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Hisar News: जुगलान में पेयजल संकट पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
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घिराय के पास गांव जुगलान में पेयजल की मांग करते ग्रामीण।
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घिराय। गांव जुगलान में पेयजल संकट को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पिछले 10 दिनों से पर्याप्त पानी की आपूर्ति नहीं हो रही, जिससे लोगों को रोजमर्रा के कामकाज में परेशानी उठानी पड़ रही है। समस्या के विरोध में महिलाएं जलघर पहुंचीं और विभाग के खिलाफ नाराजगी जताई।
विरोध में शामिल महिलाओं शंकुतला, सरबती, संतोष, सुमन और कमलेश ने बताया कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसी बीच जलघर का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें महिलाएं कर्मचारियों से पानी छोड़ने को लेकर सवाल करती नजर आ रही हैं। वीडियो में एक व्यक्ति यह कहते सुनाई देता है, ताई, पानी तो इकट्ठा होगा तब ही छोड़ेंगे। वहीं एक युवक कहता है, गाम आले तो आए कोणी, थाम आगी सौभाग्य है।
ग्रामीण संदीप मुआल ने बताया कि इस संबंध में विभाग और कनिष्ठ अभियंता (जेई) को शिकायत भी दी जा चुकी है। उनका आरोप है कि रिकॉर्ड में पानी की व्यवस्था पर्याप्त दिखाई जा रही है, जबकि जमीनी स्थिति अलग है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीण आपस में चंदा जुटाकर जलघर में नया नलकूप लगवाने पर विचार करेंगे।
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युवा खुद जुटे काम में
जलघर में कुछ युवा भी विभाग की कार्यप्रणाली से नाराज दिखे और स्वयं व्यवस्था सुधारने में जुट गए। उधर, कनिष्ठ अभियंता साकेत ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि महिलाएं अपने क्षेत्र में पहले पानी की आपूर्ति शुरू करवाने की मांग लेकर आई थीं। उन्होंने बताया कि गांव में विभाग के दो नलकूप हैं, जिनमें से एक ग्रामीणों के कहने पर ही बंद किया गया था। ग्रामीणों और विभाग के दावों में अंतर होने के कारण अब मामले की जांच और स्थायी समाधान की मांग उठ रही है।
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विरोध में शामिल महिलाओं शंकुतला, सरबती, संतोष, सुमन और कमलेश ने बताया कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसी बीच जलघर का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें महिलाएं कर्मचारियों से पानी छोड़ने को लेकर सवाल करती नजर आ रही हैं। वीडियो में एक व्यक्ति यह कहते सुनाई देता है, ताई, पानी तो इकट्ठा होगा तब ही छोड़ेंगे। वहीं एक युवक कहता है, गाम आले तो आए कोणी, थाम आगी सौभाग्य है।
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ग्रामीण संदीप मुआल ने बताया कि इस संबंध में विभाग और कनिष्ठ अभियंता (जेई) को शिकायत भी दी जा चुकी है। उनका आरोप है कि रिकॉर्ड में पानी की व्यवस्था पर्याप्त दिखाई जा रही है, जबकि जमीनी स्थिति अलग है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीण आपस में चंदा जुटाकर जलघर में नया नलकूप लगवाने पर विचार करेंगे।
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युवा खुद जुटे काम में
जलघर में कुछ युवा भी विभाग की कार्यप्रणाली से नाराज दिखे और स्वयं व्यवस्था सुधारने में जुट गए। उधर, कनिष्ठ अभियंता साकेत ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि महिलाएं अपने क्षेत्र में पहले पानी की आपूर्ति शुरू करवाने की मांग लेकर आई थीं। उन्होंने बताया कि गांव में विभाग के दो नलकूप हैं, जिनमें से एक ग्रामीणों के कहने पर ही बंद किया गया था। ग्रामीणों और विभाग के दावों में अंतर होने के कारण अब मामले की जांच और स्थायी समाधान की मांग उठ रही है।