{"_id":"62c727a4d49ba300703a99b8","slug":"municipal-council-land-scam-in-the-hearing-of-the-case-the-court-of-adj-ordered-to-include-the-tehsildar-in-the-investigation-hisar-news-hsr6361217105","type":"story","status":"publish","title_hn":"नगर परिषद भूमि घोटाला : मामले की सुनवाई में एडीजे की अदालत ने दिए जांच में तहसीलदार को शामिल करने के आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नगर परिषद भूमि घोटाला : मामले की सुनवाई में एडीजे की अदालत ने दिए जांच में तहसीलदार को शामिल करने के आदेश
विज्ञापन
भिवानी। नगर परिषद भूमि घोटाले में एडिशनल सेशन जज रजनी यादव की कोर्ट ने वीरवार को सुनवाई के दौरान पुलिस की जांच पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने पुलिस को जमीन घोटाले में भिवानी तहसीलदार को भी जांच में शामिल किए जाने के आदेश दिए।
कोर्ट ने कहा कि इस पूरे प्रकरण में आरोपियों के साथ भिवानी तहसीलदार की भूमिका भी रही है, जबकि पुलिस की तफ्तीश में तहसीलदार का कोई जिक्र तक नहीं है। कोर्ट ने आरोपी सुधीर की जमानत याचिका को भी सुनवाई के बाद खारिज कर दिया। भिवानी बचाओ आंदोलन के संयोजक सुशील वर्मा ने नगर परिषद की जमीन को गलत दस्तावेजों और धोखाधड़ी से बेचने के मामले में शहर थाना पुलिस को शिकायत दी थी। जिस पर पुलिस ने निवर्तमान चेयरमैन रण सिंह यादव व निवर्तमान उपप्रधान मामनचंद सहित अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज करवाया था। शिकायतकर्ता सुनील वर्मा का आरोप था कि आरोपियों ने मिलीभगत कर एमसी कॉलोनी ग्वार फैक्टरी मेला ग्राउंड क्षेत्र में प्लाट नंबर 86 व 87 जो 133-133 वर्ग गज के हैं, इनको गलत तरीके से बेच डाला। जिसकी रजिस्ट्री उस समय मामनचंद ने खुद कराई थी। इसी तरह ऑटो मार्केट में दुकान नंबर एक को गांव निमड़ीवाली निवासी सतप्रकाश की पत्नी और भाई रणधीर के नाम गलत तरीके से करा दिया गया था। इस मामले में पुलिस ने निवर्तमान नप चेयरमैन रण सिंह यादव उपाध्यक्ष मामनचंद सहित आरोपी सतप्रकाश के बेटे सुधीर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
इसी मामले में बुधवार को एडीजे रजनी यादव की कोर्ट में सुनवाई हुई। जिसमें शिकायतकर्ता सुशील वर्मा की तरफ से अधिवक्ता रवि चौधरी व हेमंत कौशिक ने पैरवी की वहीं पुलिस के जांच अधिकारी महेंद्र ने भी कोर्ट को बताया कि इस मामले में 11 अन्य आरोपियों के नाम भी सामने आए हैं, पुलिस इस मामले में तहकीकात कर रही है। वहीं कोर्ट ने पुलिस का पक्ष जानने के बाद भिवानी तहसीलदार की भूमिका पर भी सवाल उठाया और कोर्ट ने भिवानी तहसीलदार को इस मामले की तफ्तीश में शामिल करने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
कोर्ट ने कहा कि इस पूरे प्रकरण में आरोपियों के साथ भिवानी तहसीलदार की भूमिका भी रही है, जबकि पुलिस की तफ्तीश में तहसीलदार का कोई जिक्र तक नहीं है। कोर्ट ने आरोपी सुधीर की जमानत याचिका को भी सुनवाई के बाद खारिज कर दिया। भिवानी बचाओ आंदोलन के संयोजक सुशील वर्मा ने नगर परिषद की जमीन को गलत दस्तावेजों और धोखाधड़ी से बेचने के मामले में शहर थाना पुलिस को शिकायत दी थी। जिस पर पुलिस ने निवर्तमान चेयरमैन रण सिंह यादव व निवर्तमान उपप्रधान मामनचंद सहित अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज करवाया था। शिकायतकर्ता सुनील वर्मा का आरोप था कि आरोपियों ने मिलीभगत कर एमसी कॉलोनी ग्वार फैक्टरी मेला ग्राउंड क्षेत्र में प्लाट नंबर 86 व 87 जो 133-133 वर्ग गज के हैं, इनको गलत तरीके से बेच डाला। जिसकी रजिस्ट्री उस समय मामनचंद ने खुद कराई थी। इसी तरह ऑटो मार्केट में दुकान नंबर एक को गांव निमड़ीवाली निवासी सतप्रकाश की पत्नी और भाई रणधीर के नाम गलत तरीके से करा दिया गया था। इस मामले में पुलिस ने निवर्तमान नप चेयरमैन रण सिंह यादव उपाध्यक्ष मामनचंद सहित आरोपी सतप्रकाश के बेटे सुधीर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
विज्ञापन
इसी मामले में बुधवार को एडीजे रजनी यादव की कोर्ट में सुनवाई हुई। जिसमें शिकायतकर्ता सुशील वर्मा की तरफ से अधिवक्ता रवि चौधरी व हेमंत कौशिक ने पैरवी की वहीं पुलिस के जांच अधिकारी महेंद्र ने भी कोर्ट को बताया कि इस मामले में 11 अन्य आरोपियों के नाम भी सामने आए हैं, पुलिस इस मामले में तहकीकात कर रही है। वहीं कोर्ट ने पुलिस का पक्ष जानने के बाद भिवानी तहसीलदार की भूमिका पर भी सवाल उठाया और कोर्ट ने भिवानी तहसीलदार को इस मामले की तफ्तीश में शामिल करने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन