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Hisar News: झिझक के फासले मिटे, संवाद का आया दौर
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प्रतीकात्मक फोटो
हिसार। घंटों मुर्गा बनाकर रखना, शरारत करने या होमवर्क न करने पर डंडे बरसाना और बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए एक्स्ट्रा क्लास के नाम पर देर रात तक स्कूल में पढ़ाना...। गुरु के अनुशासन और शिष्य पर दबाव का वह दौर अब बीते जमाने की बात हो गया है।
जेन-जी और जेन-अल्फा विद्यार्थी गली, बाजार या दोपहरी में खेलते समय शिक्षक को देखकर न झिझकता है और न ही नजरें चुराता है। गुरु-शिष्य के रिश्ते में अनुशासन की सख्ती और झिझक की जगह संवाद ने ले ली है। शिक्षक अब सिर्फ ज्ञान देने वाले नहीं बल्कि विद्यार्थियों के मेंटर की भूमिका भी निभा रहे हैं। शैक्षणिक संस्थानों में होने वाले आयोजनों में शिक्षक-शिक्षिकाओं के साथ विद्यार्थी ताल से ताल मिलाकर झूमते-गाते हैं। हंसी-ठिठोली करते हैं और पाउट व मजाकिया भावों के साथ सेल्फी लेकर इन पलों को यादगार बनाते हैं।
ब्लैकबोर्ड और चॉक-डस्टर गए, एआई का आया जमाना
बदलते समय के साथ शिक्षा का स्वरूप भी तेजी से बदला है। ब्लैकबोर्ड और चॉक-डस्टर की जगह स्मार्ट स्क्रीन ने ले ली है। गूगल, यूट्यूब, ऑनलाइन कोर्स और एआई विद्यार्थियों की पढ़ाई का हिस्सा बन चुके हैं। शिक्षक भी सोशल मीडिया के माध्यम से विद्यार्थियों के साथ ज्ञान और उपयोगी सामग्री साझा कर रहे हैं।
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सम्मान दर्शाने के लिए सोशल मीडिया का भी सहारा
आधुनिक दौर में गुरु-शिष्य का रिश्ता भी नए रूप में सामने आया है। अब सम्मान का आधार डर नहीं बल्कि संवाद और विश्वास है। जेन-जी शिक्षकों के सामने अपनी बात खुलकर रखते हैं। सम्मान अब चरण-स्पर्श तक सीमित नहीं बल्कि सोशल मीडिया और शैक्षणिक संस्थनों के व्हाट्सग्रुपों में रील्स, क्रिएटिव पोस्ट शेयर करने से व्यक्त किया जाता है।
आधुनिक पीढ़ी उन शिक्षकों को आदर्श मानती है जो तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें। हम रटने वाली व्यवस्था के बजाय कौशल आधारित शिक्षा और अपने विचारों को खुलकर रखने की आजादी चाहते हैं। शिक्षकों से अपेक्षा है कि वे व्यावहारिक ज्ञान देने के साथ मानसिक संबल दें और कॅरिअर चुनने में मदद करें। - ईशा, छात्रा, आजादनगर
इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में जानकारी के बहुत से स्रोत हैं। ऐसे में शिक्षक की जरूरत इस बात के लिए ज्यादा महसूस होती है कि वह सही जानकारी जुटाने और उसका सही इस्तेमाल करने में हमारा मार्गदर्शन करें। - प्राची, छात्रा, तोशाम
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क्या बोले शिक्षक
सोशल मीडिया के दौर में शिक्षक के रूप में भूमिका सिर्फ पाठ्यक्रम पूरा कराने की नहीं बल्कि बच्चों का भाषा के प्रति जुड़ाव और रुचि बनाए रखने की भी है। तकनीक के साथ कदमताल जरूरी है। स्वयं को अपडेट रखने के साथ बच्चों को यह सिखा रहा हूं कि इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री में से प्रामाणिक ज्ञान कैसे अर्जित किया जाए। - संतलाल, कार्यवाहक मुख्य अध्यापक, गारनपुरा कलां
