फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Hisar News ›   Mechanization will strengthen agriculture, innovation will lead to prosperity

Hisar News: मशीनीकरण से मजबूती, नवाचार से समृद्धि होगी खेती की राह

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 07 Jan 2026 12:10 AM IST
विज्ञापन
Mechanization will strengthen agriculture, innovation will lead to prosperity
सम्मेलन में मंथन करते विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं अन्य।
हिसार। कुलपतियों के 49वें सम्मेलन में ''''विकसित भारत 2047: कृषि संस्थानों की भूमिका'''' पर गहरी चर्चा हुई। सम्मेलन में कृषि क्षेत्र में तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देने और लागत खर्च घटाने के लिए देश भर के कुलपतियों ने एकमत होकर कदम उठाने की सहमति जताई। सभी कुलपतियों ने यह निर्णय लिया कि एक संस्थान में हो रहे शोध कार्य को दूसरे संस्थानों के साथ साझा किया जाएगा।
विज्ञापन

प्रथम सत्र में डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ अकोला के कुलपति डॉ. शरद रामराव गडाख ने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए एक मॉडल प्रस्तुत किया। वसंतराव नाइक मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ परभणी के कुलपति प्रो. इंद्र मणि ने ''''लचीले भविष्य के लिए जलवायु-स्मार्ट खेती'''' पर अपने विचार रखे। उन्होंने छोटे किसानों के लिए खेतों में मशीनीकरण बढ़ाने और उत्पादन लागत को कम करने के उपायों पर बल दिया।समन्वित कृषि प्रणाली मॉडल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस/डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल से खेती को कम से कम इंसानी दखल के साथ सपोर्ट करने के उपायों पर चर्चा की गई। साथ ही, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और प्रोसेसिंग अनुपात बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। असम कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिद्युत चंदन डेका ने इस सत्र में अपने विचार रखे।
विज्ञापन

दूसरे सत्र में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बलदेव राज कांबोज ने कहा कि खाद्य सुरक्षा, किसानों की समृद्धि और सतत विकास के लिए अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने नई शिक्षा नीति-2020 को लचीली, बहु-विषयक और अनुसंधान-उन्मुख बताया, जो कृषि शिक्षा को अधिक किसान-केंद्रित, बाजार-लिंक्ड और डिजिटल रूप से सक्षम बनाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

तीसरे सत्र में सतत कृषि के भविष्य के लिए परंपरा और प्रौद्योगिकी का सेतु बनाने पर विस्तृत चर्चा की गई। एनडीआरआई करनाल के निदेशक और कुलपति डॉ. धीर सिंह ने पोषण सुरक्षा के बढ़ते महत्व पर ज़ोर दिया। सम्मेलन में आईएयूए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. परविंदर कौशल, सचिव डॉ. दिनेश कुमार आदि माैजूद रहे।
सभी विश्वविद्यालयों को एक मंच पर लाना ही उद्देश्य
इंडियन एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी एसोसिएशन (आईएयूए) के अध्यक्ष और जीबीपीयूएटी पंतनगर के कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि सम्मेलन कृषि शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है। देश में 74 कृषि विश्वविद्यालय हैं, जो कृषि को लाभकारी बनाने, उत्पादन बढ़ाने और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं। आईएयूए का उद्देश्य विश्वविद्यालयों के उत्कृष्ट कार्यों को साझा करना, समस्याओं का हल निकालने के लिए सरकार के साथ तालमेल स्थापित करना है।
एचएयू के कुलपति प्रो. कांबोज ने कहा कि सम्मेलन में चर्चा की गई कि कृषि विश्वविद्यालयों की भूमिका के रोडमैप पर विचार किया गया, जो देश को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में मदद करेगा। सभी विश्वविद्यालय एक-दूसरे के साथ एमओयू के माध्यम से शोध कार्य में सहयोग करें, ताकि बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकें। सम्मेलन की सिफारिशें कृषि शिक्षा, शोध और विस्तार को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित होंगी।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के एडीजी डॉ. अजीत सिंह यादव ने बताया कि नई शिक्षा नीति-2020 के तहत कृषि विश्वविद्यालय अपने पाठ्यक्रमों में कुछ महत्वपूर्ण टॉपिक जोड़ सकते हैं, जो विद्यार्थियों को स्थानीय कृषि समस्याओं का समाधान करने में मदद करेंगे। विश्वविद्यालय भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के साथ मिलकर इन समस्याओं का निदान कर सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed