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हिसार की तीन बेटियों और एक बेटे को मिलेगा भीम अवॉर्ड
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हिसार। टोक्यों ओलंपिक में देश को स्वर्ण पदक दिलाने वाले नीरज चोपड़ा समेत 41 खिलाड़ियों को हरियाणा सरकार भीम अवॉर्ड देकर सम्मानित करेगी।
खेल विभाग ने चार साल में आए आवेदनों के आधार पर भीम अवॉर्ड के लिए हिसार के चार खिलाड़ियों का चयन किया है। इनमें हॉकी खिलाड़ी पूनम रानी ख्यालिया, पैरा एथलीट एकता भ्याण, पहलवान ललिता और बैडमिंटन खिलाड़ी तरुण ढिल्लों शामिल हैं। यह हरियाणा के लिए बहुत ही गौरव की बात है।
मुझे इस मुकाम तक पहुंचकर बहुत अच्छा लग रहा है। मैं भारतीय महिला हॉकी टीम में 10 साल से खेल रही हूं। मैं लगभग 200 मैच खेल चुकी हूं। मैंने अपना पूरा जीवन भारत और हॉकी को दे दिया है और मुझे ऐसा करने में बहुत खुशी हो रही है। 2009 में जूनियर विश्व कप में टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ स्कोरर रहीं। 8 बार राष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीत कर देश का नाम रोशन किया है। मैं अंडर 19 और अंडर 21 भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान रह चुकी हूं। यह सम्मान गर्व की बात है। - पूनम रानी ख्यालिया, हॉकी खिलाड़ी
मुझे बहुत ही गर्व महसूस हो रहा है। भीम अवॉर्ड मिलने की सूचना से मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है। मैं एशियाई पैरा खेलों में स्वर्ण पदक देश के नाम कर चुकी हूं। टोक्यो पैरा-ऑलिंपियन में हिस्सा लेने के अलावा चार अंतरराष्ट्रीय और 8 राष्ट्रीय पदक, भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल कर चुकी हूं। आगे भी कोशिश रहेगी कि देश का नाम ऐसे ही रोशन करती रहूं। - एकता भ्याण, पैरा एथलीट
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मुझे अच्छा लगा रहा है कि मेरा नाम भीम अवॉर्ड के लिए चिह्नित हुआ है। मेरे लिए इस से ज्यादा खुशी की बात और क्या हो सकती है। मैंने 2014 में कॉमनवेल्थ गेम में सिल्वर मेडल जीता। 2015 में एश्यिन चैंपियनशिप में कांस्य पदक, 2016 कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीत कर देश के नाम रोशन किया। - ललिता, कुश्ती खिलाड़ी
सातरोड़ कलां निवासी तरुण ढिल्लो ने पिछले वर्ष पैरालंपिक में देश का प्रतिनिधित्व किया था। तरुण को खेलने की प्रेरणा अपने पिता स्वर्गीय सतीश कुमार से मिली थी। उसके पिता क्रिकेट खेलते थे। हालांकि पहले तरुण ने फुटबाल खेलना शुरू किया था। मगर फुटबाल खेलने के दौरान उसके पैर में चोट लग गई। संक्रमण बढ़ने पर उसके पैर के दो ऑपरेशन हुए। इन ऑपरेशन के बावजूद उसका पैर ठीक नहीं हो सका। एक पैर से दिव्यांग होने के बाद फुटबाल छोड़कर रैकेट थामा।
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खेल विभाग ने चार साल में आए आवेदनों के आधार पर भीम अवॉर्ड के लिए हिसार के चार खिलाड़ियों का चयन किया है। इनमें हॉकी खिलाड़ी पूनम रानी ख्यालिया, पैरा एथलीट एकता भ्याण, पहलवान ललिता और बैडमिंटन खिलाड़ी तरुण ढिल्लों शामिल हैं। यह हरियाणा के लिए बहुत ही गौरव की बात है।
मुझे इस मुकाम तक पहुंचकर बहुत अच्छा लग रहा है। मैं भारतीय महिला हॉकी टीम में 10 साल से खेल रही हूं। मैं लगभग 200 मैच खेल चुकी हूं। मैंने अपना पूरा जीवन भारत और हॉकी को दे दिया है और मुझे ऐसा करने में बहुत खुशी हो रही है। 2009 में जूनियर विश्व कप में टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ स्कोरर रहीं। 8 बार राष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीत कर देश का नाम रोशन किया है। मैं अंडर 19 और अंडर 21 भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान रह चुकी हूं। यह सम्मान गर्व की बात है। - पूनम रानी ख्यालिया, हॉकी खिलाड़ी
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मुझे बहुत ही गर्व महसूस हो रहा है। भीम अवॉर्ड मिलने की सूचना से मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है। मैं एशियाई पैरा खेलों में स्वर्ण पदक देश के नाम कर चुकी हूं। टोक्यो पैरा-ऑलिंपियन में हिस्सा लेने के अलावा चार अंतरराष्ट्रीय और 8 राष्ट्रीय पदक, भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल कर चुकी हूं। आगे भी कोशिश रहेगी कि देश का नाम ऐसे ही रोशन करती रहूं। - एकता भ्याण, पैरा एथलीट
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मुझे अच्छा लगा रहा है कि मेरा नाम भीम अवॉर्ड के लिए चिह्नित हुआ है। मेरे लिए इस से ज्यादा खुशी की बात और क्या हो सकती है। मैंने 2014 में कॉमनवेल्थ गेम में सिल्वर मेडल जीता। 2015 में एश्यिन चैंपियनशिप में कांस्य पदक, 2016 कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीत कर देश के नाम रोशन किया। - ललिता, कुश्ती खिलाड़ी
सातरोड़ कलां निवासी तरुण ढिल्लो ने पिछले वर्ष पैरालंपिक में देश का प्रतिनिधित्व किया था। तरुण को खेलने की प्रेरणा अपने पिता स्वर्गीय सतीश कुमार से मिली थी। उसके पिता क्रिकेट खेलते थे। हालांकि पहले तरुण ने फुटबाल खेलना शुरू किया था। मगर फुटबाल खेलने के दौरान उसके पैर में चोट लग गई। संक्रमण बढ़ने पर उसके पैर के दो ऑपरेशन हुए। इन ऑपरेशन के बावजूद उसका पैर ठीक नहीं हो सका। एक पैर से दिव्यांग होने के बाद फुटबाल छोड़कर रैकेट थामा।