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कोई भी तकनीक शिक्षक का विकल्प नहीं हो सकती। विद्यार्थियों की बदलती जरूरतों को देखते हुए शिक्षा में तकनीक का समावेश कर डिजिटल संसाधनों, इंटरेक्टिव गतिविधियों और एआई आधारित टूल्स का प्रयोग कर रहा हूं ताकि विद्यार्थियों को विषय समझने में आसानी हो। - इंद्रपाल, प्रवक्ता, भौतिक विज्ञान, स्याहड़वा
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जेन-जी और जेन-अल्फा विद्यार्थी गली, बाजार या दोपहरी में खेलते समय शिक्षक को देखकर न झिझकता है और न ही नजरें चुराता है। गुरु-शिष्य के रिश्ते में अनुशासन की सख्ती और झिझक की जगह संवाद ने ले ली है। शिक्षक अब सिर्फ ज्ञान देने वाले नहीं बल्कि विद्यार्थियों के मेंटर की भूमिका भी निभा रहे हैं। शैक्षणिक संस्थानों में होने वाले आयोजनों में शिक्षक-शिक्षिकाओं के साथ विद्यार्थी ताल से ताल मिलाकर झूमते-गाते हैं। हंसी-ठिठोली करते हैं और पाउट व मजाकिया भावों के साथ सेल्फी लेकर इन पलों को यादगार बनाते हैं।
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ब्लैकबोर्ड और चॉक-डस्टर गए, एआई का आया जमाना
बदलते समय के साथ शिक्षा का स्वरूप भी तेजी से बदला है। ब्लैकबोर्ड और चॉक-डस्टर की जगह स्मार्ट स्क्रीन ने ले ली है। गूगल, यूट्यूब, ऑनलाइन कोर्स और एआई विद्यार्थियों की पढ़ाई का हिस्सा बन चुके हैं। शिक्षक भी सोशल मीडिया के माध्यम से विद्यार्थियों के साथ ज्ञान और उपयोगी सामग्री साझा कर रहे हैं।
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सम्मान दर्शाने के लिए सोशल मीडिया का भी सहारा
आधुनिक दौर में गुरु-शिष्य का रिश्ता भी नए रूप में सामने आया है। अब सम्मान का आधार डर नहीं बल्कि संवाद और विश्वास है। जेन-जी शिक्षकों के सामने अपनी बात खुलकर रखते हैं। सम्मान अब चरण-स्पर्श तक सीमित नहीं बल्कि सोशल मीडिया और शैक्षणिक संस्थनों के व्हाट्सग्रुपों में रील्स, क्रिएटिव पोस्ट शेयर करने से व्यक्त किया जाता है।
आधुनिक पीढ़ी उन शिक्षकों को आदर्श मानती है जो तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें। हम रटने वाली व्यवस्था के बजाय कौशल आधारित शिक्षा और अपने विचारों को खुलकर रखने की आजादी चाहते हैं। शिक्षकों से अपेक्षा है कि वे व्यावहारिक ज्ञान देने के साथ मानसिक संबल दें और कॅरिअर चुनने में मदद करें। - ईशा, छात्रा, आजादनगर
इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में जानकारी के बहुत से स्रोत हैं। ऐसे में शिक्षक की जरूरत इस बात के लिए ज्यादा महसूस होती है कि वह सही जानकारी जुटाने और उसका सही इस्तेमाल करने में हमारा मार्गदर्शन करें। - प्राची, छात्रा, तोशाम
क्या बोले शिक्षक
सोशल मीडिया के दौर में शिक्षक के रूप में भूमिका सिर्फ पाठ्यक्रम पूरा कराने की नहीं बल्कि बच्चों का भाषा के प्रति जुड़ाव और रुचि बनाए रखने की भी है। तकनीक के साथ कदमताल जरूरी है। स्वयं को अपडेट रखने के साथ बच्चों को यह सिखा रहा हूं कि इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री में से प्रामाणिक ज्ञान कैसे अर्जित किया जाए। - संतलाल, कार्यवाहक मुख्य अध्यापक, गारनपुरा कलां
कोई भी तकनीक शिक्षक का विकल्प नहीं हो सकती। विद्यार्थियों की बदलती जरूरतों को देखते हुए शिक्षा में तकनीक का समावेश कर डिजिटल संसाधनों, इंटरेक्टिव गतिविधियों और एआई आधारित टूल्स का प्रयोग कर रहा हूं ताकि विद्यार्थियों को विषय समझने में आसानी हो। - इंद्रपाल, प्रवक्ता, भौतिक विज्ञान, स्याहड़वा