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Hisar News: हिमाचल, पंजाब, हरियाणा से आए चिकित्सकों को सैंपल लेने का तरीका सिखाया
Tue, 13 Feb 2024 09:02 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Tue, 13 Feb 2024 09:02 PM IST
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हिसार। वन हेल्थ प्रोग्राम के तहत हरियाणा, पंजाब, हिमाचल के 33 चिकित्सकों को पांच दिन के प्रशिक्षण में पशुओं से मानव और मानव से पशुओं में फैलने वाली जूनोटिक बीमारियों के बारे में प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन इन चिकित्सकों को सैंपल लेने के तरीकों के बारे में बताया गया। यह चिकित्सक अपने क्षेत्र में जाकर रिपोर्टिंग ऑफिसर के तौर पर काम करेंगे। जूनोटिक बीमारियों की जानकारी मिलते ही राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र को रिपोर्ट करेंगे।
राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. टीके भट्टाचार्य ने प्रशिक्षण शिविर में आए चिकित्सकों को संबोधित करते हुए कहा कि जूनोटिक की 8 प्रमुख बीमारियाें पर फोकस किया जाएगा। जिसमें ग्लैंडर्स, टीबी, ब्रुसोला, रैबीज, पोक्स, पैरासीटिक व अन्य शामिल हैं। शिविर के दौरान इन चिकित्सकों को टेस्टिंग का तरीका सिखाया जाएगा। अपने एरिया में एलाइजा टेस्ट में रिपोर्ट पॉजिटीव मिली तो राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र को रिपोर्ट देंगे।
डॉ. टीके भट्टाचार्य ने बताया कि हिसार का राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र रीजनल सेंटर के तौर पर काम कर रहे हैं। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. हरिशंकर सिंहा ने बताया ने कि यह प्रशिक्षण 11 से 15 फरवरी तक रहेगा। इसके बाद दूसरा प्रशिक्षण कार्यक्रम 19 से 23 जनवरी तक रहेगा। करीब 70 प्रतिशत बीमारियां जूनोटिक हैं। ऐसे में बीमारियाें से लोगों को जागरूक करने के लिए वन हेल्थ प्रोग्राम के तहत यह प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहा है। जिसमें मानव चिकित्सक, पशु चिकित्सक, वाइल्ड लाइफ के पशु चिकित्सकों को शामिल किया गया है।
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राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. टीके भट्टाचार्य ने प्रशिक्षण शिविर में आए चिकित्सकों को संबोधित करते हुए कहा कि जूनोटिक की 8 प्रमुख बीमारियाें पर फोकस किया जाएगा। जिसमें ग्लैंडर्स, टीबी, ब्रुसोला, रैबीज, पोक्स, पैरासीटिक व अन्य शामिल हैं। शिविर के दौरान इन चिकित्सकों को टेस्टिंग का तरीका सिखाया जाएगा। अपने एरिया में एलाइजा टेस्ट में रिपोर्ट पॉजिटीव मिली तो राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र को रिपोर्ट देंगे।
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डॉ. टीके भट्टाचार्य ने बताया कि हिसार का राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र रीजनल सेंटर के तौर पर काम कर रहे हैं। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. हरिशंकर सिंहा ने बताया ने कि यह प्रशिक्षण 11 से 15 फरवरी तक रहेगा। इसके बाद दूसरा प्रशिक्षण कार्यक्रम 19 से 23 जनवरी तक रहेगा। करीब 70 प्रतिशत बीमारियां जूनोटिक हैं। ऐसे में बीमारियाें से लोगों को जागरूक करने के लिए वन हेल्थ प्रोग्राम के तहत यह प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहा है। जिसमें मानव चिकित्सक, पशु चिकित्सक, वाइल्ड लाइफ के पशु चिकित्सकों को शामिल किया गया है।
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