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Hisar News: रक्तवीर...रक्त की बूंदों से लिखी सेवा की गाथा, दूसरों के लिए बने प्रेरणा
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अनिल और प्रोमिला।
संजय वर्मा
भिवानी। रक्तदान के माध्यम से जनसेवा की ऐसी लकीर खिंची कि कई लोग आज दूसरों के लिए प्रेरणा बन गए हैं। सेवानिवृत्त हेडमास्टर बसंत लाल गिरधर से प्रेरणा लेकर विकास राठी जैसे युवा नियमित रक्तदाता बन गए हैं। वहीं, दंपती अनिल और प्रोमिला ने भी रक्तदान का ऐसा संकल्प लिया है कि अब वे कोई भी अवसर नहीं छोड़ते।
भिवानी जिले में कई सामाजिक संस्थाएं सक्रिय रूप से थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों, सड़क हादसों में घायलों, और गर्भवती महिलाओं के लिए रक्त जुटाने का नेक कार्य कर रही हैं। इन संस्थाओं से जुड़े अनेक समर्पित रक्तदाता समय पर मदद पहुंचाकर जीवन रक्षक भूमिका निभा रहे हैं। इन प्रेरणादायक लोगों की बदौलत रक्तदान का यह कारवां निरंतर बढ़ रहा है और समाज में एक सकारात्मक बदलाव ला रहा है। संवाद
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दुर्लभ रक्त समूह वाले विकास राठी बने जरूरतमंदों के जीवनदाता
फोटो: 12
गांव सीसर खास निवासी विकास राठी, जो वर्तमान में भिवानी में पटवारी कार्यरत हैं। उनका रक्त समूह एबी नेगेटिव है, जो कि अत्यंत दुर्लभ होता है। विकास को इस रक्त समूह की महत्ता का एहसास तब हुआ जब उन्हें एक दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की जान बचाने के लिए रोहतक पीजीआई जाकर रक्तदान करना पड़ा। इस अनुभव के बाद उनका संपर्क बसंत लाल गिरधर से हुआ, जो रिटायर्ड मुख्य अध्यापक और जन सेवा समिति महम के प्रमुख सदस्य हैं। बसंत लाल स्वयं भी रक्तदान में रिकॉर्ड बना चुके हैं। विकास राठी अब तक 30 बार रक्तदान कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें रक्तदान की प्रेरणा अपनी माता, सेवानिवृत्त मुख्य अध्यापिका कृष्णा देवी से मिली, जो स्वयं समाजसेवा से जुड़ी रही हैं। विकास अब तक गर्भवती महिलाओं और सड़क हादसों में घायल लोगों के लिए कई बार रक्तदान कर चुके हैं। उनसे प्रेरणा लेकर ''''पटवारी एवं कानूनगो संगठन'''' के कई अन्य सदस्यों ने भी रक्तदान के इस यज्ञ में सहभागी बनकर नियमित रक्तदान का संकल्प लिया है।
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रक्तदान में मिसाल, अनिल और प्रोमिला की प्रेरणादायक जोड़ी
फोटो: 11
हिसार जिला कारागार में बतौर लेखाकार तैनात भिवानी निवासी अनिल और उनकी डीपीई (फिजिकल एजुकेशन शिक्षक) पत्नी प्रोमिला की जोड़ी ने रक्तदान में अपनी छाप छोड़ी है। प्रोमिला अब तक आठ बार रक्तदान कर चुकी हैं, जबकि उनके पति अनिल ने चार बार रक्तदान किया है। प्रोमिला न केवल स्वयं रक्तदान करती हैं, बल्कि स्कूल व आसपास के क्षेत्र में लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करती हैं। अनिल भी अपनी पत्नी के इस संकल्प में सहभागिता निभाते हुए नियमित रूप से रक्तदान कर रहे हैं।
प्रोमिला ने बताया कि उनका रक्त समूह बी पॉजिटिव है, जबकि अनिल का रक्त समूह ओ पॉजिटिव है। रक्तदान का कोई भी अवसर आता है, तो दंपती उसमें भाग लेने से पीछे नहीं हटता। जब वे दोनों एक साथ रक्तदान करते हैं, तो अन्य लोग उनसे प्रेरित होकर आगे आते हैं। उनकी इस सामाजिक सेवा के लिए कई संगठनों द्वारा उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है।
