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बिजली बिलों में वृद्धि के खिलाफ महापंचायत
सिरसा/ब्यूरो
Updated Mon, 16 Dec 2013 06:33 PM IST
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बिजली की कीमताें में बढ़ोतरी के विरोध में सोमवार को जिले भर से आए लोगों ने प्रदर्शन प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन उपायुक्त को सौंपकर आर-पार की लड़ाई की चेतावनी दी गई।
बिजली आंदोलन संघर्ष कमेटी के आह्वान पर छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के राष्ट्रीय सचिव रोशन सुचान, जिला सचिव भोला, हरबंस लाल शर्मा, छात्र नेता मनोज पचेरवाल, मांगेराम पनिहारी, रामकिशन, लीलाराम और वेदप्रकाश के नेतृत्व में टाऊन पार्क में सौ से अधिक गांवाें के हजाराें लोगों की महापंचायत हुई।
इसमें बिजली के बिलाें का बहिष्कार जारी रखने और गांवाें में बिजली कनेक्शन न कटने देने का प्रस्ताव पारित किया गया। महापंचायत में प्रदेश के दूसरे जिलाें सोनीपत, पानीपत, करनाल, रेवाड़ी और फतेहाबाद से भी छात्र नेता पहुंचे जिन्हाेंने प्रदेश भर में बिजली आंदोलन चलाने का संकल्प लिया।
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इस मौके पर रोशन सुचान ने कहा कि सिरसा की जनता ईमानदारी से पिछले 45 साल से बिजली के बिल नियमित रूप से अदा कर रही थी और सिरसा हरियाणा में सबसे कम लाइन लोस वाले जिलों में शुमार है। फिर भी विभाग ने बिजली के दाम बढ़ाकर सात से आठ रुपये प्रति यूनिट तक कर दिए हैं। प्रदेश के जो जिले बिजली चोरी में अव्वल हैं उनका भार बिजली की कीमताें को बढ़ाकर सिरसा, फतेहाबाद और हिसार आदि पर डाला जा रहा है। बिजली चोरी करने वाले जिलाें का 1600 करोड़ रुपये माफ किया जा रहा है।
इसलिए जब तक सरकार 2.50 रुपये प्रति यूनिट के मुताबिक घराें और तीन रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से दुकानाें के बिजली रेट तय नहीं करती तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। छात्र नेता ने आरोप लगाया कि पूंजीवादी राजनैतिक पार्टियां लोगाें को लूटने में लगी हैं और उन्हें जनता से कोई सरोकार नहीं है। संघर्ष कमेटी के नेता भोला, मनोज पचेरवाल, हरबंस लाल शर्मा, मांगेराम, लीलाराम, रामकिशन बरूवाली और वेदप्रकाश ने चेतावनी देते हुए कहा कि बिजली विभाग के कर्मचारी गांवाें में सोच-समझकर बिजली कनेक्शन काटने के लिए जाएं। बाद में प्रदर्शनकारियों ने उपायुक्त को मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
ये हैं प्रमुख मांगे
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की है कि बढ़ोतरी को वापस लेकर घराें में 2.50 रुपये व दुकानाें पर तीन रुपये यूनिट के हिसाब से दरें तय की जाए, एनर्जी चार्जेज, इलेक्ट्रिकल ड्यूटी, फ्यूल सरचार्ज, सैंडरी चार्ज आदि चार्ज खत्म किए जाए, बिजली के मीटर निर्धारित गति से तेज चलते हैं जिसकी सीबीआई जांच करवाई जाए, मीटर बनाने वाली दोषी कंपनियाें पर न सिर्फ जुर्माना किया जाए बल्कि जनता से लूटा गया पिछला बकाया बिल उससे ब्याज सहित वापस लिया जाए।
छात्र नेताआें ने कहा कि 24 घंटे बिजली के नाम पर आरडीएफ लाइनें बिछाने में ठेकेदारी प्रथा के तहत 3300 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसकी जांच भी सीबीआई से करवाई जाए और दोषियाें को सजा दी जाए। छात्र नेताआें ने मांगें न मानने पर सरकार और प्रशासन को अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी।
इस अवसर पर हरबंस शर्मा, मांगेराम पनिहारी, रामकिशन, वेदप्रकाश, लीलाराम, श्रीराम, बलविंद्र मोरीवाला, रणजीत रसूलपुर, रवि रसूलपुर, अनिल कंबोज, जयलाल, विनोद, धर्मवीर, मोहन कोटली, उमेश सोनी, पृथ्वी भरोखां, विकास उर्फ बिल्लू दड़बी, धर्मपाल भरोखां, विनोद सुचान, दीप सुचान, धर्मवीर, मोहन लाल और बलविंदर सिंह उपस्थित थे।
