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40 हजार प्रॉपर्टी मालिकों के पास नहीं पहुंचे बिल, कैसे आएगा टैक्स
अमर उजाला ब्यूरो/हिसार
Updated Thu, 16 Feb 2017 12:30 AM IST
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टैक्स बिल न भरने का ढिंढोरा पीट रहे नगर निगम के अधिकारियों की पोल खुल गई है। नगर निगम ने शहर में तीन महीने बीत जाने के बाद भी आज तक कई कॉलोनियों में बिल नहीं बांटे हैं। शहर में अभी तक 39 हजार 883 बिल लोगों के घरों में ही नहीं पहुंचे हैं। जिन कर्मचारियों की ड्यूटियां लगाई हैं वे बिल लोगों के घर तक ही नहीं पहुंचा रहे। ऐसे में लोग टैक्स बिल कैसे भरेंगे जब उनके पास टैक्स बिल कम नोटिस ही नहीं पहुंचा।
निगम में चर्चा तिगड़ी ने बिगाड़ा मामला
शहर में है 1 लाख 35 हजार प्रॉपर्टी
नगर निगम में 1 लाख 35 हजार के आसपास प्रॉपर्टी रजिस्टर्ड हैं। इन प्रॉपर्टी की निगम ने बिल जनरेट करने के लिए यूनिक आइडी नंबर जारी किया हुआ है। इनमें से 40 हजार के आसपास बिल बांटे ही नहीं गए हैं। ऐसे में कैसे टैक्स एकत्रित होगा।
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28 फरवरी तक है 25 प्रतिशत छूट
सरकार ने प्रॉपर्टी टैक्स एरियर सहित अब तक का एकमुश्त में जमा करवाने वालों को 25 प्रतिशत छूट देने की घोषणा की हुई है। इसके अलावा कैशलेस बिल जमा करवाने वालों को 1 प्रतिशत अतिरिक्त छूट दी जाएगी।
सचिव बोले सीधे मिलें मुझसे
उधर सचिव राजेश महता ने कहा है कि उन्होंने अब सरकारी विभाग जो डिफाल्टर हैं उन्हें भी नोटिस भेजने शुरू कर दिए हैं। अगर किसी का बिल गलत है तो वे सीधे मेरे पास आएं। उनके पास रजिस्ट्री होनी चाहिए। वे सेल्फ असेस्मेंट पर अपना प्रॉपर्टी टैक्स जमा करवा सकते हैं।
इनकम ऑफ सोर्स पर नहीं देते ध्यान
निगम के हालात ऐसे हैं कि इनकम ऑफ सोर्स पर ध्यान ही नहीं दिया जा रहा। ऐसी हालात के कारण अभी तक निगम कर्मचारियों व वेतन तक नहीं मिल पाया है।
पहले से ही थी कर्मचारियों की नियत खराब
नगर निगम के जिन कर्मचारियों को टैक्स बिल बांटने में लगाया गया था उनकी नियत शुरू से ही खराब थी। कई कर्मचारियों ने तो टैक्स बिल छिपा दिए थे। मामला अमर उजाला ने उस वक्त भी उठाया था जिसके बाद बिलों से भरे कट्टे कर्मचारियों ने उठा लिए थे।
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निगम में चर्चा तिगड़ी ने बिगाड़ा मामला
नगर निगम में इन दिनों चर्चा है कि एक तिगड़ी ने मामला बिगाड़ा हुआ है। एक रोहतक के अधिकारी, दूसरा एक पीए व तीसरा ब्रांच संभाल रहा एक अधिकारी पूरे मामले को अधिकारियों के समक्ष गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। दो अधिकारियों के बीच चल रही खींचतान को दो अधिकारी कमिश्नर के सामने इस ढंग से पेश कर रहे हैं कि सुधार होना तय नहीं। हालांकि प्रयोग के तौर पर इन दोनों अधिकारियों ने एक अधिकारी को कमिश्नर के सामने गलत तथ्य पेश कर ब्रांच संभलवा दी। रिजल्ट अभी तक जीरो है।
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शहर में है 1 लाख 35 हजार प्रॉपर्टी
नगर निगम में 1 लाख 35 हजार के आसपास प्रॉपर्टी रजिस्टर्ड हैं। इन प्रॉपर्टी की निगम ने बिल जनरेट करने के लिए यूनिक आइडी नंबर जारी किया हुआ है। इनमें से 40 हजार के आसपास बिल बांटे ही नहीं गए हैं। ऐसे में कैसे टैक्स एकत्रित होगा।
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28 फरवरी तक है 25 प्रतिशत छूट
सरकार ने प्रॉपर्टी टैक्स एरियर सहित अब तक का एकमुश्त में जमा करवाने वालों को 25 प्रतिशत छूट देने की घोषणा की हुई है। इसके अलावा कैशलेस बिल जमा करवाने वालों को 1 प्रतिशत अतिरिक्त छूट दी जाएगी।
सचिव बोले सीधे मिलें मुझसे
उधर सचिव राजेश महता ने कहा है कि उन्होंने अब सरकारी विभाग जो डिफाल्टर हैं उन्हें भी नोटिस भेजने शुरू कर दिए हैं। अगर किसी का बिल गलत है तो वे सीधे मेरे पास आएं। उनके पास रजिस्ट्री होनी चाहिए। वे सेल्फ असेस्मेंट पर अपना प्रॉपर्टी टैक्स जमा करवा सकते हैं।
इनकम ऑफ सोर्स पर नहीं देते ध्यान
निगम के हालात ऐसे हैं कि इनकम ऑफ सोर्स पर ध्यान ही नहीं दिया जा रहा। ऐसी हालात के कारण अभी तक निगम कर्मचारियों व वेतन तक नहीं मिल पाया है।
पहले से ही थी कर्मचारियों की नियत खराब
नगर निगम के जिन कर्मचारियों को टैक्स बिल बांटने में लगाया गया था उनकी नियत शुरू से ही खराब थी। कई कर्मचारियों ने तो टैक्स बिल छिपा दिए थे। मामला अमर उजाला ने उस वक्त भी उठाया था जिसके बाद बिलों से भरे कट्टे कर्मचारियों ने उठा लिए थे।