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लंपी से छह गोवंश की हुई मौत, 46 हुए संक्रमित
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हिसार। लंपी ग्रसित छह गोवंश की सोमवार को मौत हो गई। इसके अलावा 46 नए पशु संक्रमित मिले। जिले में अब तक 1150 पशु इस जानलेवा बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। इनमें से एक हजार पशु स्वस्थ हुए हैं, जबकि 43 की मौत हुई है। एक लाख 63 हजार गोवंश का टीकाकरण हो चुका है। शेष 12 हजार पशुओं का टीकाकरण चल रहा है।
पशुपालन विभाग के एसडीओ डॉ. रविंद्र कौशिक ने बताया कि सोमवार को कालीरमण गोशाला में एक पशु की मौत हुई। इसमें अलावा डोभी व असरावां गांव में दो-दो पशुओं की मौत इस बीमारी के चलते हुई। इसके अलावा 46 पशु बीमार हैं, जिनमें से 40 ग्रामीण क्षेत्र में व छह गोशालाओं में हैं। जिले के 61 गांवों और 9 गोशालाओं में इस बीमारी से ग्रसित पशु हैं। सोमवार को करीब आठ सौ पशुओं का टीकाकरण किया गया। अब तक 163350 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है।
ठीक हो रहे पशुओं को अधिक देखभाल की जरूरत
एसडीओ डॉ. रविंद्र कौशिक ने बताया कि लंपी से ग्रसित पशु में रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कम हो जाती है। पशु जब रोग से उबरने लगता है, उस वक्त उस पहले की अपेक्षा अधिक देखभाल, पौष्टिक चारा व साफ पानी की जरूरत होती है। पशुपालकों से आग्रह है कि बीमार पशु को छोड़ने की जगह उसकी नियमित देखभाल करें व पौष्टिक चारा व साफ पानी दें, जिससे कि वह जल्दी स्वस्थ हो सके।
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पशुपालन विभाग के एसडीओ डॉ. रविंद्र कौशिक ने बताया कि सोमवार को कालीरमण गोशाला में एक पशु की मौत हुई। इसमें अलावा डोभी व असरावां गांव में दो-दो पशुओं की मौत इस बीमारी के चलते हुई। इसके अलावा 46 पशु बीमार हैं, जिनमें से 40 ग्रामीण क्षेत्र में व छह गोशालाओं में हैं। जिले के 61 गांवों और 9 गोशालाओं में इस बीमारी से ग्रसित पशु हैं। सोमवार को करीब आठ सौ पशुओं का टीकाकरण किया गया। अब तक 163350 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है।
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ठीक हो रहे पशुओं को अधिक देखभाल की जरूरत
एसडीओ डॉ. रविंद्र कौशिक ने बताया कि लंपी से ग्रसित पशु में रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कम हो जाती है। पशु जब रोग से उबरने लगता है, उस वक्त उस पहले की अपेक्षा अधिक देखभाल, पौष्टिक चारा व साफ पानी की जरूरत होती है। पशुपालकों से आग्रह है कि बीमार पशु को छोड़ने की जगह उसकी नियमित देखभाल करें व पौष्टिक चारा व साफ पानी दें, जिससे कि वह जल्दी स्वस्थ हो सके।
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