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गुजरात के कोटेश्वर महादेव मंदिर के स्वरूप में नजर आएगा सीसवाल धाम
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निमार्णाधीन सीसवाल धाम का शिव मंदिर।
- फोटो : Hisar
हैरी शर्मा
मंडी आदमपुर। करीब 750 वर्ष प्राचीन ऐतिहासिक सीसवाल धाम जल्द ही गुजरात के कोटेश्वर महादेव मंदिर के स्वरूप में नजर आएगा। पिछले करीब एक साल से करोड़ों रुपये की लागत से शिव मंदिर का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। जीर्णोद्धार के बाद यह मंदिर देशभर के लिए आस्था का केंद्र स्थापित होगा। श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र सीसवाल धाम महाभारत काल में पांडवों द्वारा स्थापित प्राचीन ऐतिहासिक शिव मंदिर है। वहीं यह समाज के लिए एक धरोहर है।
मंदिर कमेटी के प्रधान घीसाराम जैन ने बताया कि जीर्णोद्धार के लिए अयोध्या राम मंदिर के आर्किटेक्ट द्वारा नक्शा तैयार किया गया है। मंदिर के जीर्णोद्धार करने के साथ ही इसके आसपास की जगह का सुंदरीकरण करवाया जाएगा। मंदिर की भूमि पर गर्भगृह, सभाकक्ष, यज्ञशाला, पार्क बनाए जाएंगे।
प्राचीन ऐतिहासिक शिव मंदिर में शिवलिंग की स्थापना पांडवों ने महाभारत काल के दौरान की थी। मंदिर का ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्व इस तथ्य से साफ हो जाता है कि पुरातत्व विभाग के पास इस मंदिर का पिछले 750 सालों का रिकॉर्ड उपलब्ध है। इससे पूर्व का रिकॉर्ड स्वतंत्रता आंदोलन में जल गया था। हिसार से उत्तर-पश्चिम दिशा में सिंधु घाटी की सभ्यता व मोहन जोदड़ो-हड़प्पा कालीन सभ्यता की समकालीन प्राचीन सीसवालिय सभ्यता वर्तमान गांव सीसवाल की जगह पनपी। सभ्यता के कारण ही इस गांव का नाम सीसवाल पड़ा। प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. केसी यादव के शोध पत्रों मेें इसका विस्तृत विवरण मिलता है।
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बताया जाता है कि मंदिर के स्थान पर पहले एक फ्रांस का पेड़ हुआ करता था जहां एक संत तपस्या करते थे। संत को एक बार स्वप्न में पेड़ के नीचे शिवलिंग दबा दिखाई दिया। संत ने ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी। बाद में खुदाई करने पर 9-10 फुट लंबा शिवलिंग मिला जो पांडवों द्वारा स्थापित किया गया था। यही शिवलिंग इस मंदिर की नियति का आधार बना। संवाद
भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है सीसवाल धाम : जैन
मंदिर कमेटी के प्रधान घीसाराम जैन का दावा है कि यह भारत के सबसे प्राचीन चार मंदिरों में से एक है। अपने दावे का आधार वह केंद्रीय पुरातत्व विभाग से मिली सूचना को बताते हैं। यह सूचना मंदिर की प्राचीनता व ऐतिहासिकता से जुड़ी बताई गई है। शिवलिंग की लंबाई करीब चार फुट है और अंदर भी इतनी ही होने का अनुमान है। शिवलिंग के चारों ओर की शब्दावली एक विशेष भाषा में लिखी गई है, जो बहुत ही बारीक है। मंदिर के निर्माण के लिए खुदाई से ईंटें अपने आप में असाधारण हैं, जिनकी लंबाई 1.25 फुट व चौड़ाई 0.75 फुट है।
कारीगरों द्वारा तराशे जा रहे हैं भरतपुर के पत्थर
सीसवाल धाम के शिव मंदिर को भव्य रूप देने के लिए कमेटी द्वारा राजस्थान के भरतपुर जिले के बंशी पहाड़पुर से विशेष पत्थर मंगवाए गए है। कारीगर इन पत्थरों को तराशकर अनेक रूप दे रहे है। आर्किटेक्ट आशीष व कारीगर धीरेन ने बताया कि बंशी पहाड़पुर के पत्थर की खासियत मजबूती और सुंदरता के कारण सदियों से प्रसिद्ध है। इसमें अन्य पत्थरों के मुकाबले अधिक भार सहने की क्षमता और आसानी से पच्चीकारी होने की खासियत के कारण इसकी मांग हमेशा से रही है।
