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Hisar News: जीजेयू के सेवानिवृत्त लैब सहायक बस में जिंदा जले, पत्नी भी झुलसी
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देवेंद्र भारद्वाज
हिसार। जीजेयू से अगस्त 2026 में लैब सहायक के पद से सेवानिवृत्त हुए देवेंद्र भारद्वाज (60) की बुधवार रात यमुना एक्सप्रेसवे पर बस में आग लगने से मौत हो गई। हादसे में उनकी पत्नी रेखा भारद्वाज भी झुलस गईं। वीरवार देर रात देवेंद्र का शव चंदन नगर स्थित घर पहुंचा। शुक्रवार को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
देवेंद्र अपनी पत्नी के साथ चंदन नगर से दिल्ली होते हुए उत्तर प्रदेश के महोबा जा रहे थे। रिश्तेदार नीशु ने बताया कि देवेंद्र मूल रूप से महोबा के रहने वाले थे। उनकी माता का कुछ समय पहले निधन हुआ था, जिसके चलते दंपती महोबा जा रहा था। दिल्ली के कश्मीरी गेट पहुंचने के बाद दोनों ने निजी बस से महोबा के लिए यात्रा शुरू की थी।
देवेंद्र ने करीब तीन साल पहले चंदन नगर में अपना मकान बनाया था। इससे पहले वह इसी क्षेत्र में किराये के मकान में रहते थे। जीजेयू से सेवानिवृत्त होने के बाद वह यहीं रह रहे थे। उनका बेटा सर्वोदय रोहतक में सेनेटरी की दुकान चलाता है, जबकि बेटी काजल की शादी हो चुकी है। हादसे में झुलसी रेखा को देर रात हिसार के निजी अस्पताल लाया जा रहा था।
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परिजनों के अनुसार, कुछ समय पहले हुए हादसे में देवेंद्र के पैर में फ्रैक्चर हो गया था और उसमें लोहे की रॉड डाली गई थी। रेखा ने बताया कि आग लगने के बाद वह तेजी से बाहर नहीं निकल सके और बस के अंदर ही फंस गए। हादसे में उनका सामान भी जलकर राख हो गया। रेखा को परिवार के अन्य सदस्यों के मोबाइल नंबर याद नहीं थे, जिससे हादसे की सूचना परिजनों तक पहुंचाने में भी परेशानी हुई।
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देवेंद्र अपनी पत्नी के साथ चंदन नगर से दिल्ली होते हुए उत्तर प्रदेश के महोबा जा रहे थे। रिश्तेदार नीशु ने बताया कि देवेंद्र मूल रूप से महोबा के रहने वाले थे। उनकी माता का कुछ समय पहले निधन हुआ था, जिसके चलते दंपती महोबा जा रहा था। दिल्ली के कश्मीरी गेट पहुंचने के बाद दोनों ने निजी बस से महोबा के लिए यात्रा शुरू की थी।
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देवेंद्र ने करीब तीन साल पहले चंदन नगर में अपना मकान बनाया था। इससे पहले वह इसी क्षेत्र में किराये के मकान में रहते थे। जीजेयू से सेवानिवृत्त होने के बाद वह यहीं रह रहे थे। उनका बेटा सर्वोदय रोहतक में सेनेटरी की दुकान चलाता है, जबकि बेटी काजल की शादी हो चुकी है। हादसे में झुलसी रेखा को देर रात हिसार के निजी अस्पताल लाया जा रहा था।
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परिजनों के अनुसार, कुछ समय पहले हुए हादसे में देवेंद्र के पैर में फ्रैक्चर हो गया था और उसमें लोहे की रॉड डाली गई थी। रेखा ने बताया कि आग लगने के बाद वह तेजी से बाहर नहीं निकल सके और बस के अंदर ही फंस गए। हादसे में उनका सामान भी जलकर राख हो गया। रेखा को परिवार के अन्य सदस्यों के मोबाइल नंबर याद नहीं थे, जिससे हादसे की सूचना परिजनों तक पहुंचाने में भी परेशानी हुई।