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Hisar News: फर्जी रसीदों से गबन, 10 साल के बाद निगम कर्मचारी बर्खास्त
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हिसार। नगर निगम में प्रॉपर्टी टैक्स की फर्जी रसीदें छपवाकर लाखों रुपये की वित्तीय अनियमितता और गबन करने के आरोपी ग्रुप-डी कर्मचारी विकास शर्मा को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। निगम आयुक्त सी जयाश्रद्धा ने तत्कालीन उप निगम आयुक्त (डीएमसी) वीरेंद्र सहारण की जांच रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की है।
कर्मचारी को पहले निलंबित किया गया था। बर्खास्तगी से पहले निगम प्रशासन ने उसे अपना पक्ष रखने के लिए दो बार व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया। इसके बाद अंतिम अवसर भी दिया गया लेकिन वह तीनों बार पेश नहीं हुआ।
इसके बाद आयुक्त ने उसकी बर्खास्तगी के आदेश जारी कर दिए। सेवा नियमों के तहत विकास शर्मा इस फैसले के खिलाफ 45 दिनों के भीतर नगर निकाय विभाग के निदेशालय में अपील कर सकता है।
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यह था पूरा मामला
अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2015-16 में विकास शर्मा ने असली जी-8 रसीद बुक जमा कराने के बजाय फर्जी रसीद बुक छपवा ली थी। वह प्रॉपर्टी टैक्स और अन्य शुल्क जमा कराने आने वाले शहरवासियों से पैसे लेकर उन्हें निगम की आधिकारिक रसीद देने के बजाय खुद छपवाई गई रसीद थमा देता था। इसके बाद प्रॉपर्टीधारकों से वसूली गई राशि सरकारी खजाने में जमा नहीं कराता था। गबन का खुलासा तब हुआ जब निगम के रिकॉर्ड में एक ही नंबर की दो-दो जी-8 रसीदें सामने आईं। शुल्क भुगतान का मिलान करने पर अनियमितता पकड़ में आई। शुरुआती जांच में 35 हजार रुपये से अधिक के गबन की पुष्टि हुई थी। हालांकि, कुल गबन की सटीक राशि निर्धारित नहीं हो सकी, क्योंकि आरोपी ने असली जी-8 रसीद बुक गायब कर दी थी। जमा कराई गई फर्जी रसीदों से भी रसीद नंबर हटा दिए गए थे।
2021 से चल रही थी जांच, एएमसी ने सौंपी थी रिपोर्ट
इस मामले का खुलासा आरटीआई कार्यकर्ता तिलक राज की शिकायत के बाद हुआ था। शिकायत तत्कालीन मेयर गौतम सरदाना के माध्यम से तत्कालीन स्थानीय निकाय मंत्री अनिल विज तक पहुंची। मंत्री के निर्देश पर जनवरी 2021 में तत्कालीन उप निगम आयुक्त वीरेंद्र सहारण ने जांच शुरू की थी। जांच में विकास शर्मा पर लगे आरोप सही पाए गए थे। अब जांच शुरू होने के करीब पांच साल बाद कर्मचारी को नौकरी से बर्खास्त किया गया है।
ग्रुप-डी कर्मचारी विकास को आयुक्त की ओर से नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। इस मामले की जांच तत्कालीन डीएमसी वीरेंद्र सहारण ने की थी। जांच में कर्मचारी पर लगे आरोपों की पुष्टि हुई थी।
- डॉ. प्रदीप हुड्डा, अतिरिक्त निगम आयुक्त।
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कर्मचारी को पहले निलंबित किया गया था। बर्खास्तगी से पहले निगम प्रशासन ने उसे अपना पक्ष रखने के लिए दो बार व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया। इसके बाद अंतिम अवसर भी दिया गया लेकिन वह तीनों बार पेश नहीं हुआ।
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इसके बाद आयुक्त ने उसकी बर्खास्तगी के आदेश जारी कर दिए। सेवा नियमों के तहत विकास शर्मा इस फैसले के खिलाफ 45 दिनों के भीतर नगर निकाय विभाग के निदेशालय में अपील कर सकता है।
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यह था पूरा मामला
अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2015-16 में विकास शर्मा ने असली जी-8 रसीद बुक जमा कराने के बजाय फर्जी रसीद बुक छपवा ली थी। वह प्रॉपर्टी टैक्स और अन्य शुल्क जमा कराने आने वाले शहरवासियों से पैसे लेकर उन्हें निगम की आधिकारिक रसीद देने के बजाय खुद छपवाई गई रसीद थमा देता था। इसके बाद प्रॉपर्टीधारकों से वसूली गई राशि सरकारी खजाने में जमा नहीं कराता था। गबन का खुलासा तब हुआ जब निगम के रिकॉर्ड में एक ही नंबर की दो-दो जी-8 रसीदें सामने आईं। शुल्क भुगतान का मिलान करने पर अनियमितता पकड़ में आई। शुरुआती जांच में 35 हजार रुपये से अधिक के गबन की पुष्टि हुई थी। हालांकि, कुल गबन की सटीक राशि निर्धारित नहीं हो सकी, क्योंकि आरोपी ने असली जी-8 रसीद बुक गायब कर दी थी। जमा कराई गई फर्जी रसीदों से भी रसीद नंबर हटा दिए गए थे।
2021 से चल रही थी जांच, एएमसी ने सौंपी थी रिपोर्ट
इस मामले का खुलासा आरटीआई कार्यकर्ता तिलक राज की शिकायत के बाद हुआ था। शिकायत तत्कालीन मेयर गौतम सरदाना के माध्यम से तत्कालीन स्थानीय निकाय मंत्री अनिल विज तक पहुंची। मंत्री के निर्देश पर जनवरी 2021 में तत्कालीन उप निगम आयुक्त वीरेंद्र सहारण ने जांच शुरू की थी। जांच में विकास शर्मा पर लगे आरोप सही पाए गए थे। अब जांच शुरू होने के करीब पांच साल बाद कर्मचारी को नौकरी से बर्खास्त किया गया है।
ग्रुप-डी कर्मचारी विकास को आयुक्त की ओर से नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। इस मामले की जांच तत्कालीन डीएमसी वीरेंद्र सहारण ने की थी। जांच में कर्मचारी पर लगे आरोपों की पुष्टि हुई थी।
- डॉ. प्रदीप हुड्डा, अतिरिक्त निगम आयुक्त।