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नेशनल में जीता स्वर्ण, नौकरी नहीं लगी तो बेटियों को खिलाड़ी बनाने में जुटी स्नेहलता

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 11 Mar 2022 12:31 AM IST
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Won gold in national, if job is not found, Snehlata engaged in making daughters players
मंगाली में बेटियों को फुटबाल का प्रशिक्षण देती स्नेहलता। संवाद - फोटो : Hisar
अश्वनी कुमार
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हिसार। हर खिलाड़ी का सपना होता है कि वह पदक जीतने के साथ खेल के दम पर नौकरी भी लगे। गांव मंगाली की नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट स्नेहलता सिले ने भी कई बार सरकारी नौकरी के लिए फॉर्म भरे, लेकिन जब उसकी नौकरी नहीं लगी तो वह गांव की ही बेटियों को खिलाड़ी बनाने में जुट गई।
स्नेहलता बताती है कि जब तक उसकी सरकारी नौकरी नहीं लगेगी, जब तक वह गांव में ही बेटियों को प्रशिक्षण देती रहेगी। स्नेहलता ने वर्ष 2014-15 में स्कूली नेशनल फुटबाल प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक जीता था। वर्ष 2016-17 में स्नेहलता ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में रजत पदक जीत चुकी हैं। संवाद
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जिस मैदान में खुद किक मारकर बनी नेशनल खिलाड़ी, उसी में बेटियों को दे रही प्रशिक्षण
स्नेहलता ने जिस मैदान में खुद फुटबाल को किक मारकर नेशनल स्तर पर पदक जीता था, आज उसी मैदान में बेटियों को फुटबाल का प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया है। आज मंगाली के गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 100 से ज्यादा बेटियां फुटबाल का प्रशिक्षण ले रही हैं। स्नेहलता सुबह- शाम मंगाली में बेटियों को निशुल्क अभ्यास करवा रही हैं।
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चाचा की बेटी को देख स्नेहलता ने शुरू किया था खेलना
स्नेहलता बताती है कि शुरू में उनके चाचा की लड़की सिलोचना ने प्रशिक्षण लेना शुरू किया था। उस समय वह उसके साथ मैदान में जाती थी। देखते-देखते स्नेहलता की भी खेल के प्रति रुचि बढ़ती चली गई और फुटबाल में ही कॅरिअर बनाने की ठान ली। वर्ष 2009 में स्नेहलता ने भी फुटबाल का प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया। वर्ष 2019 तक मैदान में स्नेहलता में अभ्यास किया था।

माता-पिता का रहा पूरा सहयोग
स्नेहलता ने बताया कि यहां तक पहुंचने में उनकी माता कमला देवी और पिता तेलूराम का काफी सहयोग रहा। वे हमेशा ही उसे खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहे। जब बेटियों को प्रशिक्षण देना शुरू किया तो बोले कि बेटी आप बहुत अच्छा कर रही हो। इसी तरह ही आगे बढ़ते रहो। स्नेहलता बताती है कि जब तक उसकी सरकारी नौकरी नहीं लगती हैं तब तक बेटियों को प्रशिक्षण देना जारी रहेगा। वह काफी समय से मंगाली के स्कूल में अभ्यास करवा रही हैं।
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