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अंजनस्थली की बजाय उचानी में बागवानी विवि का मुख्य कैंपस बनाने की योजना, उच्चस्तरीय कमेटी बनाई
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संदीप बिश्नोई
हिसार। करनाल के अंजनस्थली में बनने वाले महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय (एमएचयू) का मुख्य कैंपस उचानी में बनाया जा सकता है। उचानी के बदले चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय को अंजनस्थली में कुछ जगह दी जाएगी।
बागवानी विश्वविद्यालय को बनाने और दोनों विश्वविद्यालयों की कार्य दक्षता को बढ़ाने सहित विभिन्न योजनाओं के लिए सरकार ने एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी एमएचयू कैंपस निर्माण, विभिन्न आवश्यक संसाधनों के इस्तेमाल व बंटवारे, बागवानी पाठ्यक्रमों को शुरू करने सहित कई बिंदुओं पर मंथन कर सिफारिशें करेगी। इस कमेटी में दोनों विश्वविद्यालयों के कुलसचिव, शोध निदेशकों, कृषि विभाग के डायरेक्टर जनरल, बागवानी विभाग के डायरेक्ट जनरल, आईसीएआर और यूजीसी के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।
अंजनस्थली में बनना प्रस्तावित है बागवानी विवि
वर्ष 2016 में सरकार ने नए बागवानी विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। यह विश्वविद्यालय करनाल के अंजनस्थली में बनना है, लेकिन अब इसका मुख्य कैंपस कृषि विज्ञान केंद्र उचानी में बनाए जाने की योजना है। यह केंद्र चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार का था। इसके बदले में अब एचएयू को अंजनस्थली में कुछ जगह रिसर्च के लिए दी जाएगी।
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इन बिंदुओं पर हो सकता है विचार
- दोनों विवि आपस में मिलकर कैसे कार्य कर सकते हैं, ताकि दोनों की कार्य दक्षता बढ़े।
- क्या एचएयू के होर्टिकल्चर से संबंधित कृषि विज्ञान केंद्र एमएचयू को दिए जा सकते हैं। यदि हां तो बदले में एचएयू को क्या दिया जाएगा।
- क्या कृषि विज्ञान केंद्रों में एमएचएयू के विशेषज्ञों को बैठाया जा सकता है।
- एचएयू में भी बागवानी से संबंधित कोर्स हैं, तो दोनों विश्वविद्यालयों में एमएससी पीएचडी की सीटों का आवंटन कैसे हो।
- एमएचयू में कौन-कौन से नए पाठ्यक्रम शुरू किए जा सकते हैं।
कमेटी करेगी सिफारिश
सरकार ने एक उच्चतरीय कमेटी बनाई है, जिसमें दोनों विवि के अधिकारियों सहित अन्य विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। एमएचयू नया विवि है। उसे स्थापित करने के लिए यह कमेटी अपनी सिफारिशें देगी।
- प्रो. समर सिंह, कुलपति, महाराणा प्रताप बागवानी विवि करनाल एवं चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार।
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हिसार। करनाल के अंजनस्थली में बनने वाले महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय (एमएचयू) का मुख्य कैंपस उचानी में बनाया जा सकता है। उचानी के बदले चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय को अंजनस्थली में कुछ जगह दी जाएगी।
बागवानी विश्वविद्यालय को बनाने और दोनों विश्वविद्यालयों की कार्य दक्षता को बढ़ाने सहित विभिन्न योजनाओं के लिए सरकार ने एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी एमएचयू कैंपस निर्माण, विभिन्न आवश्यक संसाधनों के इस्तेमाल व बंटवारे, बागवानी पाठ्यक्रमों को शुरू करने सहित कई बिंदुओं पर मंथन कर सिफारिशें करेगी। इस कमेटी में दोनों विश्वविद्यालयों के कुलसचिव, शोध निदेशकों, कृषि विभाग के डायरेक्टर जनरल, बागवानी विभाग के डायरेक्ट जनरल, आईसीएआर और यूजीसी के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।
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अंजनस्थली में बनना प्रस्तावित है बागवानी विवि
वर्ष 2016 में सरकार ने नए बागवानी विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। यह विश्वविद्यालय करनाल के अंजनस्थली में बनना है, लेकिन अब इसका मुख्य कैंपस कृषि विज्ञान केंद्र उचानी में बनाए जाने की योजना है। यह केंद्र चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार का था। इसके बदले में अब एचएयू को अंजनस्थली में कुछ जगह रिसर्च के लिए दी जाएगी।
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इन बिंदुओं पर हो सकता है विचार
- दोनों विवि आपस में मिलकर कैसे कार्य कर सकते हैं, ताकि दोनों की कार्य दक्षता बढ़े।
- क्या एचएयू के होर्टिकल्चर से संबंधित कृषि विज्ञान केंद्र एमएचयू को दिए जा सकते हैं। यदि हां तो बदले में एचएयू को क्या दिया जाएगा।
- क्या कृषि विज्ञान केंद्रों में एमएचएयू के विशेषज्ञों को बैठाया जा सकता है।
- एचएयू में भी बागवानी से संबंधित कोर्स हैं, तो दोनों विश्वविद्यालयों में एमएससी पीएचडी की सीटों का आवंटन कैसे हो।
- एमएचयू में कौन-कौन से नए पाठ्यक्रम शुरू किए जा सकते हैं।
कमेटी करेगी सिफारिश
सरकार ने एक उच्चतरीय कमेटी बनाई है, जिसमें दोनों विवि के अधिकारियों सहित अन्य विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। एमएचयू नया विवि है। उसे स्थापित करने के लिए यह कमेटी अपनी सिफारिशें देगी।
- प्रो. समर सिंह, कुलपति, महाराणा प्रताप बागवानी विवि करनाल एवं चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार।