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Hisar News: पूर्व कुलपति नरसी राम बिश्नोई की विजिलेंस क्लीयरेंस पर उठे सवाल
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हिसार। गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जीजेयू) के पूर्व कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई की महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर (राजस्थान) में कुलपति पद पर नियुक्ति के बाद उनकी विजिलेंस क्लीयरेंस को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
हिसार निवासी डॉ. संदीप कुमार गुप्ता ने हरियाणा के राज्यपाल एवं जीजेयू के कुलाधिपति को लिखित शिकायत भेजकर मांग की है कि लंबित जांचों की स्थिति स्पष्ट होने तक प्रो. बिश्नोई को विजिलेंस क्लीयरेंस, अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) अथवा नो ड्यूज प्रमाणपत्र जारी न किया जाए।
शिकायत के अनुसार, राजस्थान के राज्यपाल की ओर से 24 सितंबर 2026 को जारी नियुक्ति आदेश में प्रो. बिश्नोई की नियुक्ति सक्षम प्राधिकारी से विजिलेंस अनापत्ति प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने की शर्त के अधीन रखी गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि ऐसे में प्रमाणपत्र जारी करने से पहले हरियाणा सरकार और जीजेयू को सभी लंबित जांचों तथा संबंधित अभिलेखों की निष्पक्ष समीक्षा करनी चाहिए।
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दो विजिलेंस जांच रिपोर्ट का हवाला
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि जीजेयू में प्रोफेसर के कार्यकाल से संबंधित प्रो. नरसी राम बिश्नोई के मामले में दो विजिलेंस जांच रिपोर्ट पहले से रिकॉर्ड में उपलब्ध हैं। उनके अनुसार इन रिपोर्टों में प्रतिकूल निष्कर्ष और टिप्पणियां दर्ज हैं। शिकायत में मांग की गई है कि दोनों रिपोर्टों, उन पर की गई कार्रवाई और उनकी मौजूदा स्थिति का परीक्षण करने के बाद ही विजिलेंस क्लीयरेंस जारी करने पर निर्णय लिया जाए।
लोकायुक्त में लंबित है शिकायत
शिकायत में हरियाणा लोकायुक्त के समक्ष लंबित शिकायत संख्या 504/2025 का भी उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार, लोकायुक्त के 25 अगस्त 2026 के आदेश में बताया गया था कि तकनीकी शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक ने 7 अगस्त को जवाब प्रस्तुत किया था लेकिन महानिदेशक, तकनीकी शिक्षा की रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई थी। इस पर लोकायुक्त ने संबंधित विभाग को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 30 दिन का अतिरिक्त समय दिया था। मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर 2026 को निर्धारित है। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि जब लोकायुक्त के समक्ष मामला लंबित है और विभागीय रिपोर्ट का इंतजार है, तो सभी तथ्यों की समीक्षा किए बिना विजिलेंस क्लीयरेंस जारी करना कितना उचित होगा। शिकायत की प्रतियां हरियाणा सरकार के उच्च शिक्षा विभाग, तकनीकी शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्री तथा जीजेयू के कुलपति और कुलसचिव को भी भेजी गई हैं।
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हिसार निवासी डॉ. संदीप कुमार गुप्ता ने हरियाणा के राज्यपाल एवं जीजेयू के कुलाधिपति को लिखित शिकायत भेजकर मांग की है कि लंबित जांचों की स्थिति स्पष्ट होने तक प्रो. बिश्नोई को विजिलेंस क्लीयरेंस, अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) अथवा नो ड्यूज प्रमाणपत्र जारी न किया जाए।
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शिकायत के अनुसार, राजस्थान के राज्यपाल की ओर से 24 सितंबर 2026 को जारी नियुक्ति आदेश में प्रो. बिश्नोई की नियुक्ति सक्षम प्राधिकारी से विजिलेंस अनापत्ति प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने की शर्त के अधीन रखी गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि ऐसे में प्रमाणपत्र जारी करने से पहले हरियाणा सरकार और जीजेयू को सभी लंबित जांचों तथा संबंधित अभिलेखों की निष्पक्ष समीक्षा करनी चाहिए।
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दो विजिलेंस जांच रिपोर्ट का हवाला
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि जीजेयू में प्रोफेसर के कार्यकाल से संबंधित प्रो. नरसी राम बिश्नोई के मामले में दो विजिलेंस जांच रिपोर्ट पहले से रिकॉर्ड में उपलब्ध हैं। उनके अनुसार इन रिपोर्टों में प्रतिकूल निष्कर्ष और टिप्पणियां दर्ज हैं। शिकायत में मांग की गई है कि दोनों रिपोर्टों, उन पर की गई कार्रवाई और उनकी मौजूदा स्थिति का परीक्षण करने के बाद ही विजिलेंस क्लीयरेंस जारी करने पर निर्णय लिया जाए।
लोकायुक्त में लंबित है शिकायत
शिकायत में हरियाणा लोकायुक्त के समक्ष लंबित शिकायत संख्या 504/2025 का भी उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार, लोकायुक्त के 25 अगस्त 2026 के आदेश में बताया गया था कि तकनीकी शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक ने 7 अगस्त को जवाब प्रस्तुत किया था लेकिन महानिदेशक, तकनीकी शिक्षा की रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई थी। इस पर लोकायुक्त ने संबंधित विभाग को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 30 दिन का अतिरिक्त समय दिया था। मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर 2026 को निर्धारित है। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि जब लोकायुक्त के समक्ष मामला लंबित है और विभागीय रिपोर्ट का इंतजार है, तो सभी तथ्यों की समीक्षा किए बिना विजिलेंस क्लीयरेंस जारी करना कितना उचित होगा। शिकायत की प्रतियां हरियाणा सरकार के उच्च शिक्षा विभाग, तकनीकी शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्री तथा जीजेयू के कुलपति और कुलसचिव को भी भेजी गई हैं।