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मंडी आदमपुर। करीब 750 वर्ष प्राचीन ऐतिहासिक सीसवाल धाम जल्द ही गुजरात के कोटेश्वर महादेव मंदिर के स्वरूप में नजर आएगा। पिछले करीब एक साल से करोड़ों रुपये की लागत से शिव मंदिर का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। जीर्णोद्धार के बाद यह मंदिर देशभर के लिए आस्था का केंद्र स्थापित होगा। श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र सीसवाल धाम महाभारत काल में पांडवों द्वारा स्थापित प्राचीन ऐतिहासिक शिव मंदिर है। वहीं यह समाज के लिए एक धरोहर है।
मंदिर कमेटी के प्रधान घीसाराम जैन ने बताया कि जीर्णोद्धार के लिए अयोध्या राम मंदिर के आर्किटेक्ट द्वारा नक्शा तैयार किया गया है। मंदिर के जीर्णोद्धार करने के साथ ही इसके आसपास की जगह का सुंदरीकरण करवाया जाएगा। मंदिर की भूमि पर गर्भगृह, सभाकक्ष, यज्ञशाला, पार्क बनाए जाएंगे।
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प्राचीन ऐतिहासिक शिव मंदिर में शिवलिंग की स्थापना पांडवों ने महाभारत काल के दौरान की थी। मंदिर का ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्व इस तथ्य से साफ हो जाता है कि पुरातत्व विभाग के पास इस मंदिर का पिछले 750 सालों का रिकॉर्ड उपलब्ध है। इससे पूर्व का रिकॉर्ड स्वतंत्रता आंदोलन में जल गया था। हिसार से उत्तर-पश्चिम दिशा में सिंधु घाटी की सभ्यता व मोहन जोदड़ो-हड़प्पा कालीन सभ्यता की समकालीन प्राचीन सीसवालिय सभ्यता वर्तमान गांव सीसवाल की जगह पनपी। सभ्यता के कारण ही इस गांव का नाम सीसवाल पड़ा। प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. केसी यादव के शोध पत्रों मेें इसका विस्तृत विवरण मिलता है।
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बताया जाता है कि मंदिर के स्थान पर पहले एक फ्रांस का पेड़ हुआ करता था जहां एक संत तपस्या करते थे। संत को एक बार स्वप्न में पेड़ के नीचे शिवलिंग दबा दिखाई दिया। संत ने ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी। बाद में खुदाई करने पर 9-10 फुट लंबा शिवलिंग मिला जो पांडवों द्वारा स्थापित किया गया था। यही शिवलिंग इस मंदिर की नियति का आधार बना। संवाद
भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है सीसवाल धाम : जैन
मंदिर कमेटी के प्रधान घीसाराम जैन का दावा है कि यह भारत के सबसे प्राचीन चार मंदिरों में से एक है। अपने दावे का आधार वह केंद्रीय पुरातत्व विभाग से मिली सूचना को बताते हैं। यह सूचना मंदिर की प्राचीनता व ऐतिहासिकता से जुड़ी बताई गई है। शिवलिंग की लंबाई करीब चार फुट है और अंदर भी इतनी ही होने का अनुमान है। शिवलिंग के चारों ओर की शब्दावली एक विशेष भाषा में लिखी गई है, जो बहुत ही बारीक है। मंदिर के निर्माण के लिए खुदाई से ईंटें अपने आप में असाधारण हैं, जिनकी लंबाई 1.25 फुट व चौड़ाई 0.75 फुट है।
कारीगरों द्वारा तराशे जा रहे हैं भरतपुर के पत्थर
सीसवाल धाम के शिव मंदिर को भव्य रूप देने के लिए कमेटी द्वारा राजस्थान के भरतपुर जिले के बंशी पहाड़पुर से विशेष पत्थर मंगवाए गए है। कारीगर इन पत्थरों को तराशकर अनेक रूप दे रहे है। आर्किटेक्ट आशीष व कारीगर धीरेन ने बताया कि बंशी पहाड़पुर के पत्थर की खासियत मजबूती और सुंदरता के कारण सदियों से प्रसिद्ध है। इसमें अन्य पत्थरों के मुकाबले अधिक भार सहने की क्षमता और आसानी से पच्चीकारी होने की खासियत के कारण इसकी मांग हमेशा से रही है।

सीसवाल धाम का निर्माणाधीन मंदिर।- फोटो : Hisar