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Hisar News: असम में भी लहराएगा एचएयू के हिसार प्याज-3 का परचम
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कुलपति प्रो. बी.आर. काम्बोज के साथ कंपनी प्रतिनिधि व अधिकारी।
हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) के वैज्ञानिकों की ओर से विकसित प्याज की उन्नत किस्म हिसार प्याज-3 अब असम में भी किसानों को बेहतर उत्पादन देने में मदद करेगी। इस किस्म के लिए विश्वविद्यालय ने असम की निजी क्षेत्र की कंपनी मैजेस्टिक इम्पेक्स, गुवाहाटी के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह किस्म 130 से 140 दिन में तैयार होकर प्रति एकड़ लगभग 125 क्विंटल तक पैदावार देने में सक्षम है। इसमें गुलाबी दाग, प्याज का पीलिया (ड्वार्फ) विषाणु रोग और चूरडा कीट का प्रकोप भी बेहद कम होता है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने बताया कि एचएयू के वैज्ञानिक लगातार विभिन्न फसलों की उन्नत किस्में विकसित कर रहे हैं। विश्वविद्यालय की किस्में देशभर में किसानों के बीच अपनी पहचान बना रही हैं। किसानों को विश्वसनीय किस्मों का बीज उपलब्ध कराने से प्रदेश और देश के खाद्य उत्पादन में वृद्धि हो सकती है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आएगा।
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अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने बताया कि हिसार प्याज-3 के कंद तांबे जैसे चमकीले भूरे-लाल रंग के और गोलाकार होते हैं। इनमें तीखापन कम होने के बावजूद भंडारण क्षमता अधिक है। प्याज में कुल घुलनशील तत्वों की मात्रा 14 प्रतिशत है। इस किस्म की खड़ी फसल में फूल वाले डंठल निकलने और भंडारण के दौरान अंकुरण की समस्या भी बहुत कम होती है।
इसमें गुलाबी दाग, प्याज का पीलिया (ड्वार्फ) विषाणु रोग और चूरडा कीट का प्रकोप अत्यंत कम पाया जाता है। इस अवसर पर ओएसडी डॉ. अतुल ढींगड़ा, मानव संसाधन प्रबंधन निदेशक डॉ. नरेश कौशिक, कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. रमेश गोयल, डॉ. एसके पाहुजा, डॉ. एसके तेहलान और मीडिया एडवाइजर डॉ. संदीप आर्य सहित अन्य उपस्थित रहे।
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यह किस्म 130 से 140 दिन में तैयार होकर प्रति एकड़ लगभग 125 क्विंटल तक पैदावार देने में सक्षम है। इसमें गुलाबी दाग, प्याज का पीलिया (ड्वार्फ) विषाणु रोग और चूरडा कीट का प्रकोप भी बेहद कम होता है।
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विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने बताया कि एचएयू के वैज्ञानिक लगातार विभिन्न फसलों की उन्नत किस्में विकसित कर रहे हैं। विश्वविद्यालय की किस्में देशभर में किसानों के बीच अपनी पहचान बना रही हैं। किसानों को विश्वसनीय किस्मों का बीज उपलब्ध कराने से प्रदेश और देश के खाद्य उत्पादन में वृद्धि हो सकती है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आएगा।
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अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने बताया कि हिसार प्याज-3 के कंद तांबे जैसे चमकीले भूरे-लाल रंग के और गोलाकार होते हैं। इनमें तीखापन कम होने के बावजूद भंडारण क्षमता अधिक है। प्याज में कुल घुलनशील तत्वों की मात्रा 14 प्रतिशत है। इस किस्म की खड़ी फसल में फूल वाले डंठल निकलने और भंडारण के दौरान अंकुरण की समस्या भी बहुत कम होती है।
इसमें गुलाबी दाग, प्याज का पीलिया (ड्वार्फ) विषाणु रोग और चूरडा कीट का प्रकोप अत्यंत कम पाया जाता है। इस अवसर पर ओएसडी डॉ. अतुल ढींगड़ा, मानव संसाधन प्रबंधन निदेशक डॉ. नरेश कौशिक, कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. रमेश गोयल, डॉ. एसके पाहुजा, डॉ. एसके तेहलान और मीडिया एडवाइजर डॉ. संदीप आर्य सहित अन्य उपस्थित रहे।