{"_id":"57c723e24f1c1b657c2cb01b","slug":"university-of-america-send-19-lac-rupees-report-not-found-after-one-and-half-year-hisar","type":"story","status":"publish","title_hn":"अमेरिकी विवि को 19 लाख रुपये दिए, डेढ़ वर्ष बाद भी नहीं आई रिपोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अमेरिकी विवि को 19 लाख रुपये दिए, डेढ़ वर्ष बाद भी नहीं आई रिपोर्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
Updated Thu, 01 Sep 2016 12:07 AM IST
विज्ञापन
गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी
- फोटो : Bureau
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जीजेयू में एक एसोसिएट रिसर्चर द्वारा प्रोफेसर पर पैसे मांगने के आरोप के बाद मामले में दो नए खुलासे हुए हैं। प्रोफेसर द्वारा डीबीटी का पैसा अमेरिका के विश्वविद्यालय को देने के लिए निर्धारित प्रक्रिया अपनाई ही नहीं गई। यहीं नहीं सूत्र बताते हैं कि प्रोफेसर ने यह पैसा अमेरिका की वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत किसी भारतीय को भेजे हैं।
विज्ञापन
दूसरा यह कि एक साथ शत प्रतिशत पेमेंट किसी कंपनी या अन्य को प्रोजेक्ट के लिए नहीं भेजी जा सकती। इसे इंस्टॉलमेंट में भेजना होता है। डीबीटी का भी यह नियम है। इस नियम का भी उल्लंघन किया गया। तीसरा सवाल अगर सब कुछ सही किया गया था तो अब तक वहां से रिपोर्ट क्यों नहीं आई।
विज्ञापन
न शिकायत दी, न कमेटी बनी
बायो नैनो टेक्नोलॉजी विभाग की एक रिसर्च एसोसिएट द्वारा एक प्रोफेसर पर रुपये मांगने के आरोप के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक कमेटी गठित कर दी थी, लेकिन प्रोफेसर द्वारा अमेरिका के विश्वविद्यालय को 19 लाख रुपये देने के बावजूद कोई रिपोर्ट एनालाइज होकर नहीं आई। इसको लेकर न तो किसी ने शिकायत दी और न कोई कमेटी बनाई गई और न ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने संज्ञान लिया। विश्वविद्यालय में लोगों के बीच यह सवाल लगातार बना रहा कि अमेरिका की कंपनी जिस प्रोजेक्ट का पैसा दिया, उसकी रिपोर्ट क्यों नहीं आई।
विज्ञापन
टेंडर निकाला, न बोली लगाई
अमर उजाला ने चार दिन तक लगातार मामले की पड़ताल की तो कुछ और ही सामने आया। पहला रुपये निर्धारित प्रक्रिया के तहत नहीं दिए, न कोई टेंडर निकला और न ही कोई बोली लगी। फरवरी 2015 में प्रोफेसर ने पूर्व कुलपति की अनुमति से ये रुपये सीधे ही उक्त विश्वविद्यालय को दे दिए गए थे।
अब बड़ी बात यह है कि पैसे जिस वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी को दिए गए। उसने डेढ़ साल से कोई रिपोर्ट क्यों नहीं भेजी। दूसरी तरफ सूत्र बताते हैं कि प्रोफेसर का बेटा अमेरिका का स्थायी निवासी है। प्रोफेसर भी अमेरिका आता-जाता रहता है। यही नहीं अमेरिका की जिस यूनिवर्सिटी को पैसा भेजा गया, उसमें एक भारतीय एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत है, जो उक्त प्रोफेसर का मित्र है।
यह था मामला
जीजेयू के बायो नैनो टेक्नोलॉजी विभाग में एक प्रोजेक्ट के तहत रिसर्च कर रही रिसर्चर ने प्रोजेक्ट इंचार्ज पर 75 हजार रुपये मांगने का आरोप लगाते हुए पुलिस को शिकायत दी थी, जिसके बाद पूूरे विश्वविद्यालय में हड़कंप मच गया था। इससे पहले रुपये मांगने की शिकायत वीसी को भी दी गई थी। वीसी के संज्ञान में मामला आने के बाद प्रोफेसर ने छात्रा को गैर हाजिर रहने और रिसर्च वर्क ठीक से न करने का हवाला देकर उन्हें टर्मिनेट करने के लिए कुलपति को पत्र लिख दिया।
इसके बाद रिसर्चर को टर्मिनेट कर दिया गया था। इससे खफा रिसर्चर ने वीरवार को पुलिस में शिकायत दे दी थी। बाद में रिसर्च एसोसिएट ने बताया था कि उक्त प्रोफेसर ने एक नहीं तीन छात्रों से 1.60 लाख रुपये मांगे थे। बाद में दबाव में आए प्रशासन ने रिसर्चर का टर्मिनेशन वापस ले लिया। वहीं मामले को लेकर कमेटी बना दी गई थी। जो अगले तीन दिन बाद रिपोर्ट देगी।