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Hisar News: गर्भवतियों को अल्ट्रासाउंड केंद्र पर दिखानी होगी आईडी व नंबर, फिर होगी जांच
Tue, 21 Jan 2025 12:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Tue, 21 Jan 2025 12:50 AM IST
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हांसी। गर्भवती महिलाओं का अब प्रजनन व बाल स्वास्थ्य (आरसीएच) आईडी और मां व शिशु ट्रैकिंग प्रणाली (एमसीटीएस) नंबर के बिना अल्ट्रासाउंड नहीं किया जाएगा। महिलाओं को गर्भवती होने के तीन महीने के अंदर उन्हें अपने क्षेत्र की एएनएम के पास जाकर रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों को साफ हिदायत दी है कि अल्ट्रासाउंड से पहले गर्भवती महिला की आरसीएच आईडी व एमसीटीएस नंंबर लेना होगा।
ये नियम सरकारी व निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर लागू हो चुका है। इसके लिए महानिदेशक (स्वास्थ्य सेवाएं) की ओर से प्रदेश के सभी सिविल सर्जन को पत्र जारी किया गया है। नियम का पालन न करने वाले अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि इससे पहले यह नियम प्रदेश में सिर्फ करनाल में ही लागू था। इसकी सफलता के बाद अब इस नियम को स्वास्थ्य विभाग ने पूरे प्रदेश में लागू कर दिया है। अगर किसी केंद्र पर बिना आरसीएच के अल्ट्रासाउंड किया तो उसे नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए विभाग की ओर से आईएमए और निजी केंद्रों को भी निर्देश दिए गए हैं।
गर्भावस्था के दौरान जरूरी है अल्ट्रासाउंड
सरकार के नियमानुसार गर्भवतियों का 16 से 20 सप्ताह के अंदर अल्ट्रासाउंड होना अनिवार्य है। इसके अलावा महिला रोग विशेषज्ञ गर्भवती की हालत के अनुसार अल्ट्रासाउंड करवा सकती है।
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अल्ट्रासाउंड के लिए ये दस्तावेज जरूरी
स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि गर्भवती को अल्ट्रासाउंड करवाना है तो उसके पास एक चिकित्सक का मान्य रेफरेंस कार्ड, पहचान पत्र, फोटो होना चाहिए। इसके बाद ही केंद्र गर्भवती का अल्ट्रासाउंड कर सकता है। अब इसमें आरसीएमएच को अनिवार्य कर दिया गया है। इस नंबर के पंजीकरण के बाद ही जांच होगी।
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मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से अब आरसीएच और एमसीटीएस पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। इससे गर्भवती महिलाओं की ट्रैकिंग आसानी से हो सकेगी। अक्सर तीन महीने तक की गर्भावस्था के बारे में नहीं बताया जाता है। इसलिए महिलाएं रजिस्ट्रेशन करवाने से बचती है, लेकिन अब यह रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। इससे गर्भवती व शिशु के स्वास्थ्य के बारे में भी जानकारी रहेगी। - डॉ तरुण, सिविल सर्जन, हिसार
80 प्रतिशत गर्भवतियां हो रहीं पंजीकृत
जिले में जो गर्भवती नागरिक अस्पताल या फिर आंगनबाड़ी के जरिये उपचार करवा रही हैं। उन महिलाओं का पंजीकरण हो जाता है, लेकिन निजी अस्पतालों में उपचार करवाने वाली गर्भवती पंजीकृत नहीं हो पाती है। इसलिए यह निर्देश दिए हैं। इससे माताओं और शिशु की मृत्यु दर को कम करने के लिए मदद मिलेगी।- डॉ. प्रभुदयाल, इंचार्ज, पीएनडीटी टीम
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ये नियम सरकारी व निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर लागू हो चुका है। इसके लिए महानिदेशक (स्वास्थ्य सेवाएं) की ओर से प्रदेश के सभी सिविल सर्जन को पत्र जारी किया गया है। नियम का पालन न करने वाले अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि इससे पहले यह नियम प्रदेश में सिर्फ करनाल में ही लागू था। इसकी सफलता के बाद अब इस नियम को स्वास्थ्य विभाग ने पूरे प्रदेश में लागू कर दिया है। अगर किसी केंद्र पर बिना आरसीएच के अल्ट्रासाउंड किया तो उसे नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए विभाग की ओर से आईएमए और निजी केंद्रों को भी निर्देश दिए गए हैं।
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गर्भावस्था के दौरान जरूरी है अल्ट्रासाउंड
सरकार के नियमानुसार गर्भवतियों का 16 से 20 सप्ताह के अंदर अल्ट्रासाउंड होना अनिवार्य है। इसके अलावा महिला रोग विशेषज्ञ गर्भवती की हालत के अनुसार अल्ट्रासाउंड करवा सकती है।
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अल्ट्रासाउंड के लिए ये दस्तावेज जरूरी
स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि गर्भवती को अल्ट्रासाउंड करवाना है तो उसके पास एक चिकित्सक का मान्य रेफरेंस कार्ड, पहचान पत्र, फोटो होना चाहिए। इसके बाद ही केंद्र गर्भवती का अल्ट्रासाउंड कर सकता है। अब इसमें आरसीएमएच को अनिवार्य कर दिया गया है। इस नंबर के पंजीकरण के बाद ही जांच होगी।
मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से अब आरसीएच और एमसीटीएस पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। इससे गर्भवती महिलाओं की ट्रैकिंग आसानी से हो सकेगी। अक्सर तीन महीने तक की गर्भावस्था के बारे में नहीं बताया जाता है। इसलिए महिलाएं रजिस्ट्रेशन करवाने से बचती है, लेकिन अब यह रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। इससे गर्भवती व शिशु के स्वास्थ्य के बारे में भी जानकारी रहेगी। - डॉ तरुण, सिविल सर्जन, हिसार
80 प्रतिशत गर्भवतियां हो रहीं पंजीकृत
जिले में जो गर्भवती नागरिक अस्पताल या फिर आंगनबाड़ी के जरिये उपचार करवा रही हैं। उन महिलाओं का पंजीकरण हो जाता है, लेकिन निजी अस्पतालों में उपचार करवाने वाली गर्भवती पंजीकृत नहीं हो पाती है। इसलिए यह निर्देश दिए हैं। इससे माताओं और शिशु की मृत्यु दर को कम करने के लिए मदद मिलेगी।- डॉ. प्रभुदयाल, इंचार्ज, पीएनडीटी टीम