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सीएम के ननिहाल में राम भरोसे चल रही पढ़ाई
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सीएम के ननिहाल में राम भरोसे बच्चों की पढ़ाई
बालसमंद। बालसमंद क्षेत्र के गांव सीसवाला स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में स्टाफ का भारी टोटा है। स्टाफ की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है। जिले का गांव सीसवाला सूबे के मुख्यमंत्री मनोहर लाल का ननिहाल है।
जिले के गांव सीसवाला के ग्रामीण स्कूल अपग्रेड करवाने के लिए पिछले काफी वर्षों से मांग करते आ रहे थे। ग्रामीणों ने स्कूल अपग्रेड करवाने के लिए धरने प्रदर्शन भी किए लेकिन अब चुनाव से पूर्व वर्ष 2018 में सरकार ने नियमों में छूट देते हुए स्कूल को अपग्रेड तो कर दिया लेकिन स्कूल में शिक्षकों की भारी कमी है। स्कूल में ग्यारहवीं और बारहवीं के कुल 71 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे है। सीनियर विद्यार्थियों के लिए मात्र इंग्लिश का लेक्चरर रेगुलर है। मैथ, पॉलिटिकल साइंस, संस्कृत, हिंदी का कोई लेक्चरर नहीं है। फिजिकल एजूकेशन और ज्योग्राफी के लिए डाइट मात्रश्याम से वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, जो रेगुलर नहीं है। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित होती है। फिलहाल एक इंग्लिश के लेक्चरर के सहारे सीनियर सेकेंडरी स्कूल चल रहा है। अगर सरकार स्कूल में स्टाफ कमी को पूरा करे तो विद्यार्थियों कि संख्या में और इजाफा हो जाएगा।
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तीनों संकाय देकर दो हटाए
सरकार ने स्कूल अपग्रेडेशन के साथ ही स्कूल के लिए प्रिंसिपल का एक पद, टीजीटी के 11 पद और लैब अटेंडेंट के 3 पद मंजूर किये थे। स्कूल में आर्ट्स, कॉमर्स और विज्ञान संकाय तीनों संकाय शुरू किए गए थे। लेकिन कुछ समय बाद विभाग द्वारा कॉमर्स और साइंस संकाय हटा दी गई। अब केवल आर्ट्स के विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे है। ऐसे में स्कूली विद्यार्थी कैसे अपनी मंजिल को पा सकेंगे।
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ग्रामीणों ने 22 दिन की थी भूख हड़ताल
वर्ष 2016 से ग्रामीणों की स्कूल अपग्रेड की मांग ने जोर पकड़ लिया था। मई 2016 में ग्रामीणों ने दोनों स्कूलों के गेट को ताला लगाकर प्रदर्शन किया था। छात्राओं और ग्रामीणों ने लगातार 22 दिन तक भूख हड़ताल की थी। इसके अलावा ग्रामीणों ने क्षेत्र के आसपास के गांवों में भी रैली निकालकर प्रदर्शन किया था। अब स्कूल अपग्रेड होने के बाद स्कूल में स्टाफ सदस्यों की भारी कमी है।
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क्षेत्र का सबसे पुराना स्कूल
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सीसवाला की नींव 1952 में भजनलाल ने रखी थी। 1954 में पांचवीं का स्कूल बना और 1982 में दसवीं का स्कूल बना। स्कूल अपग्रेड की मांग ग्रामीणों की 14 वर्ष पुरानी मांग है। वर्ष 2018 में मनोहर सरकार ने स्कूल को बारहवीं कक्षा तक अपग्रेड किया।
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स्कूल सुरक्षा के लिए नहीं है चौकीदार
स्कूल में हजारों रुपये के कंप्यूटर सेट, लाइब्रेरी सहित अन्य सामान है। स्कूल की सुरक्षा के लिए दिन और रात के समय कोई भी चौकीदार नहीं है। रात की सुरक्षा के लिए कोई सुरक्षा कर्मी न होने के कारण कुछ दिन पहले कमरों के ताले भी तोड़े गए थे।
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वर्जन
स्कूल में स्टाफ सदस्यों की कमी के कारण बहुत परेशानी होती है। कॉमर्स और साइंस स्ट्रीम हमारे पास नहीं है। स्टाफ कमी के बारे में उच्च अधिकारियों को सूचना भेजी जा चुकी है।
