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Hisar News: उमस भरे मौसम में दाद-खुजली के मरीज बढ़े

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 06 Jul 2025 12:00 AM IST
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Ringworm and itching patients increased in humid weather
हिसार। उमस और चिपचिपी गर्मी के कारण त्वचा रोगों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अस्पतालों में त्वचा रोग की ओपीडी में मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में वातावरण में बढ़ी नमी फंगल और बैक्टीरियल संक्रमण के लिए अनुकूल स्थितियां पैदा करती है, जिससे दाद, खुजली के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है।
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आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार, वर्षा ऋतु में वात और पित्त दोष का असंतुलन बढ़ जाता है, जिससे त्वचा संबंधी समस्याएं पनपने लगती हैं। नमी के कारण त्वचा पर पसीना सूख नहीं पाता, जिससे वह चिपचिपी हो जाती है और संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा इस मौसम में पाचन अग्नि कमजोर हो जाती है, जिससे शरीर में विषाक्त पदार्थ (आम) का संचय होता है-यह भी त्वचा रोगों का एक प्रमुख कारण है। गंदे पानी से संपर्क, गीले कपड़े देर तक पहनना और साफ-सफाई में लापरवाही भी संक्रमण को बढ़ावा देती है।
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स्वच्छता और आयुर्वेदिक उपायों से मिलेगी सुरक्षा
आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. साकेत शर्मा ने बताया कि इस मौसम में व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। नियमित स्नान करें, गीले कपड़े तुरंत बदलें, सूती व ढीले कपड़े पहनें और त्वचा को सूखा रखें। आहार में हल्का और सुपाच्य भोजन लें। करेला, नीम, परवल जैसी कड़वी सब्जियों को शामिल करें।
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त्वचा रोग होने पर ये उपाय लाएं राहत
यदि त्वचा पर संक्रमण हो जाए तो नीम, हल्दी, त्रिफला, मंजिष्ठा और आरोग्यवर्धिनी वटी जैसी आयुर्वेदिक औषधियां लाभकारी होती हैं। बाहरी प्रयोग के लिए नीम के पानी से धोना, हल्दी का लेप, नारियल तेल या एलोवेरा जेल लगाने से भी राहत मिलती है। गंभीर या पुरानी समस्याओं में पंचकर्म चिकित्सा द्वारा शरीर को अंदर से शुद्ध किया जा सकता है।

विशेषज्ञ से लें परामर्श
विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी त्वचा रोग की स्थिति में स्वयं इलाज न करें। लंबे समय तक बनी रहने वाली या बार-बार लौटने वाली समस्या के लिए प्रशिक्षित आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श आवश्यक है। बरसात के मौसम में थोड़ी सावधानी और आयुर्वेद के उपायों को अपनाकर त्वचा को स्वस्थ व संक्रमणमुक्त रखा जा सकता है।
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