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Hisar News: 15 दिन में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार न होने पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने की चेतावनी
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घिराय/बरवाला। बरवाला के नागरिक अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं में कमी पर सद्भावना समिति सहित विभिन्न जनसंगठनों ने बुधवार को आवाज उठाई। किसान विश्राम गृह में रोहतास राजली, राजेश श्योंकद और बसाऊराम बरवाला की संयुक्त अध्यक्षता में बैठक हुई। सरदानन्द राजली ने संचालन किया।
इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने नायब तहसीलदार रविंद्र शर्मा को ज्ञापन सौंपकर स्वास्थ्य सेवाओं में तत्काल सुधार की मांग की। संगठनों ने 15 दिन में व्यवस्था में सुधार न होने पर अस्पताल के मुख्य गेट पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने की चेतावनी दी।
वक्ताओं ने कहा कि बरवाला सिविल अस्पताल आसपास के गांवों सहित बड़ी आबादी के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र है। चिकित्सकों, फार्मासिस्टों और एक्स-रे सहित अन्य जांच सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। सामान्य उपचार के लिए आने वाले मरीजों को भी कई बार हिसार, अग्रोहा या अन्य अस्पतालों में भेजा जाता है। इससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
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ज्ञापन में अस्पताल के सभी रिक्त स्वीकृत चिकित्सा अधिकारी और फार्मासिस्ट के पद तत्काल भरने, लंबे समय से बंद एक्स-रे मशीन को चालू कराने तथा प्रयोगशाला के लिए आवश्यक किट उपलब्ध करवाकर सभी जरूरी जांच शुरू कराने की मांग की गई। संगठनों ने कहा कि जिन बीमारियों का उपचार बरवाला सिविल अस्पताल में संभव है उनके मरीजों को अनावश्यक रूप से दूसरे अस्पतालों में न भेजा जाए। नए भवन का निर्माण पूरा होने तक अस्थायी भवन में भी सभी जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं निर्बाध जारी रहें। इस दौरान राजसिंह बौद्ध, सीताराम, मास्टर देशराज, प्रतीक बरवाला, राजेश सरसौद और ऋषिकेश राजली आदि मौजूद रहे।
15 साल से पशु चिकित्सक की नियुक्ति न होने का मुद्दा भी उठाया :
बैठक में ढाणी खान बहादुर के पशु अस्पताल का मुद्दा भी उठाया गया। ग्रामीणों ने बताया कि करीब 15 वर्ष से भवन बना हुआ है, लेकिन चिकित्सक की नियुक्ति नहीं हुई। इससे पशुपालकों को पशुओं के उपचार के लिए दूर जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने भी 15 दिन में समाधान नहीं होने पर अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी दी।
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इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने नायब तहसीलदार रविंद्र शर्मा को ज्ञापन सौंपकर स्वास्थ्य सेवाओं में तत्काल सुधार की मांग की। संगठनों ने 15 दिन में व्यवस्था में सुधार न होने पर अस्पताल के मुख्य गेट पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने की चेतावनी दी।
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वक्ताओं ने कहा कि बरवाला सिविल अस्पताल आसपास के गांवों सहित बड़ी आबादी के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र है। चिकित्सकों, फार्मासिस्टों और एक्स-रे सहित अन्य जांच सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। सामान्य उपचार के लिए आने वाले मरीजों को भी कई बार हिसार, अग्रोहा या अन्य अस्पतालों में भेजा जाता है। इससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
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ज्ञापन में अस्पताल के सभी रिक्त स्वीकृत चिकित्सा अधिकारी और फार्मासिस्ट के पद तत्काल भरने, लंबे समय से बंद एक्स-रे मशीन को चालू कराने तथा प्रयोगशाला के लिए आवश्यक किट उपलब्ध करवाकर सभी जरूरी जांच शुरू कराने की मांग की गई। संगठनों ने कहा कि जिन बीमारियों का उपचार बरवाला सिविल अस्पताल में संभव है उनके मरीजों को अनावश्यक रूप से दूसरे अस्पतालों में न भेजा जाए। नए भवन का निर्माण पूरा होने तक अस्थायी भवन में भी सभी जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं निर्बाध जारी रहें। इस दौरान राजसिंह बौद्ध, सीताराम, मास्टर देशराज, प्रतीक बरवाला, राजेश सरसौद और ऋषिकेश राजली आदि मौजूद रहे।
15 साल से पशु चिकित्सक की नियुक्ति न होने का मुद्दा भी उठाया :
बैठक में ढाणी खान बहादुर के पशु अस्पताल का मुद्दा भी उठाया गया। ग्रामीणों ने बताया कि करीब 15 वर्ष से भवन बना हुआ है, लेकिन चिकित्सक की नियुक्ति नहीं हुई। इससे पशुपालकों को पशुओं के उपचार के लिए दूर जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने भी 15 दिन में समाधान नहीं होने पर अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी दी।