फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Hisar News ›   Three daughters and one son of Hisar will get Bhim Award

हिसार की तीन बेटियों और एक बेटे को मिलेगा भीम अवॉर्ड

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 16 Feb 2022 12:24 AM IST
विज्ञापन
Three daughters and one son of Hisar will get Bhim Award
हिसार। टोक्यों ओलंपिक में देश को स्वर्ण पदक दिलाने वाले नीरज चोपड़ा समेत 41 खिलाड़ियों को हरियाणा सरकार भीम अवॉर्ड देकर सम्मानित करेगी।
विज्ञापन

खेल विभाग ने चार साल में आए आवेदनों के आधार पर भीम अवॉर्ड के लिए हिसार के चार खिलाड़ियों का चयन किया है। इनमें हॉकी खिलाड़ी पूनम रानी ख्यालिया, पैरा एथलीट एकता भ्याण, पहलवान ललिता और बैडमिंटन खिलाड़ी तरुण ढिल्लों शामिल हैं। यह हरियाणा के लिए बहुत ही गौरव की बात है।
मुझे इस मुकाम तक पहुंचकर बहुत अच्छा लग रहा है। मैं भारतीय महिला हॉकी टीम में 10 साल से खेल रही हूं। मैं लगभग 200 मैच खेल चुकी हूं। मैंने अपना पूरा जीवन भारत और हॉकी को दे दिया है और मुझे ऐसा करने में बहुत खुशी हो रही है। 2009 में जूनियर विश्व कप में टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ स्कोरर रहीं। 8 बार राष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीत कर देश का नाम रोशन किया है। मैं अंडर 19 और अंडर 21 भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान रह चुकी हूं। यह सम्मान गर्व की बात है। - पूनम रानी ख्यालिया, हॉकी खिलाड़ी
विज्ञापन

मुझे बहुत ही गर्व महसूस हो रहा है। भीम अवॉर्ड मिलने की सूचना से मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है। मैं एशियाई पैरा खेलों में स्वर्ण पदक देश के नाम कर चुकी हूं। टोक्यो पैरा-ऑलिंपियन में हिस्सा लेने के अलावा चार अंतरराष्ट्रीय और 8 राष्ट्रीय पदक, भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल कर चुकी हूं। आगे भी कोशिश रहेगी कि देश का नाम ऐसे ही रोशन करती रहूं। - एकता भ्याण, पैरा एथलीट
विज्ञापन
विज्ञापन

मुझे अच्छा लगा रहा है कि मेरा नाम भीम अवॉर्ड के लिए चिह्नित हुआ है। मेरे लिए इस से ज्यादा खुशी की बात और क्या हो सकती है। मैंने 2014 में कॉमनवेल्थ गेम में सिल्वर मेडल जीता। 2015 में एश्यिन चैंपियनशिप में कांस्य पदक, 2016 कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीत कर देश के नाम रोशन किया। - ललिता, कुश्ती खिलाड़ी

सातरोड़ कलां निवासी तरुण ढिल्लो ने पिछले वर्ष पैरालंपिक में देश का प्रतिनिधित्व किया था। तरुण को खेलने की प्रेरणा अपने पिता स्वर्गीय सतीश कुमार से मिली थी। उसके पिता क्रिकेट खेलते थे। हालांकि पहले तरुण ने फुटबाल खेलना शुरू किया था। मगर फुटबाल खेलने के दौरान उसके पैर में चोट लग गई। संक्रमण बढ़ने पर उसके पैर के दो ऑपरेशन हुए। इन ऑपरेशन के बावजूद उसका पैर ठीक नहीं हो सका। एक पैर से दिव्यांग होने के बाद फुटबाल छोड़कर रैकेट थामा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed