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Hisar News: आरटीआई कार्यकर्ता मनोज सिंधवानी की वसूली केस में जमानत
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हिसार। नगर निगम में अवैध निर्माण से जुड़ी शिकायतों के मामले में दर्ज कथित वसूली केस में आरटीआई कार्यकर्ता मनोज सिंधवानी को अदालत से जमानत मिल गई है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमआईसी) आयुष की अदालत ने बुधवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश दिया। हालांकि एक अन्य मामले में उन्हें अभी जमानत नहीं मिली है।
यह मामला थाना सिटी हिसार में दर्ज कथित जबरन वसूली से जुड़ा है, जिसकी जांच पूरी कर पुलिस अदालत में चालान पेश कर चुकी है। आरोप है कि नगर निगम में की गई शिकायतों को वापस लेने के एवज में राशि की मांग की गई थी।
बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता अजय चौधरी ने दलील दी कि शिकायतकर्ता दीपांशु ने स्वयं अपने परिचित मुकेश के माध्यम से मनोज सिंधवानी से संपर्क किया था। उनका कहना था कि बातचीत सीधे दीपांशु और मनोज के बीच नहीं, बल्कि मुकेश और मनोज के बीच हुई। बचाव पक्ष के अनुसार मुकेश पहले से मनोज को जानता था और उसके पास मनोज के एक लाख रुपये उधार भी थे।
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अधिवक्ता ने यह भी कहा कि गणेश मार्केट स्थित दुकान पर मुकेश द्वारा स्वयं एक लाख रुपये मेज पर रखे गए थे और यह पूरा घटनाक्रम सीसीटीवी फुटेज में भी दर्ज है। बचाव पक्ष का तर्क था कि यदि कोई व्यक्ति शिकायत वापस लेने के लिए स्वयं राशि देने की पेशकश करता है तो इसे वसूली नहीं माना जा सकता। दलीलों पर सुनवाई के बाद अदालत ने मनोज सिंधवानी को जमानत दे दी। मामले की आगे की सुनवाई जारी रहेगी।
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यह मामला थाना सिटी हिसार में दर्ज कथित जबरन वसूली से जुड़ा है, जिसकी जांच पूरी कर पुलिस अदालत में चालान पेश कर चुकी है। आरोप है कि नगर निगम में की गई शिकायतों को वापस लेने के एवज में राशि की मांग की गई थी।
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बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता अजय चौधरी ने दलील दी कि शिकायतकर्ता दीपांशु ने स्वयं अपने परिचित मुकेश के माध्यम से मनोज सिंधवानी से संपर्क किया था। उनका कहना था कि बातचीत सीधे दीपांशु और मनोज के बीच नहीं, बल्कि मुकेश और मनोज के बीच हुई। बचाव पक्ष के अनुसार मुकेश पहले से मनोज को जानता था और उसके पास मनोज के एक लाख रुपये उधार भी थे।
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अधिवक्ता ने यह भी कहा कि गणेश मार्केट स्थित दुकान पर मुकेश द्वारा स्वयं एक लाख रुपये मेज पर रखे गए थे और यह पूरा घटनाक्रम सीसीटीवी फुटेज में भी दर्ज है। बचाव पक्ष का तर्क था कि यदि कोई व्यक्ति शिकायत वापस लेने के लिए स्वयं राशि देने की पेशकश करता है तो इसे वसूली नहीं माना जा सकता। दलीलों पर सुनवाई के बाद अदालत ने मनोज सिंधवानी को जमानत दे दी। मामले की आगे की सुनवाई जारी रहेगी।