{"_id":"65a0376455c231232c0c5864","slug":"reena-bhatti-hoists-flag-on-kangri-peak-in-ut-of-ladakh-hisar-news-c-21-hsr1020-298051-2024-01-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hisar News: रीना भट्टी ने लद्दाख की यूटी कांगड़ी चोटी पर गाड़ा झंडा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hisar News: रीना भट्टी ने लद्दाख की यूटी कांगड़ी चोटी पर गाड़ा झंडा
विज्ञापन
हिसार। पर्वतारोही रीना भट्टी ने हाड़ कंपा देने वाली ठंड में लद्दाख की यूटी कांगड़ी विंटर चोटी (6070 मीटर) पर झंडा गाड़ जिले का नाम रोशन किया। रूमस्ते गांव की ऊपरी घाटी में नई खोजी गई बर्फ से ढकी चोटी को फतह करने के लिए 11 दिन का अभियान चलता है, लेकिन हिसार की बेटी रीना भट्टी ने माइनस 30 डिग्री तापमान में इसे 4 दिनों में फतह कर लिया।
हिमपुत्री के नाम से विख्यात रीना भट्टी ने वीरवार को सजग के प्रदेशाध्यक्ष सत्यपाल अग्रवाल से मुलाकात कर अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि लद्दाख की रुमस्ते चोटी का सफर बड़ा कठिन था, लेकिन विश्वास और हौसले ने उसे जीत दिलाई। उन्होंने बताया कि पिछले तीन शीतकालीन अभियान खराब मौसम, तेज हवाओं जैसे कई कारणों से सफल नहीं हो सके। पिछली बार हमें हिमस्खलन तूफान का सामना करना पड़ा था। यूटी कांगड़ी से बहुत कुछ सीखने को मिला है। सत्यपाल अग्रवाल ने कहा कि रीना को सजग व सजग से जुड़ी सभी संस्थाएं सम्मानित करेंगी। वहीं, बालक गांव के सरपंच प्रतिनिधि कृष्ण रेढू और युवा समाजसेवी एवं मास्टर विजेंद्र पंघालिया ने रीना भट्टी की इस उपलब्धि पर उन्हें शाबाशी देते हुए कहा कि उन्हें अपनी बेटियों पर गर्व है। सर्वजातीय भ्याण खाप के युवा प्रधान नरेश भ्याण ने कहा कि रीना भट्टी द्वारा जो गोल हासिल किया है वह भ्याण खाप के साथ-साथ प्रदेश के लिए गौरव की बात है।
पहले इस कारण आई थी दिक्कत
2021 में पहली बार गलत रूट अप, -25 से -35 डिग्री तापमान में बिना और भोजन के 20 घंटे की मशक्कत के बाद बेस कैंप लौटे।
2022 में केवल 2 पर्वतारोही अंतिम पर्वतमाला तक बचे रहे्, लेकिन हिमस्खलन के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा।
2023 में शिखर सम्मेलन से ठीक 150 मीटर पहले भारी हिमस्खलन, सौभाग्यशाली लोग जीवित बचे
2024 में उत्तम मौसम और उत्तम शिखर सम्मेलन। अंततः यह पूरा हो गया।
विज्ञापन
हिमपुत्री के नाम से विख्यात रीना भट्टी ने वीरवार को सजग के प्रदेशाध्यक्ष सत्यपाल अग्रवाल से मुलाकात कर अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि लद्दाख की रुमस्ते चोटी का सफर बड़ा कठिन था, लेकिन विश्वास और हौसले ने उसे जीत दिलाई। उन्होंने बताया कि पिछले तीन शीतकालीन अभियान खराब मौसम, तेज हवाओं जैसे कई कारणों से सफल नहीं हो सके। पिछली बार हमें हिमस्खलन तूफान का सामना करना पड़ा था। यूटी कांगड़ी से बहुत कुछ सीखने को मिला है। सत्यपाल अग्रवाल ने कहा कि रीना को सजग व सजग से जुड़ी सभी संस्थाएं सम्मानित करेंगी। वहीं, बालक गांव के सरपंच प्रतिनिधि कृष्ण रेढू और युवा समाजसेवी एवं मास्टर विजेंद्र पंघालिया ने रीना भट्टी की इस उपलब्धि पर उन्हें शाबाशी देते हुए कहा कि उन्हें अपनी बेटियों पर गर्व है। सर्वजातीय भ्याण खाप के युवा प्रधान नरेश भ्याण ने कहा कि रीना भट्टी द्वारा जो गोल हासिल किया है वह भ्याण खाप के साथ-साथ प्रदेश के लिए गौरव की बात है।
विज्ञापन
पहले इस कारण आई थी दिक्कत
2021 में पहली बार गलत रूट अप, -25 से -35 डिग्री तापमान में बिना और भोजन के 20 घंटे की मशक्कत के बाद बेस कैंप लौटे।
2022 में केवल 2 पर्वतारोही अंतिम पर्वतमाला तक बचे रहे्, लेकिन हिमस्खलन के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा।
2023 में शिखर सम्मेलन से ठीक 150 मीटर पहले भारी हिमस्खलन, सौभाग्यशाली लोग जीवित बचे
2024 में उत्तम मौसम और उत्तम शिखर सम्मेलन। अंततः यह पूरा हो गया।