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Hisar News: गाय-भैंस में गरमाहट की जांच के लिए वैज्ञानिक खोज रहे किट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 13 Jul 2023 11:14 PM IST
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Scientists are looking for a kit to check the heat in cow-buffalo
उदयभान त्रिपाठी
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हिसार। गाय-भैंस में गर्भधारण की जांच के लिए किट बनाने के बाद अब केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक भेड़-बकरी के लिए भी ऐसा ही किट बनाने में जुटे हैं। इसके अलावा गाय-भैंस में गरमाहट की जांच के लिए नई किट की खोज की जा रही है। संस्थान के वैज्ञानिक ओपीयू आईवीएफ तकनीक से उन्नत नस्ल का कटड़े का जन्म करा चुके हैं।
घटते चारागाह और पशुपालन के बदले तरीकों का असर पशुओं के व्यवहार पर भी पड़ रहा है। अब पशुओं में गरमाहट आने के लक्षण भी बदल गए हैं। गोशाला में बड़ी संख्या में पाली जा रही गाय-भैंसों में इनकी पहचान करना और भी कठिन काम है। इसलिए कई बार पशुओं का सही समय पर गर्भाधान नहीं हो पाता है। इसका सीधा नुकसान दूध उत्पादन पर पड़ता है। इसलिए भैंस अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक ऐसे किट की खोज में लगे हैं, जिससे पशुओं में गरमाहट की सही समय पर पहचान हो सके। केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. सज्जन सिंह ने बताया कि गरमाहट की जांच के लिए नई तकनीकियों पर शोध कार्य चल रहा है। यह शोध देशभर के लाखों पशु पालकों के लिए लाभदायक होगा।
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एनआरसीई के वैज्ञानिक खोज रहे ग्लैंडर्स का टीका
केंद्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक भी अब तक लाइलाज ग्लैंडर्स की रोकथाम के लिए वैक्सीन खोजने में लगे हैं। इस संस्थान के वैज्ञानिक इससे पहले पशुओं को कोरोना से बचाने की वैक्सीन के अलावा लंपी वायरस की रोकथाम के लिए भी वैक्सीन खोज चुके हैं।
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सरोगेसी से उपयोगी बनेंगी बेकार गाय
आने वाला साल दुग्ध उत्पादन के लिहाज से भी क्रांतिकारी होगा। पशुपालन विभाग और लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक मिलकर सरोगेसी के जरिये देसी नस्ल की गायों को दुधारू बनाने में जुटे हैं। लुवास में इस तकनीक से अब तक 20 गायों का प्रजनन व 10 गायों का गर्भाधान कराया गया है। आने वाले साल में इस तकनीक को गांव-गांव पशुपालकों तक पहुंचाने की योजना है। इस कार्य में लुवास तकनीक मदद और पशुपालन विभाग प्रशासनिक सहयोग देगा।
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