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Hisar News: बूथ की दरकार... खुले में यात्री करते हैं बसों का इंतजार, हांसी बस अड्डे पर 13 बूथ, 17 रूटों पर चलती हैं बसें
Sat, 03 Jan 2026 12:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Sat, 03 Jan 2026 12:57 AM IST
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हांसी। हांसी के स्थानीय बस स्टैंड पर यात्रियों की सुविधाएं भगवान भरोसे हैं। यहां हिसार, सिरसा और अन्य लोकल ग्रामीण रूटों की बसों के लिए बूथों की भारी कमी के कारण यात्रियों को कड़ाके की ठंड और बारिश में भीषण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में बस स्टैंड पर बैठने और बसों के ठहराव के लिए पर्याप्त जगह का अभाव है, जिससे अव्यवस्था का माहौल बना रहता है।
बस स्टैंड पर कुल 13 बूथ हैं, जिनमें से कई अन्य रूटों की बसों के लिए भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इससे 17 रूटों का काम चलाया जा रहा है। हालांकि, यहां की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कम से कम सात और बूथों की आवश्यकता है। बूथों की कमी के कारण लोकल रूटों की बसें बिना बूथ के खड़ी होती हैं और एक ही बूथ पर विभिन्न रूटों की बसें रुकती हैं। इसके परिणामस्वरूप, यात्रियों को बूथ ढूंढने में परेशानी होती है, और एक ही बूथ पर भीड़ भी लगी रहती है।
हिसार, फतेहाबाद, सिरसा और दिल्ली के निर्धारित बूथ नहीं
हिसार, फतेहाबाद, सिरसा और दिल्ली जैसे मुख्य रूटों के लिए भी निर्धारित बूथ नहीं होने के कारण बसें अक्सर गेट के पास या मुख्य सड़क पर खड़ी होती हैं। इस वजह से यात्रियों को खुले में खड़ा होकर बस का इंतजार करना पड़ता है, खासकर हिसार रूट पर, जहां बसें खुली जगह पर खड़ी होती हैं। हिसार जाने वाले यात्रियों की संख्या ज्यादा है, जिनमें विद्यार्थियों के साथ-साथ कई लोग कामकाज और अन्य कामों के सिलसिले में भी यात्रा करते हैं। सुबह के समय यहां सबसे अधिक भीड़ होती है, जिससे स्थिति और भी कठिन हो जाती है।
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जाम की रहती है स्थिति
बूथों की कमी के कारण बसें दोनों गेटों के पास खड़ी होती हैं, जिससे मुख्य रास्तों पर अक्सर जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। उदाहरण के लिए, सात नंबर बूथ पर बड़सी, कुंगड़ भैणी और मेहंदा रूट की बसें एक ही रूट पर खड़ी की जाती हैं, जबकि ये रूट अलग-अलग हैं। इसके अलावा सीसर, खरबला, मदनहेड़ी, सिंघवा, रामायण, ढंढेरी जैसे गांवों के लिए कोई निर्धारित बूथ नहीं हैं।
शौचालय की भी हालत खस्ता
बस स्टैंड पर शौचालयों की स्थिति भी बहुत खराब है। यहां दिनभर 8 से 10 हजार यात्री सफर करते हैं, लेकिन शौचालयों की संख्या और स्थिति अत्यंत नाजुक है। महिलाओं के लिए केवल एक शौचालय है, जिसमें एक सीट टूटी हुई है, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। रोडवेज विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बूथों की कमी, स्टाफ और संसाधनों की कमी के बारे में मुख्यालय को कई बार सूचित किया जा चुका है, लेकिन धरातल पर अभी तक कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है।
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बस अड्डे पर बूथों की संख्या कम होने के कारण बसें बूथों के बाहर खड़ी होती हैं। अगर बूथों की संख्या बढ़ाई जाए तो यात्रियों को ज्यादा सुविधा मिल सकेगी। - राजबीर सिवाच, स्टैंड ड्यूटी, बस स्टैंड।
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बस स्टैंड पर कुल 13 बूथ हैं, जिनमें से कई अन्य रूटों की बसों के लिए भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इससे 17 रूटों का काम चलाया जा रहा है। हालांकि, यहां की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कम से कम सात और बूथों की आवश्यकता है। बूथों की कमी के कारण लोकल रूटों की बसें बिना बूथ के खड़ी होती हैं और एक ही बूथ पर विभिन्न रूटों की बसें रुकती हैं। इसके परिणामस्वरूप, यात्रियों को बूथ ढूंढने में परेशानी होती है, और एक ही बूथ पर भीड़ भी लगी रहती है।
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हिसार, फतेहाबाद, सिरसा और दिल्ली के निर्धारित बूथ नहीं
हिसार, फतेहाबाद, सिरसा और दिल्ली जैसे मुख्य रूटों के लिए भी निर्धारित बूथ नहीं होने के कारण बसें अक्सर गेट के पास या मुख्य सड़क पर खड़ी होती हैं। इस वजह से यात्रियों को खुले में खड़ा होकर बस का इंतजार करना पड़ता है, खासकर हिसार रूट पर, जहां बसें खुली जगह पर खड़ी होती हैं। हिसार जाने वाले यात्रियों की संख्या ज्यादा है, जिनमें विद्यार्थियों के साथ-साथ कई लोग कामकाज और अन्य कामों के सिलसिले में भी यात्रा करते हैं। सुबह के समय यहां सबसे अधिक भीड़ होती है, जिससे स्थिति और भी कठिन हो जाती है।
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जाम की रहती है स्थिति
बूथों की कमी के कारण बसें दोनों गेटों के पास खड़ी होती हैं, जिससे मुख्य रास्तों पर अक्सर जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। उदाहरण के लिए, सात नंबर बूथ पर बड़सी, कुंगड़ भैणी और मेहंदा रूट की बसें एक ही रूट पर खड़ी की जाती हैं, जबकि ये रूट अलग-अलग हैं। इसके अलावा सीसर, खरबला, मदनहेड़ी, सिंघवा, रामायण, ढंढेरी जैसे गांवों के लिए कोई निर्धारित बूथ नहीं हैं।
शौचालय की भी हालत खस्ता
बस स्टैंड पर शौचालयों की स्थिति भी बहुत खराब है। यहां दिनभर 8 से 10 हजार यात्री सफर करते हैं, लेकिन शौचालयों की संख्या और स्थिति अत्यंत नाजुक है। महिलाओं के लिए केवल एक शौचालय है, जिसमें एक सीट टूटी हुई है, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। रोडवेज विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बूथों की कमी, स्टाफ और संसाधनों की कमी के बारे में मुख्यालय को कई बार सूचित किया जा चुका है, लेकिन धरातल पर अभी तक कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है।
बस अड्डे पर बूथों की संख्या कम होने के कारण बसें बूथों के बाहर खड़ी होती हैं। अगर बूथों की संख्या बढ़ाई जाए तो यात्रियों को ज्यादा सुविधा मिल सकेगी। - राजबीर सिवाच, स्टैंड ड्यूटी, बस स्टैंड।