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Hisar News: चाइल्ड लाइन रिकॉर्ड में दर्ज महाबीर नाम ने लिखी हेमराज की रिहाई की पटकथा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 08 Oct 2026 12:59 AM IST
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The name 'Mahabir', recorded in Childline records, paved the way for Hemraj's release.
हिसार। बरवाला क्षेत्र के गांव गैबीपुर में आठ साल पहले करीब तीन साल के बच्चे शिवा की हत्या के मामले में मौत की सजा पाए हेमराज की रिहाई में चाइल्ड लाइन के रिकॉर्ड में दर्ज महाबीर नाम अहम कड़ी बना। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को पर्याप्त नहीं मानते हुए हेमराज को बरी कर दिया।
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कोर्ट ने निचली अदालत का फैसला रद्द करते हुए उसकी दोषसिद्धि और सजा समाप्त कर दी तथा तत्काल रिहाई के आदेश दिए। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि जांच एजेंसी ने यह पता लगाने का प्रयास क्यों नहीं किया कि चाइल्ड लाइन के रिकॉर्ड में दर्ज महाबीर कौन था।
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ट्रायल कोर्ट ने 7 मार्च 2022 को हेमराज को हत्या के मामले में फांसी और साक्ष्य मिटाने की धारा 201 के तहत सात साल कैद की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए उसकी अपील मंजूर कर ली। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी को अपराध से उचित संदेह से परे जोड़ने वाला कानूनी रूप से स्वीकार्य साक्ष्य पेश नहीं कर सका।
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कोर्ट ने शव की पहचान को लेकर अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को निर्णायक नहीं माना। कहा कि डीएनए जांच से शव की पहचान की पुष्टि नहीं हो सकी। एफएसएल रिपोर्ट में हड्डी से डीएनए प्रोफाइल प्राप्त नहीं हो पाया और मां के रक्त नमूने से उसका मिलान भी नहीं किया जा सका। कपड़ों पर मानव रक्त मिला, लेकिन इससे मां-बच्चे के संबंध की पुष्टि नहीं होती। हाईकोर्ट ने कहा कि शव संभवत: शिवा का था, लेकिन यह बात उचित संदेह से परे निश्चित रूप से साबित नहीं हुई।

मां की गवाही भी अभियोजन के खिलाफ गई : बच्चे की मां सुमन ने मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 164 के बयान में हेमराज पर हत्या का आरोप लगाया था, लेकिन ट्रायल के दौरान उसने हेमराज को दोषी ठहराने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 164 का बयान अपने आप में ठोस मौखिक साक्ष्य नहीं है। ट्रायल में शपथ पर दी गई गवाही को नजरअंदाज कर केवल पहले के बयान पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
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