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Hisar News: प्राइवेट अस्पताल संचालक व कारपेंटर में पैसे के लेन को लेकर हुआ विवाद, पुलिस के आने के बाद सुलझा मामला
Tue, 12 Dec 2023 10:26 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Tue, 12 Dec 2023 10:26 PM IST
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अस्पताल के बाहर धरने पर बैठे कारपेंटर एसोसिएशन के सदस्य। संवाद
हांसी। निरंकारी भवन के पास स्थित पीएमसी अस्पताल में पैसे के लेन देन के मामले को लेकर कारपेंटरों ने हंगामा कर दिया। कारपेंटरों का आरोप था कि अस्पताल के डॉक्टर पंकज इलावादी ने उनकी मजदूरी के करीब 32 हजार रुपये गबन कर लिए हैं। वहीं डॉक्टर का आरोप था कि काम करने के दौरान ठेकेदार के मजदूरों ने वहां चोरी की व अस्पताल में उपचार भी कराया था। जिसके पैसे उन्होंने नहीं दिए। बाद में पुलिस के आने के बाद विवाद शांत हो गया।
पैसे के लेनदेने के मामले को लेकर कारपेंटर एसोसिएशन सुबह अस्पताल पहुंची व अस्पताल के बाहर धरने पर बैठ गई। अगुवाई कर रहे प्रधान सूबे सिंह व जगदीश वर्मा ने बताया कि उन्होंने पीएमसी अस्पताल में फर्नीचर फिटिंग सहित अन्य लकड़ी का कार्य किया था। जिसमें से उनके 32 हजार रुपये लेने रह गए थे। उनका आरोप है कि डॉक्टर ने यह रुपये देने से मना कर दिया। कारपेंटरों का कहना है कि डॉक्टर ने एक मजदूर के उपचार का करीब 16000 रुपये का बिल बना दिया। जबकि उनका कोई मजदूर न तो बीमार हुआ व न ही अस्पताल में दाखिल हुआ। पैसे न देने पर मामला इंटक व लेबर कोर्ट में पहुंचा। इस दौरान अस्पताल संचालक को दो नोटिस भी जारी किए, लेकिन उन्हें पैसे नहीं दिए गए।
वहीं अस्पताल के डॉक्टर पंकज इलावादी ने बताया कि अस्पताल में काम के दौरान मजदूरों ने उनके अस्पताल में गैस सिलिंडर की चोरी की है। काम के दौरान एक मजदूर की तबीयत बिगड़ी तो उसका उपचार किया। जो कि कई दिन तक अस्पताल में दाखिल रहा। उसके उपचार के पैसे नहीं दिए गए थे। उन्होंने ठेकेदार से करीब दो लाख रुपये का काम करवाया। उपचार के पैसे हिसाब में काटे तो ठेकेदार विवाद शुरू कर दिया। डॉक्टर ने बताया कि उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई। बाद में पुलिस वहां पहुंची। जिसके बाद दोनों पक्ष में समझौता हो गया।
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पैसे के लेनदेने के मामले को लेकर कारपेंटर एसोसिएशन सुबह अस्पताल पहुंची व अस्पताल के बाहर धरने पर बैठ गई। अगुवाई कर रहे प्रधान सूबे सिंह व जगदीश वर्मा ने बताया कि उन्होंने पीएमसी अस्पताल में फर्नीचर फिटिंग सहित अन्य लकड़ी का कार्य किया था। जिसमें से उनके 32 हजार रुपये लेने रह गए थे। उनका आरोप है कि डॉक्टर ने यह रुपये देने से मना कर दिया। कारपेंटरों का कहना है कि डॉक्टर ने एक मजदूर के उपचार का करीब 16000 रुपये का बिल बना दिया। जबकि उनका कोई मजदूर न तो बीमार हुआ व न ही अस्पताल में दाखिल हुआ। पैसे न देने पर मामला इंटक व लेबर कोर्ट में पहुंचा। इस दौरान अस्पताल संचालक को दो नोटिस भी जारी किए, लेकिन उन्हें पैसे नहीं दिए गए।
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वहीं अस्पताल के डॉक्टर पंकज इलावादी ने बताया कि अस्पताल में काम के दौरान मजदूरों ने उनके अस्पताल में गैस सिलिंडर की चोरी की है। काम के दौरान एक मजदूर की तबीयत बिगड़ी तो उसका उपचार किया। जो कि कई दिन तक अस्पताल में दाखिल रहा। उसके उपचार के पैसे नहीं दिए गए थे। उन्होंने ठेकेदार से करीब दो लाख रुपये का काम करवाया। उपचार के पैसे हिसाब में काटे तो ठेकेदार विवाद शुरू कर दिया। डॉक्टर ने बताया कि उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई। बाद में पुलिस वहां पहुंची। जिसके बाद दोनों पक्ष में समझौता हो गया।
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