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एचएयू में धरने के तीसरे दिन कॉलेज को जड़ा ताला, किसी की नहीं सुनी
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
Updated Fri, 10 Feb 2017 12:44 AM IST
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- फोटो : bureau
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एचएयू में तीसरे दिन विद्यार्थियों में और अधिक आक्रोश दिखा। गुस्साए विद्यार्थियों ने वीरवार को एग्रीकल्चर कॉलेज को ताला जड़ दिया और बाहर धरने पर बैठ गए। इस दौरान सभी प्राध्यापक भी कॉलेज से बाहर हो गए और एक भी कक्षा नहीं लगी। वहीं प्रशासन ने सतर्कता बरतते हुए फोन कर पुलिस बुलवाई और विद्यार्थियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन विद्यार्थियों ने किसी की नहीं सुनी।
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एचएयू के बीएससी एग्रीकल्चर और बीएससी होम साइंस छह वर्षीय कोर्स के सैकड़ों विद्यार्थियों ने 12वीं की मार्कशीट नहीं मिलने के कारण वीरवार को तीसरे दिन भी धरना दिया। प्रदर्शन में लड़कियां भी भारी संख्या में उपस्थित रहीं। प्रदर्शन स्थल पर कॉलेज के डीन और अन्य प्रोफेसर्स भी विद्यार्थियों को समझाने पहुंचे, लेकिन विद्यार्थियों ने लिखित में देने की बात कही। वहीं विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी मांग को पूरा नहीं कर रहा और ऊपर से उनके घर फोन कर अनाप-शनाप बातें उनके बारे में कह रहा है।
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जब लिखकर दिया तो विद्यार्थियों ने दिखाई पुरानी कॉपी
विद्यार्थियों ने लिखित में आश्वासन की मांग की तो रजिस्ट्रार द्वारा लिखित में बीओएम में अप्रूवल की कॉपी दिखाई गई। इस पर विद्यार्थियों ने अपने पास से एक और कॉपी दिखाई। विद्यार्थियों ने कहा कि इसी तरह की कॉपी उन्हें छह महीने पहले भी मिली थी। यही आश्वासन दिया गया था कि शीघ्र ही उन्हें डीएमसी जारी कर दी जाएगी। यह उसकी सेम कॉपी है। केवल तारीख बदली है।
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डीएमसी दिखाई तो भी नहीं माने
विद्यार्थियों ने मांग की कि उन्हें कम से कम डीएमसी की डमी कॉपी ही दिखा दी जाए। प्रशासन ने अपने तीन विशेषज्ञों की टीम से 45 मिनट में डमी कॉपी और सर्टिफिकेट तैयार करवाए, लेकिन विद्यार्थियों ने उसमें गलतियां निकाल दीं। उन्होंने कहा कि कॉपी में रोल नंबर की जगह नहीं है और लड़के की डीएमसी पर डॉटर ऑफ लिखा हुआ है। यह डीएमसी गलत है।
आपके बच्चे बदचलन हो गए
विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनके घर पर फोन कर पैरेंट्स को कहा कि उनके बच्चे बदचलन हो गए हैं और बदतमीजी कर रहे हैं, उन्हें समझाएं, जबकि हम यहां शांति से धरना दे रहे हैं। धरने के दौरान एक छात्र ने कहा कि टीचर्स ने उनके घर पर फोन कर उनके बारे में अनाप-शनाप बातें कीं और कहा कि लड़कियां बदचलन हो गई हैं।
टीचर हुए कॉलेज से बाहर, मौके पर पहुंचा पुलिस बल
विद्यार्थियों के कॉलेज को ताला जड़ने पर टीचर्स भी बाहर हो गए। विद्यार्थियों के प्रदर्शन को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुलिस को बुला लिया। सिविल लाइन थाना के एसएचओ गौरव शर्मा स्वयं 10-12 पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे। एसएचओ ने भी विद्यार्थियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन विद्यार्थियों ने किसी की एक नहीं सुनी और शाम तक ताला बंद करके धरने पर बैठे रहे।
ताला बंद कर चाबी ले गए साथ
ताला बंद करने के बाद विद्यार्थी ताले की चाबी लेकर धरने पर बैठे रहे। इसके बाद वे चाबी भी साथ ले गए। देर रात तक विद्यार्थियों ने ताले की चाबी विश्वविद्यालय प्रशासन को नहीं सौंपी थी।
एनएसस कैंप को लेकर फंसे विद्यार्थी
विद्यार्थियों का एनएसएस कैंप शुक्रवार से शुरू हो रहा है। एनएसएस में बीएससी छह वर्षीय कोर्सों के भी विद्यार्थी हैं, जो धरने पर बैठे हैं। प्रशासन के मुताबिक कुछ विद्यार्थी अन्य विद्यार्थियों को कैंप में नहीं जाने दे रहे, जबकि विद्यार्थी जाने को तैयार हैं। शाम करीब सात बजे एनएसएस के विद्यार्थियों ने एनएसएस इंचार्ज से भी मुलाकात की।
यह है मामला
एचएयू में 2011 में नए शुरू किए गए बीएससी के छह वर्षीय कोर्स के साथ 12वीं के सर्टिफिकेट को लेकर छह वर्षों से असमंजस बना हुआ था। पहले बैच के विद्यार्थी 12वें सेमेस्टर में आ गए हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि 12वीं की मार्कशीट नहीं होने के कारण वे नौकरी के लिए अप्लाई नहीं कर पा रहे। वहीं बीओएम की मीटिंग में 12वीं की मार्कशीट की अप्रूवल मिल चुकी है। विद्यार्थी ठोस आश्वासन मांग रहे हैं। करीब 600 विद्यार्थी इससे प्रभावित हैं। कॉलेज में विद्यार्थियों ने 10वीं के बाद छह वर्षीय बीएससी कोर्स में दाखिला लिया था।
डीएमसी का डिजाइन तैयार, कुछ विद्यार्थी बहका रहे
बीओएम के पांच मेंबर नहीं थे। इसलिए मामला छह महीने से अटका हुआ था। उसके मेंबर नियुक्त हो गए हैं और हमने 12वीं का सर्टिफिकेट बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट में अप्रूव भी करवा लिया है। डीएमसी भी डिजाइन हो गई है और एचबीएसई को पत्र लिख दिया है। तीन दिन की छुट्टियां हैं। इसके बाद बोर्ड अपना काम करेगा और सर्टिफिकेट और डीएमसी को अपनी वेबसाइट पर भी डाल देगा। विद्यार्थियों को समझाया है, लेकिन कुछ विद्यार्थी किसी अन्य मकसद से विद्यार्थियों को बहका रहे हैं।
-प्रो. केपी सिंह, कुलपति, एचएयू हिसार