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Hisar News: लेबर कॉपी पर रोक के विरोध में मजदूराें ने घेरा लघु सचिवालय गेट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 27 Aug 2025 12:48 AM IST
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Workers surrounded the Mini Secretariat gate in protest against the ban on labor copy
लघु सचिवालय के गेट पर प्रदर्शन करते भवन निर्माण कामगार यूनियन के सदस्य।
हिसार। भवन निर्माण कामगार यूनियन हरियाणा सीटू जिला कमेटी के बैनर तले सैकडों मजदूरों ने मंगलवार को लघु सचिवालय गेट का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध जताया।
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प्रदर्शनकारियों ने कहा कि प्रदेश के श्रम मंत्री ने पूरे हरियाणा में हजारों मजदूरों की लेबर काॅपी पर प्रतिबंध लगा दिया। इस कारण मजदूर किसी योजना का लाभ नहीं ले पा रहे। मजदूरों को उनकी मजदूरी से काटे गए पैसे से मिलने वाला लाभ लेने से ही रोक दिया गया है।
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जिला प्रधान वेदप्रकाश ने कहा कि करीब छह महीने पहले अधिकारियों ने श्रमिकों की लेबर कापी पर रोक लगा दी। जब श्रम मंत्री अनिल विज के घेराव का किया तो उन्होंने उन्हें रोक हटा दी। करीब 45 दिन बाद श्रम मंत्री ने पूरे प्रदेश में हजारों मजदूरों की लेबर कॉपी पर फिर से रोक लगा दी।
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राज्य के प्रधान मनोज कुमार सोनी ने कहा कि निर्माण मजदूर कल्याण बोर्ड के तहत लगभग 10 लाख के करीब मजदूर पंजीकृत है। इनमें 6 लाख मजदूर ऑफलाइन, 4 लाख के ऑनलाइन पंजीकृत हुए हैं। सभी निर्माण मजदूरों का पंजीकरण अस्थाई तौर पर ब्लाॅक कर दिए गए हैं। पिछले छह महीने से मजदूर इन योजनाओं से वंचित है। यह पैसा सरकार ने नहीं दिया है। इस मौके पर कश्मीर सिंह, सुरेश कुमार, राजू बरवाला, श्रवण आदमपुर, महेंद्र हांसी आदि मौजूद रहे।

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मजदूरों की मांग

बंद की गई साइट को खोला जाए व मजदूरों को लाभ प्रदान किए जाएं।

बोर्ड में कर्मचारी व अधिकारी भर्ती करके बोर्ड का स्वतंत्र ढांचा खड़ा किया जाए।

90 दिन की वेरिफिकेशन का अधिकार यूनियनों को दिया जाए।

फर्जीवाड़ा करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए।

बेमानी आपत्ति लगाकर रद्द किए लाभ के फार्म बहाल करके मजदूरों को लाभ दिया जाए।

फैमिली आईडी के नाम पर मजदूरों को प्रताड़ित करना बंद किया जाए।

शिविर लगाकर प्रवासी मजदूरों सहित सभी मजदूरों का पंजीकरण किया जाए।

जिलास्तर पर वेरिफिकेशन के लिए यूनियनों के प्रतिनिधि शामिल किए जाएं।

न्यूनतम वेतन 26 हजार मासिक किया जाए।

श्रम कल्याण बोर्ड में जांच कमेटी में यूनियन का प्रतिनिधि शामिल किया जाए।

मजदूरों की दिहाड़ी मारने वाले मालिकों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

मनरेगा मजदूरों को 200 दिन काम व 600 रुपये दिहाड़ी दी जाए। मनरेगा के काम को तुरंत प्रभाव से चालू किया जाए।
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