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Hisar News: किताबों के दाम ने अभिभावकों की कमर तोड़ी, भारी बैग ने बच्चों के कंधे

Sat, 03 May 2025 10:11 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार Updated Sat, 03 May 2025 10:11 PM IST
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The cost of books broke the backs of parents, heavy bags weighed down the shoulders of children
हिसार। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले स्कूल संचालकों और पुस्तक व ड्रेस विक्रेताओं के गठजोड़ ने अभिभावकों की कमर तोड़ दी और अब भारी भरकम बस्तों के बोझ से मासूम बच्चों के कंधे टूट रहे हैं। कमीशन के चक्कर में पुस्तकों-नोट बुक्स व अन्य सामग्री और ड्रेस की मनमानी कीमतों से आम लोगों की जेब पर अनावश्यक बोझ पड़ा। शिक्षा विभाग के सख्त आदेश हैं कि निजी स्कूल अन्य प्रकाशकों की पुस्तकें नहीं लगाएंगे, बावजूद इसके किसी पर भी लगाम नहीं लग रही, वहीं अब बस्तों के वजन संबंधी आदेशों की धज्जियां उड़ाईं जा रही हैं। नतीजतन बच्चों को कंधों, कूल्हे व पीठ में दर्द की समस्या से जूझना पड़ रहा है। जिला नागरिक अस्पताल की हड्डी रोग ओपीडी में बीते एक माह में करीब 290 बच्चे ऐसी परेशानी लेकर पहुंचे हैं।
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आलम यह है कि तपती दोपहरी में बच्चे भारी बस्ते उठाकर घर जाते देखे जा सकते हैं। अभिभावक बताते हैं कि कक्षा पांच से 10 दस तक के बच्चों के बैग का वजन 8-10 किलो के आसपास है। यही नहीं पहली कक्षा के बच्चे के बैग का वजन 3-4 किलो के आसपास रहता है, जबकि नियमानुसार डेढ़ किलो से ज्यादा नहीं होना चाहिए। अप्रैल माह में नागरिक अस्पताल के हड्डी रोग की ओपीडी में 290 से अधिक बच्चे पहुंचे, जिनकी उम्र 8 से 13 साल के बीच है। इनमें 60 फीसदी बच्चों में पीठ दर्द की शिकायतें मिली है। शेष कुल्हे व घुटनों में दर्द से परेशान मिले। चिकित्सक मानते हैं कि स्कूली बच्चों में इस तरह की परेशानी की एक वजह भारी बैग है।
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स्कूल संचालक नहीं कर रहे मानकों का पालन
शिक्षा निदेशालय के आदेश के बावजूद स्कूल प्रबंधन बैग के लिए कक्षानुसार तय किए मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं। वहीं, अभिभावक भी जागरूक नहीं है। जिला शिक्षा अधिकारियों ने भी यह जानने की कोशिश नहीं कि नियमों का कितना पालन हो रहा। इसका खामियाजा मासूमों को भुगतना पड़ रहा है।
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बिगड़ सकती है बच्चे के खड़े रहने और बैठने की मुद्रा
नागरिक अस्पताल के हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेश कौशिक ने बताया कि अभिभावकों को गंभीर होने की जरूरत है। लापरवाही बरती तो बच्चे की रीढ़ की हड्डी में बांगापन की समस्या हो सकती है। जोकि खड़े होने और बैठने की मुद्रा को भी बिगाड़ सकती है। हड्डी रोग की ओपीडी में बीते एक माह में करीब 290 अभिभावक अपने बच्चों में मांसपेशियों-कंधों में दर्द की शिकायत लेकर पहुंच चुके हैं, जोकि गंभीर है। बच्चे को पीठ-कंधों, कूल्हे व घुटने के दर्द की समस्या हो तो बिना देरी किए चिकित्सक से संपर्क करें।

योजना को लागू करने पर ध्यान नहीं दिया
सरकारी स्कूलों में ज्वॉयफुल डे योजना को लागू किया था, जिसमें शनिवार को बिना बैग लेकर बच्चों को स्कूल में पहुंचना था। ताकि काफी हद तक बच्चे को बस्ते के बोझ से निजात मिले। लेकिन सरकार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया, जिसका असर अब देखने को मिल रहा है। ये सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गया। - विक्रम सिसाय, निवर्तमान प्रधान, हसला

स्कूल संचालक गंभीर नहीं
शिक्षा निदेशालय के आदेश के बावजूद न निजी स्कूल और न सरकारी स्कूल गंभीर है। पहली कक्षा के बच्चे के बैग का वजन 3-4 किलो के आसपास रहता है। भारी-भरकम बस्ते का बोझ लेकर बच्चे स्कूल जा रहे हैं। इससे उनका शारीरिक विकास भी रुक रहा है। अधिकारियों को स्कूल में जाकर निरीक्षण करना चाहिए। - राजीव सरदाना, अभिभावक

आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित
सरकारी आदेश सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहते हैं। धरातल पर कुछ नहीं होता है। न निजी स्कूल प्रबंधन और न शिक्षा विभाग के अधिकारी गंभीर है। कई बार बस्ते के बोझ संबंधी समस्या उठा चुके हैं, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ है। आलम यह है कि कक्षा पांच से 10 दस तक के बच्चों के बैग का वजन 8-10 किलो के आसपास रहता है। - ललित भाटिया, अभिभावक।

ये बोले प्राचार्य
सरकारी स्कूलों में बस्ते का बोझ कम है। जबकि निजी स्कूलों में अनावश्यक विषयों की किताबें लगाकर बच्चे की कमर पर बोझ डाला जा रहा है। जोकि गलत है। निजी स्कूल प्रबंधन को चाहिए कि वे जरूरी विषय की पुस्तकें ही कक्षा में मंगवाए। - जयभगवान वर्मा, प्राचार्य, पीएमश्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, गंगवा


ये है शिक्षा निदेशालय की ओर से तय मानक
- कक्षा पहली से दूसरी: स्कूल बैग का वजन 1.5 किलोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए।

- कक्षा तीसरी से पांचवीं: स्कूल बैग का वजन 2 से 3 किलोग्राम तक होना चाहिए।
- कक्षा छठी से सातवीं: स्कूल बैग का वजन 4 किलोग्राम तक होना चाहिए।
- आठवीं से नौवीं: स्कूल बैग का वजन 4.5 किलो तक होना चाहिए।
- कक्षा 10वीं: स्कूल बैग का वजन 5 किलो से अधिक नहीं होना चाहिए।

नियमों का उल्लंघन मिला तो कार्रवाई तय
बीईओ को आदेश दिए जा चुके हैं कि वे तय मानकों के हिसाब से बैग तय करवाएं। निरीक्षण के दौरान किसी भी स्कूल में नियमों का उल्लंघन मिला तो कार्रवाई तय है। साथ ही मुख्यालय को भी रिपोर्ट की जाएगी। - डॉ. निर्मल दहिया, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, हिसार।
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