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एमकॉम की टॉपर को तीन साल संघर्ष के बाद मिला गोल्ड मेडल
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
Updated Sat, 28 May 2016 12:26 AM IST
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एमकॉम की टॉपर छात्रा को आखिरकार तीन साल बाद हक मिला, लेकिन वो भी आधा अधूरा। शुक्रवार को कॉलेज में बुलाकर छात्रा को यूनिवर्सिटी टॉपर का गोल्ड मेडल दिया गया। मामला राजकीय महाविद्यालय से एमकॉम करने वाली छात्रा निहारिका का है। निहारिका ने 2013 में केयूके के एमकॉम के फाइनल एग्जाम दिए। लेकिन यूनिवर्सिटी की गलती के चलते प्रेक्टिकल नहीं लिये गए।
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जब रिजल्ट की घोषणा हुई तो कॉलेज के एमकॉम के आधे विद्यार्थियों को रिजल्ट दे दिया गया। जबकि आधों का रिजल्ट रोक लिया गया। छात्रों ने जब इसकी शिकायत की तो रिजल्ट आने के बाद प्रेक्टिकल लिया गया। उसके बाद आए रिजल्ट में निहारिका टॉपर निकली। टॉपर निहारिका को यूनिवर्सिटी ने कॉनवोकेशन में बुलाकर सर्टिफिकेट देने व सम्मानित करने का आश्वासन दिया। लेकिन विश्वविद्यालय की तरफ से तीन साल तक कोई बुुलावा नहीं आया।
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इस दौरान छात्रा ने आरटीआई से लेकर सीएम विंडो तक गुहार लगाई। अब जाकर शुक्रवार को उसे गोल्ड मेडल और प्रमाण पत्र दिया गया, हालांकि छात्रा को अभी तक स्कॉलरशिप नहीं दी गई।
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जहां इंटरव्यू के लिए गई वहां टॉपर का मांगा सबूत
छात्रा का कहना है कि उसे यूनिवर्सिटी की गलती के कारण मानसिक पीड़ा उठानी पड़ी। एमकॉम करने के बाद निहारिका ने कई जगह नौकरी के लिए इंटरव्यू दिया। लेकिन उससे यूनिवर्सिटी टॉपर होने का सबूत मांगा गया। सबूत होता तो उसके अलग से नंबर मिलते। सबूत नहीं होने के कारण हर बार मायूसी हाथ लगी। कहीं उसे झूठा समझा गया तो कहीं उसकी शैक्षणिक योग्यता पर संदेह किया गया। आखिरकार राजकीय कॉलेज में ही उसे गेस्ट टीचर की जॉब मिल गई।
दिसंबर 2014 में लगाई आरटीआई
निहारिका ने दिसंबर 2014 तक यूनिवर्सिटी के कॉन्वोकेशन का इंतजार किया और उसके बाद पहली आरटीआई लगाकर सत्र के एमकॉम के टॉप टेन विद्यार्थियों के बारे में पूछा। जवाब आया तो पहली बार लिखित में पता लगा कि वह गोल्ड मेडलिस्ट है, लेकिन उसे गोल्ड मेडल व प्रमाण पत्र नहीं दिये गए।
फरवरी 2015 में भेेजा सर्टिफिकेट
आरटीआई लगाने के बाद यूनिवर्सिटी ने निहारिका का सर्टिफिकेट फरवरी 2015 में उसके कॉलेज में भेजा। लेकिन गोल्ड मेडल और स्कॉलरशिप का अभी भी इंतजार था। लंबे इंतजार के बाद निहारिका ने सीएम विंडो में शिकायत दी। इसके बाद यूनिवर्सिटी ने अपने कर्मचारी को वीरवार को गोल्ड मेडल देकर राजकीय कॉलेज भेजा। शुक्रवार को निहारिका को कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एमएस मांझू तथा स्टॉफ के अन्य लोगों ने गोल्ड मेडल प्रदान किया।
स्कॉलरशिप का इंतजार
निहारिका ने बताया कि यूनिवर्सिटी ने सर्टिफिकेट और गोल्ड मेडल तो दे दिया है। लेकिन स्कॉलरशिप के लिए उसे फिर से आरटीआई लगानी पड़ी है, जिसका जवाब गोलमाल ही आता रहा है। न तो उसे यह बताया गया कि उसे कितनी स्कॉलरशिप मिलनी है और उसकी प्रोसेस क्या होगी। उसे अब यूजीसी से भी पत्र लिखने को कहा गया है। अब वह स्कॉलरशिप के लिए भी संघर्ष करेेगी।
समय पर मिलता सर्टिफिकेट तो होता फायदा
निहारिका ने कहा कि उसे समय पर उसका यूनिवर्सिटी टॉपर का सर्टिफिकेट मिल जाता तो उसका पीएचडी में आसानी से दाखिला हो सकता था। यही नहीं किसी बेहतर जगह पर प्लेसमेंट हो सकती थी। सरकारी नौकरी में भी फायदा मिलता। लेकिन अप्लाई करते वक्त बिना सबूत के यह नहीं डाल सकती थी कि वह गोल्ड मेडलिस्ट है। यूनिवर्सिटी की मनमर्जी के कारण उसके करियर पर ब्रेक सा लग गया है। अप्रेल में उसकी शादी हो चुकी है। हालांकि वह अब भी पीएचडी में दाखिला लेने की कोशिश करेगी।
हां छात्रा को शुक्रवार को टॉपर का गोल्ड मेडल दिया गया। यह गोल्ड मेडल वीरवार को केयूके का कर्मचारी लेकर कॉलेज में आया था।
- डॉ. एमएस मांझू, प्राचार्य, राजकीय कॉलेज हिसार