- अनिल नेहरा, कार्यकारी प्राचार्य, रावमावि सीसवाला।
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बालसमंद। बालसमंद क्षेत्र के गांव सीसवाला स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में स्टाफ का भारी टोटा है। स्टाफ की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है। जिले का गांव सीसवाला सूबे के मुख्यमंत्री मनोहर लाल का ननिहाल है।
जिले के गांव सीसवाला के ग्रामीण स्कूल अपग्रेड करवाने के लिए पिछले काफी वर्षों से मांग करते आ रहे थे। ग्रामीणों ने स्कूल अपग्रेड करवाने के लिए धरने प्रदर्शन भी किए लेकिन अब चुनाव से पूर्व वर्ष 2018 में सरकार ने नियमों में छूट देते हुए स्कूल को अपग्रेड तो कर दिया लेकिन स्कूल में शिक्षकों की भारी कमी है। स्कूल में ग्यारहवीं और बारहवीं के कुल 71 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे है। सीनियर विद्यार्थियों के लिए मात्र इंग्लिश का लेक्चरर रेगुलर है। मैथ, पॉलिटिकल साइंस, संस्कृत, हिंदी का कोई लेक्चरर नहीं है। फिजिकल एजूकेशन और ज्योग्राफी के लिए डाइट मात्रश्याम से वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, जो रेगुलर नहीं है। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित होती है। फिलहाल एक इंग्लिश के लेक्चरर के सहारे सीनियर सेकेंडरी स्कूल चल रहा है। अगर सरकार स्कूल में स्टाफ कमी को पूरा करे तो विद्यार्थियों कि संख्या में और इजाफा हो जाएगा।
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तीनों संकाय देकर दो हटाए
सरकार ने स्कूल अपग्रेडेशन के साथ ही स्कूल के लिए प्रिंसिपल का एक पद, टीजीटी के 11 पद और लैब अटेंडेंट के 3 पद मंजूर किये थे। स्कूल में आर्ट्स, कॉमर्स और विज्ञान संकाय तीनों संकाय शुरू किए गए थे। लेकिन कुछ समय बाद विभाग द्वारा कॉमर्स और साइंस संकाय हटा दी गई। अब केवल आर्ट्स के विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे है। ऐसे में स्कूली विद्यार्थी कैसे अपनी मंजिल को पा सकेंगे।
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ग्रामीणों ने 22 दिन की थी भूख हड़ताल
वर्ष 2016 से ग्रामीणों की स्कूल अपग्रेड की मांग ने जोर पकड़ लिया था। मई 2016 में ग्रामीणों ने दोनों स्कूलों के गेट को ताला लगाकर प्रदर्शन किया था। छात्राओं और ग्रामीणों ने लगातार 22 दिन तक भूख हड़ताल की थी। इसके अलावा ग्रामीणों ने क्षेत्र के आसपास के गांवों में भी रैली निकालकर प्रदर्शन किया था। अब स्कूल अपग्रेड होने के बाद स्कूल में स्टाफ सदस्यों की भारी कमी है।
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क्षेत्र का सबसे पुराना स्कूल
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सीसवाला की नींव 1952 में भजनलाल ने रखी थी। 1954 में पांचवीं का स्कूल बना और 1982 में दसवीं का स्कूल बना। स्कूल अपग्रेड की मांग ग्रामीणों की 14 वर्ष पुरानी मांग है। वर्ष 2018 में मनोहर सरकार ने स्कूल को बारहवीं कक्षा तक अपग्रेड किया।
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स्कूल सुरक्षा के लिए नहीं है चौकीदार
स्कूल में हजारों रुपये के कंप्यूटर सेट, लाइब्रेरी सहित अन्य सामान है। स्कूल की सुरक्षा के लिए दिन और रात के समय कोई भी चौकीदार नहीं है। रात की सुरक्षा के लिए कोई सुरक्षा कर्मी न होने के कारण कुछ दिन पहले कमरों के ताले भी तोड़े गए थे।
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वर्जन
स्कूल में स्टाफ सदस्यों की कमी के कारण बहुत परेशानी होती है। कॉमर्स और साइंस स्ट्रीम हमारे पास नहीं है। स्टाफ कमी के बारे में उच्च अधिकारियों को सूचना भेजी जा चुकी है।
- अनिल नेहरा, कार्यकारी प्राचार्य, रावमावि सीसवाला।
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