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Hisar News: कोर्ट के आदेश पर ढाणा कलां में 10 एकड़ विवादित जमीन की निशानदेही
Thu, 27 Aug 2026 01:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Thu, 27 Aug 2026 01:02 AM IST
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हांसी निशानदेही के दौरान मौके पर उपस्थित पुलिसकर्मी। पुलिस
हांसी। दिल्ली रोड स्थित गांव ढाणा कलां में राजा हरिंदर सिंह फरीदकोट की करीब 10 एकड़ विवादित जमीन की प्रशासन ने बुधवार को कोर्ट के आदेश पर निशानदेही शुरू की। ड्यूटी मजिस्ट्रेट एवं नायब तहसीलदार सुरेश कुमार की मौजूदगी में प्रशासनिक अमले ने जमीन की पैमाइश की। इस दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा और कड़ी सुरक्षा के बीच कार्रवाई पूरी की गई। ग्रामीण मौके पर मौजूद रहे लेकिन इस बार किसी ने विरोध नहीं किया।
इससे पहले अप्रैल में प्रशासन की टीम निशानदेही के लिए पहुंची थी लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण कार्रवाई नहीं हो सकी थी। अब कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए प्रशासन ने दोबारा प्रक्रिया शुरू की। सदर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सदानंद वत्स भी पुलिस टीम के साथ मौके पर मौजूद रहे।
ग्रामीणों के अनुसार, विवादित जमीन करीब 80 कनाल 17 मरले यानी लगभग 10 किले (एकड़) है। उनका कहना है कि जमीन के बड़े हिस्से पर मकान बने हुए हैं और कुछ लोगों के पास जमीन की रजिस्ट्री भी है। ग्रामीण राजमल राघव ने कहा कि प्रशासन कोर्ट के आदेश पर निशानदेही करने आया है इसलिए उन्हें कार्रवाई पर आपत्ति नहीं है।
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40 साल से रह रहे कई लोग :
ग्रामीण राजमल राघव के अनुसार, संबंधित जमीन पर कई लोग करीब 40 साल से रहे हैं। राजा हरिंदर सिंह फरीदकोट के परिवार और संपत्ति को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा है। राजा की बेटी अमृत कौर सहित परिवार के वारिसों ने संपत्ति पर हक जताते हुए अदालत का रुख किया था। वर्ष 1981 में राजा के बेटे राहुल की सड़क हादसे में मौत के बाद 1982 में संपत्ति को लेकर ट्रस्ट बनाया गया। आरोप है कि बाद में ट्रस्ट से जुड़े लोगों ने मालिकाना हक जताते हुए जमीन की बिक्री शुरू कर दी। इसके बाद राजा की बेटियों ने अदालत में केस दायर किया। मामला जिला अदालत से हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। अदालतों के फैसलों के बाद ट्रस्ट का अधिकार समाप्त कर संपत्ति पर राजा के परिवार के वारिसों का हक माना गया।
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प्रशासन की टीम कोर्ट के आदेश पर केवल निशानदेही करने के लिए मौके पर पहुंची है। पहले ग्रामीणों ने विवाद किया था इसलिए इस बार लोगों को समझाया गया है कि प्रशासन की कार्रवाई का उद्देश्य फिलहाल सिर्फ जमीन की सीमा निर्धारित करना है। लोगों को स्पष्ट किया कि निशानदेही के दौरान किसी प्रकार की तोड़फोड़ की कार्रवाई नहीं की जाएगी।-सुरेश कुमार, ड्यूटी मजिस्ट्रेट एवं नायब तहसीलदार
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इससे पहले अप्रैल में प्रशासन की टीम निशानदेही के लिए पहुंची थी लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण कार्रवाई नहीं हो सकी थी। अब कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए प्रशासन ने दोबारा प्रक्रिया शुरू की। सदर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सदानंद वत्स भी पुलिस टीम के साथ मौके पर मौजूद रहे।
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ग्रामीणों के अनुसार, विवादित जमीन करीब 80 कनाल 17 मरले यानी लगभग 10 किले (एकड़) है। उनका कहना है कि जमीन के बड़े हिस्से पर मकान बने हुए हैं और कुछ लोगों के पास जमीन की रजिस्ट्री भी है। ग्रामीण राजमल राघव ने कहा कि प्रशासन कोर्ट के आदेश पर निशानदेही करने आया है इसलिए उन्हें कार्रवाई पर आपत्ति नहीं है।
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40 साल से रह रहे कई लोग :
ग्रामीण राजमल राघव के अनुसार, संबंधित जमीन पर कई लोग करीब 40 साल से रहे हैं। राजा हरिंदर सिंह फरीदकोट के परिवार और संपत्ति को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा है। राजा की बेटी अमृत कौर सहित परिवार के वारिसों ने संपत्ति पर हक जताते हुए अदालत का रुख किया था। वर्ष 1981 में राजा के बेटे राहुल की सड़क हादसे में मौत के बाद 1982 में संपत्ति को लेकर ट्रस्ट बनाया गया। आरोप है कि बाद में ट्रस्ट से जुड़े लोगों ने मालिकाना हक जताते हुए जमीन की बिक्री शुरू कर दी। इसके बाद राजा की बेटियों ने अदालत में केस दायर किया। मामला जिला अदालत से हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। अदालतों के फैसलों के बाद ट्रस्ट का अधिकार समाप्त कर संपत्ति पर राजा के परिवार के वारिसों का हक माना गया।
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प्रशासन की टीम कोर्ट के आदेश पर केवल निशानदेही करने के लिए मौके पर पहुंची है। पहले ग्रामीणों ने विवाद किया था इसलिए इस बार लोगों को समझाया गया है कि प्रशासन की कार्रवाई का उद्देश्य फिलहाल सिर्फ जमीन की सीमा निर्धारित करना है। लोगों को स्पष्ट किया कि निशानदेही के दौरान किसी प्रकार की तोड़फोड़ की कार्रवाई नहीं की जाएगी।-सुरेश कुमार, ड्यूटी मजिस्ट्रेट एवं नायब तहसीलदार