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विरोध प्रदर्शन : ट्रैक्टर को बैलों वाले जुआ में जोत कर डीसी ऑफिस तक खींचा
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हिसार। वामपंथी पार्टियों के राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, किसान सभा व अन्य जनसंगठनों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों और बढ़ती महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन कर राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। ट्रैक्टर को बैलों वाले जुआ में जोत कर किसानों ने डीसी ऑफिस तक ट्रैक्टर खींचते हुए मार्च किया। प्रदर्शन की अध्यक्षता शकुंतला जाखड़ और एमएल सहगल ने की।
शुक्रवार सुबह जनसंगठनों के कार्यकर्ता एचएयू 4 नंबर गेट के सामने पार्क में इकट्ठा हुए। वहां से ट्रैक्टर को बैलों वाले जुआ में जोत कर किसानों ने डीसी ऑफिस तक ट्रैक्टर खींचते हुए मार्च किया। इन तीन ट्रैक्टरों का डीसी ऑफिस तक मार्च करके ले जाना पेट्रोल डीजल की बढ़ती हुई कीमतों के सिंबल के तौर पर प्रदर्शित किया गया। धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि भारत के इतिहास में मोदी सरकार जैसी क्रूर सरकार कभी नहीं रही। बेरोजगारी की भारी समस्या के साथ अर्थव्यवस्था पहले से ही मंदी में है। पहले लॉकडाउन में 12 करोड़ से ज्यादा कामगारों की नौकरी चली गई थी। अप्रैल और मई के महीनों में 2.2 करोड़ लोगों की नौकरी चली गई। मई में बेरोजगारी दर 12 फीसदी के उच्च स्तर पर पहुंच गई। जो एक साल में सबसे ज्यादा है। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में बेरोजगारी बढ़ी है। ऐसे समय में सरकार ने डीजल और पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी करने की नीति से संचालित आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ा कर लोगों को लूटने का विकल्प चुना है। जनवरी 2021 के बाद से, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 54 बार बढ़ोतरी की गई। मार्च-अप्रैल के विधानसभा चुनाव के दौरान चार बार कुछ पैसे घटाए गए। परिवहन लागत में 10-15 प्रतिशत की अनुमानित बढ़ोतरी की वजह से कीमतों में वृद्धि हुई है। मई 2021 में थोक मूल्य सूचकांक में लगभग 13 प्रतिशत (12.94) की वृद्धि हुई है, जो 11 वर्षों में सबसे अधिक है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 6.3 फीसदी चढ़ा है। चावल, खाद्य तेल, दालें, नमक, सब्जियां, अंडे, मांस और मछली जैसे आवश्यक खाद्य पदार्थों की कीमतें आसमान छू रही हैं। उदाहरण के लिए, उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, खाद्य तेल की कीमतें 60 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं।
प्रदर्शन के बाद जिला प्रशासन के माध्यम से 9 सूत्रीय मांग पत्र राष्ट्रपति को भेजा गया। इस अवसर पर दिनेश सिवाच, शमशेर नंबरदार, सूबे बुरा, चंदगीराम, मुकेश दुर्जनपुर, नरेश गोयल, रामेश्वर दास, प्रताप सिंह, सतबीर जाखोड़, प्रोफेसर अतर सिंह, हनुमान जौहर, कृष्ण गावड़, सुनील गोरखपुर, कृष्ण सावंत, मनोज सोनी, बबली लांबा, अंजू क्रांति, हनुमान सिंह, रणधीर सिंह अमन सोनी, लीलू राम जांगड़ा प्रमुख तौर पर शामिल रहे।
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शुक्रवार सुबह जनसंगठनों के कार्यकर्ता एचएयू 4 नंबर गेट के सामने पार्क में इकट्ठा हुए। वहां से ट्रैक्टर को बैलों वाले जुआ में जोत कर किसानों ने डीसी ऑफिस तक ट्रैक्टर खींचते हुए मार्च किया। इन तीन ट्रैक्टरों का डीसी ऑफिस तक मार्च करके ले जाना पेट्रोल डीजल की बढ़ती हुई कीमतों के सिंबल के तौर पर प्रदर्शित किया गया। धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि भारत के इतिहास में मोदी सरकार जैसी क्रूर सरकार कभी नहीं रही। बेरोजगारी की भारी समस्या के साथ अर्थव्यवस्था पहले से ही मंदी में है। पहले लॉकडाउन में 12 करोड़ से ज्यादा कामगारों की नौकरी चली गई थी। अप्रैल और मई के महीनों में 2.2 करोड़ लोगों की नौकरी चली गई। मई में बेरोजगारी दर 12 फीसदी के उच्च स्तर पर पहुंच गई। जो एक साल में सबसे ज्यादा है। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में बेरोजगारी बढ़ी है। ऐसे समय में सरकार ने डीजल और पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी करने की नीति से संचालित आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ा कर लोगों को लूटने का विकल्प चुना है। जनवरी 2021 के बाद से, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 54 बार बढ़ोतरी की गई। मार्च-अप्रैल के विधानसभा चुनाव के दौरान चार बार कुछ पैसे घटाए गए। परिवहन लागत में 10-15 प्रतिशत की अनुमानित बढ़ोतरी की वजह से कीमतों में वृद्धि हुई है। मई 2021 में थोक मूल्य सूचकांक में लगभग 13 प्रतिशत (12.94) की वृद्धि हुई है, जो 11 वर्षों में सबसे अधिक है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 6.3 फीसदी चढ़ा है। चावल, खाद्य तेल, दालें, नमक, सब्जियां, अंडे, मांस और मछली जैसे आवश्यक खाद्य पदार्थों की कीमतें आसमान छू रही हैं। उदाहरण के लिए, उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, खाद्य तेल की कीमतें 60 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं।
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प्रदर्शन के बाद जिला प्रशासन के माध्यम से 9 सूत्रीय मांग पत्र राष्ट्रपति को भेजा गया। इस अवसर पर दिनेश सिवाच, शमशेर नंबरदार, सूबे बुरा, चंदगीराम, मुकेश दुर्जनपुर, नरेश गोयल, रामेश्वर दास, प्रताप सिंह, सतबीर जाखोड़, प्रोफेसर अतर सिंह, हनुमान जौहर, कृष्ण गावड़, सुनील गोरखपुर, कृष्ण सावंत, मनोज सोनी, बबली लांबा, अंजू क्रांति, हनुमान सिंह, रणधीर सिंह अमन सोनी, लीलू राम जांगड़ा प्रमुख तौर पर शामिल रहे।
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