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हरियाणा में एक्यूआई का बढ़ता स्तर: भिवानी में माइनिंग और स्टोन क्रशर बंद, अन्य जिलों में भी चिंताजनक स्थिति
Sun, 08 Nov 2026 10:02 AM IST
Naveen
अमर उजाला नेटवर्क, हरियाणा
अमर उजाला नेटवर्क, हरियाणा
Published by: Naveen
Updated Sun, 08 Nov 2026 10:02 AM IST
सार
हरियाणा के जिलों में वायु प्रदूषण का बढ़ता स्तर एक गंभीर चिंता का विषय है। भिवानी में माइनिंग और स्टोन क्रशर बंद करने जैसे कड़े कदम उठाए गए हैं, लेकिन अन्य जिलों में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
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वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंचा
- फोटो : संवाद
विस्तार
हरियाणा के कई जिलों में वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है, जिसके चलते प्रशासन ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। भिवानी जिले में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 307 दर्ज किया गया है, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जिले की सभी माइनिंग और स्टोन क्रशर इकाइयों को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया है। इसके अतिरिक्त, 20 नवंबर तक धूल उड़ाने वाले निर्माण और तोड़फोड़ कार्यों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।
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त्योहारी सीजन के चरम पर होने के बावजूद, दिवाली से पहले ही प्रदेश की आबोहवा बिगड़ गई है। स्मॉग और धूल-धुएं के कणों से आंखों में जलन, गले में खराश और सांस संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। सुबह और शाम के समय धुंध और प्रदूषण की मोटी परत छाई रहती है, जिससे दृश्यता भी प्रभावित हो रही है।
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विभिन्न जिलों में वायु गुणवत्ता की स्थिति:
हिसार में शनिवार को औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 321 दर्ज किया गया, जो पिछले दिनों के 333 से थोड़ी गिरावट दर्शाता है। यहां अब तक पराली जलाने के कुल 3 मामले दर्ज किए गए हैं। स्मॉग का असर बना हुआ है और दिवाली पर पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए कृषि विभाग के अधिकारी निगरानी रखेंगे।
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दिवाली से पहले लगातार तीन दिनों से वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। शनिवार को फतेहाबाद का एक्यूआई 222 दर्ज किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए चिंताजनक है। इससे पहले वीरवार को यह 242 और शुक्रवार को 197 था।
सिरसा का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 383 दर्ज किया गया। अब तक पराली जलाने के केवल 12 मामले सामने आए हैं, लेकिन प्रदूषण का स्तर बढ़ना चिंता का विषय बना हुआ है।
चरखी दादरी में ग्रेप तीन के नियम लागू हो चुके हैं, लेकिन उनका सख्ती से पालन नहीं हो रहा है। शनिवार को जिले का एक्यूआई 306 दर्ज किया गया, जबकि शुक्रवार को यह 310 था।
प्रशासनिक दावों के बावजूद, सड़कों पर उड़ रही धूल और निर्माण स्थलों से उठने वाली धूल हवा की गुणवत्ता को और खराब कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के प्रयास जारी हैं, लेकिन इसका असर सीमित दिख रहा है। दिवाली पर होने वाली आतिशबाजी से प्रदूषण का स्तर और बढ़ने की आशंका है, जिससे सांस और हृदय रोगियों के लिए खतरा बढ़ सकता है।