारियों को बंदर पकड़ने की व्यवस्था करने के आदेश दिए हैं।
बेटी का करिअर खत्म हो गया
प्रहलाद सहारण का कहना है कि उसकी बेटी हिसार में 26 को होने वाली राज्य स्तरीय प्रतियोगिता की तैयारी कर रही थी। सुबह बंदरों ने हमला बोल दिया और काट लिया। यहां तक की हड्डी को भी जख्मी कर दिया। बेटी का करिअर खत्म हो गया। बंदरों को लेकर कई बार डीएसओ को शिकायत कर चुके है लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ है।
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शहर में 250 से ज्यादा बंदर, नहीं लिया टेंडर
शहर के बाजारों से लेकर कॉलोनियों में भी बंदरों की समस्या बढ़ गई है। करीब 250 से ज्यादा बंदर रिहायशी क्षेत्र में घूम रहे हैं। शहर में रोजाना दो से तीन लोग बंदरों का शिकार हो रहे हैं। नगर परिषद की हाउस की बैठक में पार्षदों ने बंदरों को पकड़ने का मुद्दा उठाया था। नप प्रशासन बंदरों को पकड़ने के लिए दो बार टेंडर भी लगा चुका है, लेकिन कोई भी एजेंसी टेंडर लेने को तैयार नहीं है। शहर के नहर कॉलोनी, सन्यास आश्रम रोड, मॉडल टाउन, लाजपत नगर, जगजीवनपुरा, एमसी कॉलोनी चार मरला कॉलोनी क्षेत्र में सबसे ज्यादा बंदर है।
यूं है विभागों में खींचतान
जिला खेल विभाग बार-बार वन्य जीव प्राणी विभाग को पत्र लिख रहा है कि बंदरों को पकड़ने की उनकी जिम्मेदारी है वह पकड़वाएं। लेकिन वन्य जीव प्राणी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वह तो सिर्फ अनुमति दे सकते है, बंदरों को पकड़ने का खर्च संबंधित विभाग को ही उठाना होगा।
मैं आज मुख्यालय में आया हूं, मेरे पास सूचना आई है कि एक खिलाड़ी को बंदर ने काट लिया। विभाग की ओर से कई बार वन्य जीव प्राणी विभाग को लिखा जा चुका है। उपायुक्त के सामने भी मामला रखा गया था। लेकिन समाधान नहीं हुआ।
- जगजीत सिंह मलिक, जिला खेल अधिकारी
बंदरों को पकड़ने के पैसे कौन वहन करेगा : नेहरा
मेरे पास पांच से छह जिलों का चार्ज है। जिला खेल स्टेडियम में बंदरों की समस्या को लेकर उपायुक्त ने मुझे बुलाया था। मैंने बंदरों को पकड़ने के लिए अनुमति लेने के लिए पत्र मुख्यालय को भेज दिया है। लेकिन समस्या ये है कि बंदरों को पकड़ने के लिए खर्च कौन वहन करेगा।
- जयविंद्र नेहरा, वन्य जीव प्राणी विभाग
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जिला खेल स्टेडियम के अधिकारियों व खिलाड़ियों का कहना है कि वन्य जीव विभाग से लेकर प्रशासन के उच्च अधिकारियों तक को शिकायत दे चुके हैं, लेकिन समाधान नहीं हुआ है। वन्य जीव विभाग बंदरों को पकड़वाने के लिए व्यवस्था करने को तैयार नहीं है। वहीं, मंगलवार को जिला कुश्ती संघ के सदस्य रामनिवास नैन, प्रदीप पोटलिया, कृष्ण कुमार लघु सचिवालय में उपायुक्त महावीर कौशिक से मिले और शिकायत रखी। उपायुक्त ने अब नगर परिषद अधिकारियों को बंदर पकड़ने की व्यवस्था करने के आदेश दिए हैं।
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बेटी का करिअर खत्म हो गया
प्रहलाद सहारण का कहना है कि उसकी बेटी हिसार में 26 को होने वाली राज्य स्तरीय प्रतियोगिता की तैयारी कर रही थी। सुबह बंदरों ने हमला बोल दिया और काट लिया। यहां तक की हड्डी को भी जख्मी कर दिया। बेटी का करिअर खत्म हो गया। बंदरों को लेकर कई बार डीएसओ को शिकायत कर चुके है लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ है।
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शहर में 250 से ज्यादा बंदर, नहीं लिया टेंडर
शहर के बाजारों से लेकर कॉलोनियों में भी बंदरों की समस्या बढ़ गई है। करीब 250 से ज्यादा बंदर रिहायशी क्षेत्र में घूम रहे हैं। शहर में रोजाना दो से तीन लोग बंदरों का शिकार हो रहे हैं। नगर परिषद की हाउस की बैठक में पार्षदों ने बंदरों को पकड़ने का मुद्दा उठाया था। नप प्रशासन बंदरों को पकड़ने के लिए दो बार टेंडर भी लगा चुका है, लेकिन कोई भी एजेंसी टेंडर लेने को तैयार नहीं है। शहर के नहर कॉलोनी, सन्यास आश्रम रोड, मॉडल टाउन, लाजपत नगर, जगजीवनपुरा, एमसी कॉलोनी चार मरला कॉलोनी क्षेत्र में सबसे ज्यादा बंदर है।
यूं है विभागों में खींचतान
जिला खेल विभाग बार-बार वन्य जीव प्राणी विभाग को पत्र लिख रहा है कि बंदरों को पकड़ने की उनकी जिम्मेदारी है वह पकड़वाएं। लेकिन वन्य जीव प्राणी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वह तो सिर्फ अनुमति दे सकते है, बंदरों को पकड़ने का खर्च संबंधित विभाग को ही उठाना होगा।
मैं आज मुख्यालय में आया हूं, मेरे पास सूचना आई है कि एक खिलाड़ी को बंदर ने काट लिया। विभाग की ओर से कई बार वन्य जीव प्राणी विभाग को लिखा जा चुका है। उपायुक्त के सामने भी मामला रखा गया था। लेकिन समाधान नहीं हुआ।
- जगजीत सिंह मलिक, जिला खेल अधिकारी
बंदरों को पकड़ने के पैसे कौन वहन करेगा : नेहरा
मेरे पास पांच से छह जिलों का चार्ज है। जिला खेल स्टेडियम में बंदरों की समस्या को लेकर उपायुक्त ने मुझे बुलाया था। मैंने बंदरों को पकड़ने के लिए अनुमति लेने के लिए पत्र मुख्यालय को भेज दिया है। लेकिन समस्या ये है कि बंदरों को पकड़ने के लिए खर्च कौन वहन करेगा।
- जयविंद्र नेहरा, वन्य जीव प्राणी विभाग