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भिवानी। रक्तदान के माध्यम से जनसेवा की ऐसी लकीर खिंची कि कई लोग आज दूसरों के लिए प्रेरणा बन गए हैं। सेवानिवृत्त हेडमास्टर बसंत लाल गिरधर से प्रेरणा लेकर विकास राठी जैसे युवा नियमित रक्तदाता बन गए हैं। वहीं, दंपती अनिल और प्रोमिला ने भी रक्तदान का ऐसा संकल्प लिया है कि अब वे कोई भी अवसर नहीं छोड़ते।
भिवानी जिले में कई सामाजिक संस्थाएं सक्रिय रूप से थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों, सड़क हादसों में घायलों, और गर्भवती महिलाओं के लिए रक्त जुटाने का नेक कार्य कर रही हैं। इन संस्थाओं से जुड़े अनेक समर्पित रक्तदाता समय पर मदद पहुंचाकर जीवन रक्षक भूमिका निभा रहे हैं। इन प्रेरणादायक लोगों की बदौलत रक्तदान का यह कारवां निरंतर बढ़ रहा है और समाज में एक सकारात्मक बदलाव ला रहा है। संवाद
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दुर्लभ रक्त समूह वाले विकास राठी बने जरूरतमंदों के जीवनदाता
फोटो: 12
गांव सीसर खास निवासी विकास राठी, जो वर्तमान में भिवानी में पटवारी कार्यरत हैं। उनका रक्त समूह एबी नेगेटिव है, जो कि अत्यंत दुर्लभ होता है। विकास को इस रक्त समूह की महत्ता का एहसास तब हुआ जब उन्हें एक दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की जान बचाने के लिए रोहतक पीजीआई जाकर रक्तदान करना पड़ा। इस अनुभव के बाद उनका संपर्क बसंत लाल गिरधर से हुआ, जो रिटायर्ड मुख्य अध्यापक और जन सेवा समिति महम के प्रमुख सदस्य हैं। बसंत लाल स्वयं भी रक्तदान में रिकॉर्ड बना चुके हैं। विकास राठी अब तक 30 बार रक्तदान कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें रक्तदान की प्रेरणा अपनी माता, सेवानिवृत्त मुख्य अध्यापिका कृष्णा देवी से मिली, जो स्वयं समाजसेवा से जुड़ी रही हैं। विकास अब तक गर्भवती महिलाओं और सड़क हादसों में घायल लोगों के लिए कई बार रक्तदान कर चुके हैं। उनसे प्रेरणा लेकर ''''पटवारी एवं कानूनगो संगठन'''' के कई अन्य सदस्यों ने भी रक्तदान के इस यज्ञ में सहभागी बनकर नियमित रक्तदान का संकल्प लिया है।
रक्तदान में मिसाल, अनिल और प्रोमिला की प्रेरणादायक जोड़ी
फोटो: 11
हिसार जिला कारागार में बतौर लेखाकार तैनात भिवानी निवासी अनिल और उनकी डीपीई (फिजिकल एजुकेशन शिक्षक) पत्नी प्रोमिला की जोड़ी ने रक्तदान में अपनी छाप छोड़ी है। प्रोमिला अब तक आठ बार रक्तदान कर चुकी हैं, जबकि उनके पति अनिल ने चार बार रक्तदान किया है। प्रोमिला न केवल स्वयं रक्तदान करती हैं, बल्कि स्कूल व आसपास के क्षेत्र में लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करती हैं। अनिल भी अपनी पत्नी के इस संकल्प में सहभागिता निभाते हुए नियमित रूप से रक्तदान कर रहे हैं।
प्रोमिला ने बताया कि उनका रक्त समूह बी पॉजिटिव है, जबकि अनिल का रक्त समूह ओ पॉजिटिव है। रक्तदान का कोई भी अवसर आता है, तो दंपती उसमें भाग लेने से पीछे नहीं हटता। जब वे दोनों एक साथ रक्तदान करते हैं, तो अन्य लोग उनसे प्रेरित होकर आगे आते हैं। उनकी इस सामाजिक सेवा के लिए कई संगठनों द्वारा उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है।