चेक से प्रॉपर्टी टैक्स भरने वालों ने निगम को लगाई 12 लाख की चपत
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वर्ष 2015-16 का चेक से प्रॉपर्टी टैक्स जमा करवाने वाले शहर के कई लोग निगम को लाखों रुपये की चपत मार गए। जिन लोगों से निगम को टैक्स लेना था उनसे पेमेंट लेने की बजाए नगर निगम बैंक को खुद ही जुर्माने के रूप में हजारों रुपये दे बैठा। निगम ने चेक से जमा हुए प्रॉपर्टी टैक्स को जब कैश करवाने के लिए बैंक में लगाया तो करीब 12 लाख रुपये पेमेंट के सैकड़ों चेक बाउंस हो गए। अब निगम को ये 12 लाख रुपये भी नहीं मिल पाए और चेक बाउंस होने की पेनल्टी खुद पर ही लगवा बैठा। इतना ही नहीं अब नगर निगम इन पर कानूनी कार्रवाई करने की बजाए हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
केस डालेंगे तो निगम पर ही पड़ेगा बोझ
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि चेक बाउंस तो हो गए हैं मगर अब कानूनी कार्रवाई भी कैसे करें। सैकड़ों लोगों के चेक बाउंस हो गए है लेकिन उन पर कानूनी कार्रवाई के लिए निगम को और चपत लग जाएगी। क्योंकि केस पर खर्च आएगा। जो निगम को वहन करना पड़ेगा। आखिर ऐसे में उच्च अधिकारियों की राय लेनी बाकी है।
रेंट चेक भी हुए बाउंस
इसी प्रकार शहर में नगर निगम की जिन दुकानों को किराए पर दिया हुआ है। उनमें से कई दुकानदारों ने निगम को किराए के चेक दिए हुए हैं। इनमें से कई दुकानदारों के चेक भी बाउंस हो गए हैं। नगर निगम अधिकारी अब इसको लेकर असमंजस में हैं कि आखिर इन लोगों के खिलाफ कानूनी एक्शन लिया जाए या नहीं।
तो कई को हो जाएगी जेल
नगर निगम अगर ऐसे लोगों पर कानूनी कार्रवाई करता है तो कई प्रॉपर्टी मालिकों को जेल की हवा खानी पड़ सकती है। कानूनन धारा 138 यानी चेक बाउंस में छह महीने तक की सजा हो सकती है हालांकि इस मामले में पेमेंट के अनुसार सजा निर्धारित है। कम या ज्यादा भी हो सकती है।
ये है नियम
अगर कोई व्यक्ति सामने वाली पार्टी को किसी बिल या अन्य तरह के भुगतान के लिए चेक देता है तो बाउंस होने पर दोनों पार्टियों को पेनल्टी लगती है। जिस व्यक्ति ने चेक दिया उसे अधिक पेनल्टी लगती है और जिस पार्टी ने संबंधित व्यक्ति का चेक लगाया उसे कम पेनल्टी लगती है।
करीब 12 लाख रुपये से ज्यादा के प्रॉपर्टी टैक्स के चेक बाउंस हो चुके हैं। उच्च अधिकारियों से राय लेकर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
- नरेश शर्मा, टैक्स ब्रांच सुपरिंटेंडेंट