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Hisar News: जनस्वास्थ्य विभाग के ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात कर्मचारियों को आधुनिक तकनीकों से करवाया जा रहा रूबरू
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हिसार। जनस्वास्थ्य विभाग के ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात कर्मचारियों को आधुनिक उपकरण व तकनीकों से अवगत कराया जाएगा। इसे लेकर कर्मचारियों को औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान की तरफ से यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत पहला बैच का प्रशिक्षण शुरू हो गया है। इस बैच में 30 कर्मचारियों को शामिल किया गया है।
अधिकारियों के मुताबिक केंद्र सरकार के नल जल मित्र अभियान के तहत कर्मचारियों को यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण का मकसद ग्रामीण क्षेत्र में प्रशिक्षित प्लंबर तैयार करना है। आमतौर पर ग्रामीण एरिया में प्रशिक्षित प्लंबर उपलब्ध न होने पर उपभोक्ता खुद ही पेयजल कनेक्शन कर लेता है। चूंकि वह प्रशिक्षित नहीं है तो सही ढंग से कनेक्शन भी कर पाता। उसकी गलती का खामियाजा अन्य उपभोक्ताओं को दूषित पेयजल के रूप में उठाना पड़ता है।
510 घंटे का दिया जाएगा प्रशिक्षण
इसके तहत इन कर्मचारियाें को कुल 510 घंटे का प्रशिक्षण दिया जाएगा। अधिकारियों की मानें तो 24 मई को इन कर्मचारियों का प्रशिक्षण पूरा हो जाएगा। इस दौरान इन्हें नए उपकरणों व नई तकनीकों की जानकारी दी जाएगी।
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विभाग के जल संसाधनों की हो रही जिओ टैगिंग
इसके अलावा विभाग के सभी जल संसाधनों की जिओ टैगिंग का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए सभी जेई की ड्यूटी लगाई गई है। जिन संसाधनों की जिओ टैगिंग की जा रही है, उसमें जलघर, बूस्टिंग स्टेशन, डिस्पोजल आदि शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक जल संसाधनों की जिओ टैगिंग होने से इन्हें कहीं से भी देखा जा सकेगा। इससे योजनाएं बनाने में भी मदद मिलेगी।
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कर्मचारियों का प्रशिक्षण शुरू हो गया है। इस प्रशिक्षण के बाद ये कर्मचारी प्लंबिंग के कार्य में निपुण हो जाएंगे।
विनोद कुमार, जिला सलाहकार, डब्ल्यूएसएसओ
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अधिकारियों के मुताबिक केंद्र सरकार के नल जल मित्र अभियान के तहत कर्मचारियों को यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण का मकसद ग्रामीण क्षेत्र में प्रशिक्षित प्लंबर तैयार करना है। आमतौर पर ग्रामीण एरिया में प्रशिक्षित प्लंबर उपलब्ध न होने पर उपभोक्ता खुद ही पेयजल कनेक्शन कर लेता है। चूंकि वह प्रशिक्षित नहीं है तो सही ढंग से कनेक्शन भी कर पाता। उसकी गलती का खामियाजा अन्य उपभोक्ताओं को दूषित पेयजल के रूप में उठाना पड़ता है।
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510 घंटे का दिया जाएगा प्रशिक्षण
इसके तहत इन कर्मचारियाें को कुल 510 घंटे का प्रशिक्षण दिया जाएगा। अधिकारियों की मानें तो 24 मई को इन कर्मचारियों का प्रशिक्षण पूरा हो जाएगा। इस दौरान इन्हें नए उपकरणों व नई तकनीकों की जानकारी दी जाएगी।
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विभाग के जल संसाधनों की हो रही जिओ टैगिंग
इसके अलावा विभाग के सभी जल संसाधनों की जिओ टैगिंग का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए सभी जेई की ड्यूटी लगाई गई है। जिन संसाधनों की जिओ टैगिंग की जा रही है, उसमें जलघर, बूस्टिंग स्टेशन, डिस्पोजल आदि शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक जल संसाधनों की जिओ टैगिंग होने से इन्हें कहीं से भी देखा जा सकेगा। इससे योजनाएं बनाने में भी मदद मिलेगी।
कर्मचारियों का प्रशिक्षण शुरू हो गया है। इस प्रशिक्षण के बाद ये कर्मचारी प्लंबिंग के कार्य में निपुण हो जाएंगे।
विनोद कुमार, जिला सलाहकार, डब्ल्यूएसएसओ