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मैं जन-गण-मन का पक्षधर नहीं, चाहे जेल हो जाए : शुक्राईनाथ

Mon, 06 Jan 2020 01:51 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 06 Jan 2020 01:51 AM IST
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monk controversy for national anthom
श्रद्धालुओं को संबोधित करते महंत शुक्राईनाथ - फोटो : Hisar
नारनौंद (ब्यूरो)। रविवार को दादा काला पीर मठ में दूसरे दिन खेलों की शुरुआत की गई। कबड्डी प्रतियोगिता का शुभारंभ राष्ट्रगान से किया गया। राष्ट्रगान पूरा होते ही बाबा काला पीर मठ के महंत शुक्राईनाथ माइक लेकर स्टेज पर खड़े होकर विवादित बोल बोले। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मैं जन-गण-मन को नहीं मानता। एक बार तो पंडाल में मौजूद हजारों लोग एक-दूसरे के मुंह की तरफ ताकने लगे। उन्होंने कहा कि खेल की शुरुआत जन-गण-मन से नहीं होनी चाहिए थी। मैं जन-गण-मन को बिल्कुल भी नहीं मानता और न ही इसका पक्षधर हूं, इसके लिए चाहे मुझे जेल हो जाए। मैं इसको मानने के लिए तैयार नहीं हूं। मैं एक संन्यासी हूं, मेरा काम है राष्ट्र वैधानिक पर चलना। देश की परंपरा राष्ट्र के सम्मान की है। इसलिए हमे जन-गण-मन गाकर देश का अपमान नहीं करना चाहिए।
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मैं तो सिर्फ वंदेमातरम को मानता हूं
पंजाब के बाद सिंध जो शब्द है, वह पाकिस्तान का प्रांत है तो इसका राष्ट्र के शौर्य के लिए कोई मतलब नहीं है। हम अपने खेलों की शुरुआत राष्ट्र के शौर्य और पराक्रम की परिभाषा से सिद्ध करें। राष्ट्रगान से नहीं, बल्कि राष्ट्रगीत के साथ प्रारंभ करें। क्योंकि जन-गण-मन जो राष्ट्रगान है, वह जॉर्ज पंचम जो कि एक अंग्रेज थे, उनके लिए गाया गया था। मैं इसे अपने राष्ट्र का प्रतीक नहीं बना सकता। मैं तो सिर्फ अपने वंदेमातरम को मानता हूं। इसके बाद उन्होंने वंदेमातरम गीत गाया और उसके बाद रिबन काटकर खेलों की शुरुआत की।
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