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बिजली आंदोलन संघर्ष कमेटी के आह्वान पर छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के राष्ट्रीय सचिव रोशन सुचान, जिला सचिव भोला, हरबंस लाल शर्मा, छात्र नेता मनोज पचेरवाल, मांगेराम पनिहारी, रामकिशन, लीलाराम और वेदप्रकाश के नेतृत्व में टाऊन पार्क में सौ से अधिक गांवाें के हजाराें लोगों की महापंचायत हुई।
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इसमें बिजली के बिलाें का बहिष्कार जारी रखने और गांवाें में बिजली कनेक्शन न कटने देने का प्रस्ताव पारित किया गया। महापंचायत में प्रदेश के दूसरे जिलाें सोनीपत, पानीपत, करनाल, रेवाड़ी और फतेहाबाद से भी छात्र नेता पहुंचे जिन्हाेंने प्रदेश भर में बिजली आंदोलन चलाने का संकल्प लिया।
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इस मौके पर रोशन सुचान ने कहा कि सिरसा की जनता ईमानदारी से पिछले 45 साल से बिजली के बिल नियमित रूप से अदा कर रही थी और सिरसा हरियाणा में सबसे कम लाइन लोस वाले जिलों में शुमार है। फिर भी विभाग ने बिजली के दाम बढ़ाकर सात से आठ रुपये प्रति यूनिट तक कर दिए हैं। प्रदेश के जो जिले बिजली चोरी में अव्वल हैं उनका भार बिजली की कीमताें को बढ़ाकर सिरसा, फतेहाबाद और हिसार आदि पर डाला जा रहा है। बिजली चोरी करने वाले जिलाें का 1600 करोड़ रुपये माफ किया जा रहा है।
इसलिए जब तक सरकार 2.50 रुपये प्रति यूनिट के मुताबिक घराें और तीन रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से दुकानाें के बिजली रेट तय नहीं करती तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। छात्र नेता ने आरोप लगाया कि पूंजीवादी राजनैतिक पार्टियां लोगाें को लूटने में लगी हैं और उन्हें जनता से कोई सरोकार नहीं है। संघर्ष कमेटी के नेता भोला, मनोज पचेरवाल, हरबंस लाल शर्मा, मांगेराम, लीलाराम, रामकिशन बरूवाली और वेदप्रकाश ने चेतावनी देते हुए कहा कि बिजली विभाग के कर्मचारी गांवाें में सोच-समझकर बिजली कनेक्शन काटने के लिए जाएं। बाद में प्रदर्शनकारियों ने उपायुक्त को मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
ये हैं प्रमुख मांगे
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की है कि बढ़ोतरी को वापस लेकर घराें में 2.50 रुपये व दुकानाें पर तीन रुपये यूनिट के हिसाब से दरें तय की जाए, एनर्जी चार्जेज, इलेक्ट्रिकल ड्यूटी, फ्यूल सरचार्ज, सैंडरी चार्ज आदि चार्ज खत्म किए जाए, बिजली के मीटर निर्धारित गति से तेज चलते हैं जिसकी सीबीआई जांच करवाई जाए, मीटर बनाने वाली दोषी कंपनियाें पर न सिर्फ जुर्माना किया जाए बल्कि जनता से लूटा गया पिछला बकाया बिल उससे ब्याज सहित वापस लिया जाए।
छात्र नेताआें ने कहा कि 24 घंटे बिजली के नाम पर आरडीएफ लाइनें बिछाने में ठेकेदारी प्रथा के तहत 3300 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसकी जांच भी सीबीआई से करवाई जाए और दोषियाें को सजा दी जाए। छात्र नेताआें ने मांगें न मानने पर सरकार और प्रशासन को अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी।
इस अवसर पर हरबंस शर्मा, मांगेराम पनिहारी, रामकिशन, वेदप्रकाश, लीलाराम, श्रीराम, बलविंद्र मोरीवाला, रणजीत रसूलपुर, रवि रसूलपुर, अनिल कंबोज, जयलाल, विनोद, धर्मवीर, मोहन कोटली, उमेश सोनी, पृथ्वी भरोखां, विकास उर्फ बिल्लू दड़बी, धर्मपाल भरोखां, विनोद सुचान, दीप सुचान, धर्मवीर, मोहन लाल और बलविंदर सिंह उपस्थित थे।